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पीएम मोदी लोकजीवन में शुचिता और पारदर्शिता के साथ जनता के विश्वास को अक्षुण्ण रखने के लिए स्वयं अपनी डिग्री सार्वजनिक करें : अमिताभ ठाकुर

पीएम मोदी (PM Modi) को दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) के ऑर्डर से इतर जाकर लोकजीवन में शुचिता और पारदर्शिता के साथ जनता के विश्वास को अक्षुण्ण रखने के लिए स्वयं अपने स्तर से अपने डिग्री के तथ्यों को सार्वजनिक करने का अनुरोध किया है।

By संतोष सिंह 
Updated Date

लखनऊ। आजाद अधिकार सेना (Azad Adhikar Sena) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर (National President Amitabh Thakur) ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) को पत्र लिखा है। जिसमें उल्लेख किया है कि पीएम मोदी (PM Modi) को दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) के ऑर्डर से इतर जाकर लोकजीवन में शुचिता और पारदर्शिता के साथ जनता के विश्वास को अक्षुण्ण रखने के लिए स्वयं अपने स्तर से अपने डिग्री के तथ्यों को सार्वजनिक करने का अनुरोध किया है।

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इसके साथ एक्स पर दूसरा वीडियो शेयर कर कहा कि हाई कोर्ट के नरेंद्र मोदी व स्मृति ईरानी (Smriti Irani) डिग्री ऑर्डर को स्पष्ट रूप से अनुचित मानते हुए आजाद अधिकार सेना (Azad Adhikar Sena)  बुधवार 27 अगस्त को विरोध प्रदर्शन करते हुए चीफ जस्टिस को लेटर पिटीशन भेजा जाएगा। आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर ने आज कहा कि कल 27 अगस्त बुधवार को उनकी पार्टी दिल्ली हाई कोर्ट के तरफ से नरेंद्र मोदी व स्मृति ईरानी मामले डिग्री मामले में दिए गए फैसले का विरोध करते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश को लेटर पिटीशन प्रेषित करेगी।

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उन्होंने कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट ने इन लोगों की डिग्री का कोई सार्वजनिक महत्व नहीं होना बताते हुए विश्वविद्यालय को उनकी डिग्री देने से मना कर दिया है। इसके विपरीत सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव लड़ने वाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए अपने स्वयं और परिवार वालों की संपत्ति, अपराधिक विवरण, डिग्री सहित तमाम जानकारी को अत्यंत सार्वजनिक महत्व का बताते हुए शपथ पत्र के माध्यम से उन्हें सार्वजनिक करने के निर्देश दिए हैं।

अमिताभ ठाकुर ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से दिल्ली हाई कोर्ट का आदेश प्राथमिक स्तर पर ही गलत साबित हो जाता है। अतः आजाद अधिकार सेना द्वारा मुख्य न्यायाधीश से उनके लेटर पिटीशन को स्वीकार कर दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश को तलब करते हुए उसे निरस्त किए जाने का अनुरोध किया जायेगा।

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बतातें चलें कि दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ग्रेजुएशन की डिग्री से जुड़ी जानकारी का खुलासा करने का निर्देश दिया गया था। डीयू ने साल 2017 में सीआईसी के उस आदेश के खिलाफ याचिका दायर की थी जिसमें 1978 में बीए प्रोग्राम पास करने वाले छात्रों के रिकॉर्ड की जांच की अनुमति दी गई थी। पीएम मोदी ने भी उसी समय यह परीक्षा पास की थी। 24 जनवरी 2017 को पहली सुनवाई के दिन इस आदेश पर रोक लगा दी गई थी।

दायर की गई थी RTI

न्यायमूर्ति सचिन दत्ता ने सीआईसी के आदेश को चुनौती देने वाली दिल्ली विश्वविद्यालय की याचिका पर यह फैसला सुनाया। न्यायमूर्ति सचिन दत्ता ने 27 फरवरी को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। नीरज नामक व्यक्ति की ओर से आरटीआई आवेदन के बाद, सीआईसी ने 1978 में बीए की परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले सभी छात्रों के रिकॉर्ड के निरीक्षण की 21 दिसंबर, 2016 को अनुमति दे दी।

अजनबी नहीं देख सकते रिकॉर्ड

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता विश्वविद्यालय की ओर से पेश हुए और उन्होंने दलील दी कि केंद्रीय सूचना आयोग द्वारा पारित विवादित आदेश रद्द किए जाने योग्य है। उन्होंने कहा कि उन्हें कोर्ट को रिकॉर्ड दिखाने में कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा कि 1978 की एक आर्ट ग्रेजुएट की डिग्री है। सॉलिसिटर जनरल ने आगे कहा कि विश्वविद्यालय को अदालत को डिग्री दिखाने में कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन वह रिकॉर्ड को अजनबियों की तरफ से जांच के लिए नहीं रख सकता।

स्मृति ईरानी शैक्षणिक योग्यता मामले में दिए गए सीआईसी के आदेश को दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को रद्द कर दिया

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बता दें कि पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी शैक्षणिक योग्यता मामले में दिए गए सीआईसी के आदेश को दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को रद्द कर दिया है। सीआईसी ने सीबीएसई को यह बताने का निर्देश दिया था कि स्मृति ईरानी ने वर्ष 1991 और 1993 में 10वीं और 12वीं की परीक्षा उतीर्ण की थी या नहीं। जस्टिस सचिन दत्ता ने अपने फैसले में कहा कि विवादित आदेश में केंद्रीय सूचना आयोग का दृष्टिकोण पूरी तरह से गलत था। कोर्ट ने कहा कि यह निष्कर्ष कि किसी व्यक्ति विशेष की डिग्री/अंक/परिणाम से संबंधित जानकारी सार्वजनिक सूचना की प्रकृति की है।

चुनावी हलफनामों में भ्रामक जानकारी का आरोप

कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि केंद्रीय सूचना अधिकारी सुप्रीम कोर्ट बनाम सुभाष चंद्र अग्रवाल मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले का उल्लंघन है। यह याचिका अहमर खान ने दायर की थी। याचिका में ईरानी द्वारा वर्ष 2004, 2011 और 2014 में निर्वाचन आयोग के समक्ष दायर तीन हलफनामे में अपनी शैक्षणिक योग्यता के बारे में गलत और भ्रामक जानकारी देने का आरोप लगाया गया था।

वर्ष 2004 में चांदनी चौक से लोकसभा का चुनाव लड़ने के लिए ईरानी ने अपने हलफनामे में कहा था कि उन्होंने 1996 में दिल्ली विश्वविद्यालय (पत्राचार स्कूल) से बीए पूरा किया। वही गुजरात से राज्यसभा के लिए चुनाव लड़ते समय वर्ष 2011 में एक और हकफनामा दायर कर कहा था कि उनकी उच्चतम शैक्षणिक योग्यता दिल्ली विश्वविद्यालय से वर्ष 1994 में बीकॉम पार्ट -1 स्कूल ऑफ कोरोस्पोंडेंस थी।

याचिकाकर्ता खान ने यह भी दावा किया था कि ईरानी ने 2014 में अमेठी से लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए एक और हलफनामा दायर किया था। इसमें ईरानी ने कहा था कि उन्होंने 1994 में डीयू स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग (कोरोस्पोंडेंस) से बीकॉम पार्ट- 1 किया है।

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