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देश में जातिगत जनगणना के आधार पर ही नीतियां बननी चाहिए, आज देश में अन्याय के कारण पूरा तंत्र बिखर रहा : राहुल गांधी

जातिगत जनगणना से ही देश की सही स्थिति पता लगेगी। इससे सभी को पता चल जाएगा कि हमारी आबादी कितनी है और भागीदारी कितनी। देश में जातिगत जनगणना के आधार पर ही नीतियां बननी चाहिए। आज देश में अन्याय के कारण पूरा तंत्र बिखर रहा है। लोगों के पास रोजगार नहीं है, किसान को सही दाम नहीं मिलता, मजदूर को सही मजदूरी नहीं मिलती,

By शिव मौर्या 
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पटना। कांग्रेस सांसद और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी शनिवार को पटना में न्याय योद्धा कांग्रेस कार्यकर्ता बैठक को संबोधित किए। उन्होंने कहा, मोहन भागवत कहते हैं कि हिंदुस्तान को आजादी 15 अगस्त 1947 को नहीं मिली है। वे ऐसी बात कहकर संविधान को नकार रहे हैं, क्योंकि उनकी नजरों में ‘आजादी और संविधान’ का कोई मतलब नहीं है। इसीलिए वह हिंदुस्तान की हर संस्था से अंबेडकर जी, गांधी जी, भगवान बुद्ध जी, फुले जी की सोच को मिटा रहे हैं।

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उन्होंने आगे कहा, पहले नरेंद्र मोदी और BJP के लोग कहते थे कि-अगर हमारी 400 से ज्यादा सीटें आईं, तो हम संविधान बदल देंगे। लेकिन.. जब हम लोगों ने मिलकर नरेंद्र मोदी को संविधान की सच्चाई समझाई, तो उन्होंने संविधान को माथे से लगा लिया। BJP के लोग संविधान को ख़त्म करना चाहते थे, लेकिन हिंदुस्तान की जनता ने कहा कि अगर आप इसकी इज्जत नहीं करेंगे तो हम आपको उठाकर फेंक देंगे।

साथ ही कहा, मैं आपको कुछ आंकड़े देना चाहता हूं। आपने रिप्रेजेंटेशन की बात की, आपने कहा कि पॉलिटिकल रिप्रेजेंटेशन होना चाहिए, लेकिन आज के हिंदुस्तान में MLA और MP के पास कोई पॉवर नहीं है। मैं लोकसभा में BJP के पिछड़े वर्ग, दलित वर्ग, आदिवासी वर्ग के MP से मिलता हूं। वे कहते हैं कि हमारे पास कोई पॉवर नहीं है। यानी पॉवर कहीं और है, रिप्रजेंटेशन कहीं और… इसका मतलब ये नहीं है कि रिप्रेजेंटेशन नहीं मिलना चाहिए, लेकिन मेरा कहना है सिर्फ रिप्रेजेंटेशन से काम नहीं होने वाला है। आप हिंदुस्तान की बड़ी-बड़ी कंपनियों की लिस्ट निकालिए। मीडिया में एंकर्स की लिस्ट निकालिए, मालिकों की लिस्ट निकालिए। इस कंपनियों के मालिक, मैनेजमेंट में आपको एक भी पिछड़ा, दलित, आदिवासी वर्ग के व्यक्ति का नाम नहीं मिलेगा।

राहुल गांधी ने आगे कहा, कुछ साल पहले मैं सोच रहा था कि: मीडिया किसानों की बात क्यों नहीं करती, देश से जुड़े मुद्दे क्यों उठाती, बेरोजगारी पर बात क्यों नहीं करती? फिर मैंने लिस्ट निकाली तो पता चला कि इनके मालिकों में कोई भी दलित, पिछड़े, आदिवासी वर्ग से नहीं था। मैं कुछ समय पहले रात में AIIMS गया। सैकड़ों लोग मेट्रो स्टेशन में लेटे हुए हैं। किसी को कैंसर है, किसी को दिल की बीमारी है और किसी को सांस लेने में तकलीफ है। उनके लिए न खाने की सुविधा है, न ही शौचालय की व्यवस्था.. और लोग प्राइवेट हॉस्पिटल जा नहीं सकते।

उन्होंने आगे कहा, आपने लड़ाई लड़कर राजनीतिक रिप्रेजेंटेशन तो पा लिया, लेकिन आपको सत्ता कहीं नहीं मिली। जब इन लोगों को पता लगा कि पिछड़ा वर्ग, दलित रिप्रेजेंटेशन ले रहा है, तो आपको रिप्रजेंटेशन देकर पॉवर कहीं और ले गए। पता है पॉवर कहां गई? वो पॉवर अडानी-अंबानी और RSS के पास चली गई। साथ ही कहा, जातिगत जनगणना से ही देश की सही स्थिति पता लगेगी। इससे सभी को पता चल जाएगा कि हमारी आबादी कितनी है और भागीदारी कितनी। देश में जातिगत जनगणना के आधार पर ही नीतियां बननी चाहिए। आज देश में अन्याय के कारण पूरा तंत्र बिखर रहा है। लोगों के पास रोजगार नहीं है, किसान को सही दाम नहीं मिलता, मजदूर को सही मजदूरी नहीं मिलती, क्योंकि देश का सारा धन चंद लोगों के पास जा रहा है। जातिगत जनगणना के बिना विकास की सही तरीके से बात नहीं की जा सकती है।

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