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रेलवे पर लगा बीस लाख का जुर्माना, कोच ढूंढने के दौरान यात्री को प्लेटफार्म पर लगी थी चोट

उत्तर प्रदेश के वाराणसी रेलवे स्टेशन पर लापरवाही का बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ा। दरअसल यहां के रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर कोच डिस्प्ले बोर्ड खराब होने की वजह से ट्रेन का कौन सा डिब्बा कहां लगेगा इसकी जानकारी नहीं हो सकी।ऐसे में ट्रेन आने पर लोगो को अपना कोच ढूंढने में दिक्कत हुई और इसकी वजह से भगदड़ मच गई।

By प्रिन्सी साहू 
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उत्तर प्रदेश के वाराणसी रेलवे स्टेशन पर लापरवाही का बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ा। दरअसल यहां के रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर कोच डिस्प्ले बोर्ड खराब होने की वजह से ट्रेन का कौन सा डिब्बा कहां लगेगा इसकी जानकारी नहीं हो सकी।ऐसे में ट्रेन आने पर लोगो को अपना कोच ढूंढने में दिक्कत हुई और इसकी वजह से भगदड़ मच गई।

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इस भगदड़ में अधिवक्ता दुर्गेश चंद्र गौतम गिरकर चोटिल हो गए। उन्होंने इस बड़ी लापरवाही की शिकायत उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में कर दी। आयोग ने रेलवे की गलती मानी और अधिवक्ता को 20.25 लाख रुपए जुर्माना देने का आदेश दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अलीगढ़ रघुवीरपुरी निवासी अधिवक्ता दुर्गेश चंद्र गौतम की ओर से वाराणसी स्टेशन अधीक्षक जीएम नॉर्दन रेलवे, बरौदा हाउ व जीएम नॉर्थ ईस्टर्न रेलवे के खिलाफ वाद दायर किया गया था। उनके बेटे अधिवक्ता देवेश गौतम ने बताया कि पिता दुर्गेश व मातासुधारानी गौतम काशी दर्शन के लिए गए थे। वहां ले लौटने के लिए 21 अगस्त 2024 को प्रीमियम तत्काल कोटा के तहत लिच्छवी एक्सप्रेस गाड़ी संख्या 14005 में दोनो के लिए टिकट बुक की गई। एसी-3 के बी-3 कोच में सीट आरक्षित थी।

22 अगस्त 2024 को ट्रेन के नियत समय दोपहर तीन बजकर बीस मिनट से आधा घंटा पहले दंपती वारामसी स्टेशन पहुंच गए। उस समय बारिश की वजह से प्लेटफार्म पर फिसलन थी। बी 3 कोट कहां आएगा ये डिस्प्ले बोर्ड पर नहीं दिखा। कोई सूचना भी नहीं दी गई। ट्रेन का स्टॉपेज दो मिनट का था। जब ट्रेन रुकी तो डिब्बा वहां से करीब छह सौ मीटर दूर था।

इसके चलते अफरा तफरी और भगदड़ मच गई। डिब्बे में चढ़ने की कोशिश में दुर्गेश गिर गए। उनके घुटने में चोट आई। पत्नी व अन्य यात्रियों की मदद से वह ट्रेन में चढ़ सके।लेकिन रास्ते भर दर्द से परेशान रहें। अलीगढ़ जंक्शन पर उतरे तो व्हीलचेयर की मदद से उन्हे बाहर पार्किग में खड़ी कार तक लाया गया। वहां से निजी अस्पताल ले गए जहां उपचार चला।

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इसके बाद रेलवे के खिलाफ आयोग में याचिका डाली गई। मामले में आयोग के अध्यक्ष व न्यायाधीश हसनैन कुरैशी, सदस्य आलोक उपाध्याय व पूर्णिमा सिंह राजपूत की पीठ ने पीड़ित के हक में फैसला सुनाया है।आयोग ने अधिवक्ता के बिस्तर पर रहने के दौरान व्यवसाय में नुकसान के रुप में दस लाख व उपचार खर्च व मानसिक उत्पीड़न के लिए पांच पांच लाख रुपये और 25 हजार रुपए वाद व्यय के रुप में देने का आदेश दिया है।

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