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विवाह के बाद दावत नहीं दी तो, गांव वालों ने किया सामाजि बहिष्कार

मध्य प्रदेश के सागर जिले से इंसानियत को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक युवक को विधवा महिला से शादी करना इतना महंगा पड़ गया कि गांव के कथित ठेकेदारों ने उसका सामाजिक बहिष्कार कर दिया। हालत यह है कि अब दंपत्ति अपनी छोटी बच्ची के साथ न्याय की गुहार लगाने कलेक्टर कार्यालय पहुंचा है..

By हर्ष गौतम 
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Sagar'(M.P):  मध्य प्रदेश के सागर जिले से इंसानियत को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक युवक को विधवा महिला से शादी करना इतना महंगा पड़ गया कि गांव के कथित ठेकेदारों ने उसका सामाजिक बहिष्कार कर दिया। हालत यह है कि अब दंपत्ति अपनी छोटी बच्ची के साथ न्याय की गुहार लगाने कलेक्टर कार्यालय पहुंचा है।

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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सागर जिले के चितौरा गांव निवासी राजेंद्र पटेल ने करीब आठ महीने पहले मुख्यमंत्री कल्याणी विवाह सहायता योजना के तहत एक विधवा महिला से शादी की थी। राजेंद्र ने न सिर्फ महिला को अपनी पत्नी के रूप में अपनाया, बल्कि उसकी पहली शादी से हुई मासूम बच्ची को भी अपना नाम और पिता का प्यार दिया। जहां सरकार विधवा विवाह और सामाजिक समरसता को बढ़ावा दे रही है, वहीं गांव के कुछ दबंगों को यह रिश्ता रास नहीं आया। राजेंद्र का आरोप है कि शादी के बाद गांव के कथित मुखियाओं ने उन पर दबाव बनाना शुरू कर दिया।

उन्होंने शर्त रखी कि अगर समाज में रहना है, तो पहले पूरे गांव को ‘कच्चा भोजन’ और फिर ‘पक्का भोजन’ कराना होगा। यानी शादी की स्वीकृति के बदले पूरे गांव को भोज देना जरूरी बताया गया। जब राजेंद्र ने इस फिजूलखर्ची और अनुचित मांग को मानने से इनकार किया, तो गांव में फरमान सुना दिया गया—“इनका हुक्का-पानी बंद कर दो।” और समाज से ​बहिष्कार कर दो। इसके बाद परिवार का सामाजिक बहिष्कार शुरू हो गया। किसी भी धार्मिक, सामाजिक या पारिवारिक कार्यक्रम में उन्हें बुलाया नहीं जाता। इतना ही नहीं, राजेंद्र की पत्नी की छोटी बच्ची को गांव के दूसरे बच्चों के साथ खेलने तक से रोक दिया गया। सीमावर्ती गांवों में भी परिवार की बदनामी की जा रही है, जिससे वे मानसिक रूप से बेहद परेशान हैं।

पीड़ित राजेंद्र पटेल का कहना है, “हमने कोई गलत काम नहीं किया। हमने सिर्फ एक बेसहारा महिला को सहारा दिया है। क्या किसी की जिंदगी संवारना अपराध है? समाज के मुखिया हमें प्रताड़ित कर रहे हैं और हमारी बच्ची का भविष्य अंधकार में डाल रहे हैं। हमें सिर्फ शांति से जीने दिया जाए।” मंगलवार को यह पीड़ित परिवार सागर कलेक्ट्रेट पहुंचा और प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई। राजेंद्र ने लिखित शिकायत देकर सामाजिक बहिष्कार करने वाले लोगों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। साथ ही परिवार की सुरक्षा और सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार मांगा है।

अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी गंभीरता दिखाता है और क्या इस परिवार को समाज के ठेकेदारों के अत्याचार से राहत मिल पाती है या नहीं।

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