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रामलला के खजाने में सेंधमारी का सनसनीखेज खुलासा, न आईकार्ड, न चेकिंग, सिर्फ ड्यूटी चार्ट से एंट्री और कर दिया करोड़ों का घोटाला

राम मंदिर (Ram Mandir) में रामलला (Ram Lalla) के चढ़ावे और दान में हुई करोड़ों की चोरी के मामले में जो तथ्य सामने आए हैं। वे इस बात की खुद गवाही दे रहे हैं कि चोरों ने किसी चालाकी से नहीं, बल्कि ट्रस्ट की ढीली व्यवस्था का फायदा उठाकर इस महाघोटाले को अंजाम दिया। अति-सुरक्षित माने जाने वाले राम जन्मभूमि परिसर (Ram Janmabhoomi Complex) में बिना किसी पुख्ता सुरक्षा जांच और बिना आधिकारिक पहचान पत्र (ID Cards) के एंट्री दी जा रही थी।

By santosh singh 
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अयोध्या। राम मंदिर (Ram Mandir) में रामलला (Ram Lalla) के चढ़ावे और दान में हुई करोड़ों की चोरी के मामले में जो तथ्य सामने आए हैं। वे इस बात की खुद गवाही दे रहे हैं कि चोरों ने किसी चालाकी से नहीं, बल्कि ट्रस्ट की ढीली व्यवस्था का फायदा उठाकर इस महाघोटाले को अंजाम दिया। अति-सुरक्षित माने जाने वाले राम जन्मभूमि परिसर (Ram Janmabhoomi Complex) में बिना किसी पुख्ता सुरक्षा जांच और बिना आधिकारिक पहचान पत्र (ID Cards) के एंट्री दी जा रही थी। सिर्फ कागज के एक टुकड़े यानी ‘ड्यूटी चार्ट’ को दिखाकर आरोपी महीनों तक मंदिर के भीतर आते-जाते रहे और रामलला के खजाने में सेंध लगाते रहे। हैरान करने वाली बात यह है कि चढ़ावे की चोरी की भनक प्रबंधन को महीनों पहले लग चुकी थी, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने इसे ‘प्रभु सब देख रहे हैं’ कहकर टाल दिया।

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चोरों के लिए सुरक्षा के नियम पूरी तरह ताक पर रख दिए गए थे , सिर्फ एक पर्चा और ‘नो चेकिंग’

अब जो तथ्य सामने आए हैं उसके मुताबिक जिस राम मंदिर परिसर की सुरक्षा व्यवस्था के बारे कहा जाता है कि वहां परिंदा भी पर नहीं मार सकता वहां चढ़ावा गिनने वाले इन चोरों के लिए सुरक्षा के नियम पूरी तरह ताक पर रख दिए गए थे। मार्च 2025 में जब ट्रस्ट द्वारा 10 नए कर्मचारियों को कैश काउंटिंग के लिए रखा गया, तो काफी वक्त बीत जाने के बाद भी उनका कोई आधिकारिक आई-कार्ड जारी नहीं किया गया। सुरक्षा एजेंसियों और ट्रस्ट की सबसे बड़ी लापरवाही यह रही कि इन सभी बाहरी लड़कों को मंदिर परिसर में प्रवेश के लिए सिर्फ एक ‘ड्यूटी शीट’ थमा दी गई थी। सुरक्षा द्वार पर तैनात सुरक्षाकर्मी बिना किसी बायोमेट्रिक या कड़े वेरिफिकेशन के, सिर्फ उस कागज को देखकर इन्हें अंदर जाने देते थे। इस ढील का नतीजा यह हुआ कि बिना किसी ठोस चेकिंग के ये लड़के हर दिन मंदिर के सबसे गोपनीय हिस्से यानी कैश काउंटिंग रूम तक पहुंच रहे थे।

चंपत राय का वीटो और अनिल मिश्रा का ‘कमांड कंट्रोल’

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इस पूरी अव्यवस्था की जड़ें ट्रस्ट के शीर्ष नेतृत्व के फैसलों से जुड़ी हैं। सूत्रों के मुताबिक, ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कैश प्रबंधन और नियुक्तियों से जुड़ी सभी ‘सुप्रीम पावर’ डॉ.अनिल मिश्रा को सौंप रखी थी। जब कुंभ के बाद चढ़ावे की भारी आमद को संभालने के लिए नए स्टाफ की जरूरत पड़ी, तो चंपत राय ने खुद इन 10 उम्मीदवारों को चुनकर अनिल मिश्रा के पास भेजा। 2 मार्च को निर्देश मिलने के बाद 4 मार्च 2025 को अनिल मिश्रा ने अपने स्तर पर इनका इंटरव्यू लिया और महज दो दिन बाद, यानी 6 मार्च को इन सभी की नियुक्ति कर दी गई। 18,000 रुपये प्रति माह के वेतन पर रखे गए इन कर्मचारियों का न तो कोई बैकग्राउंड वेरिफिकेशन कराया गया और न ही उनके आई-कार्ड बनाने की जहमत उठाई गई। पूरी व्यवस्था सिर्फ अनिल मिश्रा के ‘कमांड कंट्रोल’ और चंपत राय द्वारा दी गई छूट के भरोसे चलती रही।

पुलिस चौकी बना लूट का अड्डा: कैमरों के सामने होती रही चोरी

चढ़ावे की रकम इतनी ज्यादा थी कि पीएफसी (Pilgrim Facilitation Centre) भवन के मुख्य बेसमेंट काउंटिंग सेंटर के अलावा, परिसर के भीतर स्थित ‘पुलिस चौकी’ में एक दूसरा काउंटिंग सेंटर बना दिया गया।

आरोपियों अनुकल्प, अविनाश, करुणेश, लवकुश और बाद में आए मनीष यादव व रमाशंकर जैसे आरोपियों को इसी पुलिस चौकी वाले कमरे में नोटों की छंटाई और मशीनों से गिनती के काम में लगाया गया था। हैरानी की बात यह है कि जिस कमरे में यह खेल चल रहा था, वहीं सीसीटीवी कैमरा और उसकी मॉनिटर स्क्रीन दोनों एक साथ लगी थीं। यानी जो लोग नोटों की गड्डियां गायब कर रहे थे, वे खुद स्क्रीन पर देख सकते थे कि वे कैमरे की जद में आ रहे हैं या नहीं। पीएफसी भवन के मुख्य मॉनिटरिंग रूम में तैनात रहने वाले सुरक्षाकर्मी और जिम्मेदार लोग अधिकतर समय अपने कमरों से बाहर रहते थे, जिससे इन चोरों को बिना किसी डर के वारदात को अंजाम देने का पूरा मौका मिला।

जब इंचार्ज ने दबा दी पहली चोरी की खबर, कहा-‘प्रभु देख ही रहे हैं…’

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जांच में सबसे हैरान करने वाला मोड़ यह आया है कि इस चोरी की जानकारी ट्रस्ट के अधिकारियों को फरवरी के महीने में ही मिल गई थी। काउंटिंग टीम के ही एक सदस्य ने जब ईमानदारी दिखाते हुए इस पूरी प्रक्रिया के इंचार्ज और रिटायर्ड बैंक कर्मचारी सुभाष श्रीवास्तव को बताया कि कुछ लड़के कैश गायब कर रहे हैं, तो कार्रवाई करने के बजाय उसे दबा दिया गया। आरोप है कि सुभाष श्रीवास्तव ने इस पर बेहद गैर-जिम्मेदाराना जवाब देते हुए कहा था कि प्रभु सब देख ही रहे हैं, कौन सा हमारे-आपके घर से जा रहा है? इंचार्ज की इसी शह और टिन्नू यादव की मनमर्जी के चलते चोरों के हौसले बुलंद हो गए। नोटों की चोरी तो हो ही रही थी, साथ ही रामलला को भक्तों द्वारा चढ़ाए गए सोने-चांदी के आभूषणों का कोई व्यवस्थित रिकॉर्ड न होने के कारण उन्हें भी पार करना इन चोरों के लिए बेहद आसान हो गया। फिलहाल पुलिस ने इस ‘ड्यूटी चार्ट’ और आरोपियों की प्रोफाइल खंगालते हुए जांच का दायरा बढ़ा दिया है।

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