कतर के पूर्व अमीर शेख हमद बिन खलीफा अल थानी (Sheikh Hamad bin Khalifa Al Thani) का 74 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है। अल जजीरा की रिपोर्ट (Al Jazeera Report) के मुताबिक कतर के शाही दफ्तर अमीरी दीवान (Royal Office Amiri Diwan) ने रविवार को उनके निधन की पुष्टि की है। बयान में कहा गया कि देश ने अपने एक महान नेता को खो दिया है और उनके लिए ईश्वर से दया की प्रार्थना की गई है।
नई दिल्ली। कतर के पूर्व अमीर शेख हमद बिन खलीफा अल थानी (Sheikh Hamad bin Khalifa Al Thani) का 74 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है। अल जजीरा की रिपोर्ट (Al Jazeera Report) के मुताबिक कतर के शाही दफ्तर अमीरी दीवान (Royal Office Amiri Diwan) ने रविवार को उनके निधन की पुष्टि की है। बयान में कहा गया कि देश ने अपने एक महान नेता को खो दिया है और उनके लिए ईश्वर से दया की प्रार्थना की गई है। मौत के कारण का फिलहाल खुलासा नहीं किया गया है। उनके निधन के बाद पूरे कतर में शोक का माहौल है। यह खबर ऐसे समय में आई है जब अमेरिका और ईरान में जंग चल रही है और ईरान की तरफ से कतर पर भी हमला किया गया है।
पिता का ही कर दिया था तख्तापलट
शेख हमद बिन खलीफा अल थानी (Sheikh Hamad bin Khalifa Al Thani) का जन्म 1 जनवरी 1952 को हुआ था। उन्होंने ब्रिटेन की प्रतिष्ठित रॉयल मिलिट्री अकादमी सैंडहर्स्ट (Royal Military Academy Sandhurst) में मिलिट्री ट्रेनिंग ली और बाद में कतर की सेना में कई अहम जिम्मेदारियां संभालीं। 1977 में उन्हें आधिकारिक तौर पर उत्तराधिकारी घोषित किया गया था। लेकिन उन्होंने सत्ता छीन कर हासिल की। जून 1995 में उन्होंने एक बिना खून बहाए महल तख्तापलट के जरिए अपने पिता शेख खलीफा बिन हमद अल थानी (Sheikh Khalifa bin Hamad Al Thani) को सत्ता से हटा दिया। इसके बाद वह खुद कतर के अमीर बन गए। यह ऐसे समय पर हुआ जब उनके पिता स्विट्जरलैंड में छुट्टियां मना रहे थे। पिता को फ्रांस और अबू धाबी में निर्वासन में रहना पड़ा और 2004 में वह लौटे।
बेटे को खुद ही सौंप दी सत्ता
शेख हमद के 18 साल के शासनकाल ने कतर की तस्वीर बदल दी। उनके नेतृत्व में प्राकृतिक गैस के विशाल भंडार का बड़े पैमाने पर विकास हुआ और कतर दुनिया के सबसे समृद्ध देशों में शामिल हो गया। इसी दौर में 1996 में अल जजीरा न्यूज नेटवर्क (Al Jazeera News Network) की स्थापना हुई। उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक उपलब्धियों में 2013 का उनका एक फैसला भी माना जाता है। उन्होंने स्वेच्छा से सत्ता अपने बेटे शेख तमीम बिन हमद अल थानी (Sheikh Tamim bin Hamad Al Thani) को सौंप दी। पश्चिम एशिया (West Asia) के मुस्लिम देशों के लिए उनका यह कदम एक अलग मिसाल माना गया। ऐसा इसलिए क्योंकि यहां के ज्यादातर देशों में सत्ता परिवर्तन अक्सर शासक की मौत या तख्तापलट के बाद होता है।
उनके कार्यकाल में कतर ने अंतरराष्ट्रीय जियोपॉलिटिक्स (International Geopolitics) में भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लेबनान के राजनीतिक संकट और फिलिस्तीनी गुटों में मध्यस्थ की भूमिका निभाई। 2010 में कतर को 2022 फीफा वर्ल्ड कप (FIFA World Cup) की मेजबानी मिलने का रास्ता भी उनके शासनकाल में ही तैयार हुआ। इसी के बाद देश में बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे का विकास हुआ।
विवाद से नहीं बचे
हालांकि उनकी विरासत पूरी तरह विवादों से अछूती नहीं रही। अपने पिता को सत्ता से हटाने का फैसला लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रहा। इसके अलावा अल जजीरा की संपादकीय नीति और कतर के हमास जैसे संगठनों से संबंधों को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समय-समय पर सवाल उठे। इसके बावजूद उन्हें उस नेता के रूप में याद किया जाता है, जिसने एक छोटे से खाड़ी देश को आर्थिक, कूटनीतिक और ग्लोबल लेवल पर नई पहचान दिलाई।