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सचिवालय में सालों से जमे अफसरों के खिलाफ सपा विधायक पंकज मलिक ने खोला मोर्चा, यूपी विधानसभा अध्यक्ष को लिखा पत्र

यूपी में भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अनियमितताओं को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन इस बार मामला बेहद गंभीर है। सपा विधायक पंकज मलिक के तरफ से लिखे गए पत्र ने नगर विकास विभाग में अधिकारियों की मिलीभगत को उजागर कर दिया है।

By संतोष सिंह 
Updated Date

लखनऊ। यूपी में भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अनियमितताओं को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन इस बार मामला बेहद गंभीर है। सपा विधायक पंकज मलिक के तरफ से लिखे गए पत्र ने नगर विकास विभाग में अधिकारियों की मिलीभगत को उजागर कर दिया है। सपा विधायक ने विधानसभा अध्यक्ष को लिखे पत्र में नगर विकास विभाग के अधिकारियों पर आरोप लगाते हुए लिखा कि अगर इन अधिकारियों पर तत्काल कार्यवाही नहीं होती है तो 7000 करोड़ से अधिक की 550 महत्वपूर्ण योजनाएँ भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाएगी ।

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नगर विकास विभाग में ट्रांसफर पॉलिसी की अनदेखी

सपा विधायक पंकज मलिक के तरफ से लिखे गए पत्र ने नगर विकास विभाग में ट्रांसफर पॉलिसी के घोर उल्लंघन और अधिकारियों की मिलीभगत को उजागर कर दिया है। विभाग में 2017 से लगातार कई अधिकारी एक ही पद पर तैनात हैं और उनकी तैनाती की अवधि तय सीमा को पार कर चुकी है। ये अधिकारी महत्वपूर्ण, नीति निर्धारक और बजट आबंटन जैसे कार्यों में शामिल हैं। जिस पर सपा विधायक पंकज मालिक ने सवाल उठाया कि आखिर इन्हें किसके आदेश पर और क्यों विभाग में रोका गया है? क्या नगर विकास विभाग को स्थानांतरण नीति से मुक्त रखने का कोई विशेष फरमान जारी किया गया है?

क्या है ट्रांसफर पॉलिसी जिसे लेकर सपा विधायक ने लगाए आरोप?

दरअसल 16 अप्रैल 2018 को उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव के तरफ से जारी एक सर्कुलर ट्रांसफर पॉलिसी लागू की गई थी, जिसके तहत किसी भी समीक्षा अधिकारी व अनुभाग अधिकारी को अधिकतम 5 वर्ष, जबकि अनुसचिव से विशेष सचिव अधिकतम 3 वर्ष तक ही एक विभाग में रह सकते हैं।

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अधिकारियों की मिलीभगत से बड़ा खेल

विधायक पंकज मलिक ने पत्र में उन 15 अधिकारियों के नाम उजागर किए हैं, जो तय सीमा से अधिक समय से नगर विकास विभाग में तैनात हैं। इन अधिकारियों की तैनाती की अवधि पूरी होने के बावजूद उच्च स्तरीय मिलीभगत के कारण उन्हें हटाया नहीं गया, बल्कि प्रमोशन के बाद भी उन्हीं पदों पर बनाए रखा गया है।

इन पर लगाए आरोप

1- अवधेश यादव – 2017 से – विभागीय जाँच के बावजूद तैनाती बरकरार

2- अशोक – 2017 से लगातार समीक्षा अधिकारी के पद पर तैनात

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3- विपुल – 2017 से लगातार समीक्षा अधिकारी के पद पर तैनात

4- शिवांगी – 2017 से लगातार समीक्षा अधिकारी के पद पर तैनात

5- गौरव दुबे – 2017 से लगातार समीक्षा अधिकारी के पद पर तैनात

6- आनंद – 2017 से लगातार समीक्षा अधिकारी के पद पर तैनात

7- अखिलेश्वर – 2019 से लगातार समीक्षा अधिकारी के पद पर तैनात

8- वासिफ – 2018 से लगातार तैनात – विभागीय जाँच के बावजूद तैनाती बरकरार

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9- सतपाल – 2019 से लगातार समीक्षा अधिकारी के पद पर तैनात

10- गजेन्द्र – 2019 से लगातार समीक्षा अधिकारी के पद पर तैनात

11- शैलेन्द्र – 2019 से लगातार समीक्षा अधिकारी के पद पर तैनात

12- तूलिका – 2019 से लगातार समीक्षा अधिकारी के पद पर तैनात

13- ब्रजेश – 2019 से लगातार समीक्षा अधिकारी के पद पर तैनात

14- कृपा जयशंकर जायसवाल -2017 से लगातार तैनात – प्रमोशन के बावजूद ट्रांसफर नहीं हुआ

15- प्रवीन कोरी – 2017 से लगातार तैनात – विभागीय जाँच के बावजूद तैनाती बरकरार

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सपा विधायक ने सीएम योगी को घेरा 

अधिकारियों के ट्रांसफर न होने पर सपा विधायक ने सवाल उठाते हुए लिखा कि आखिर किसके आदेश पर नगर विकास विभाग में ट्रांसफर पॉलिसी का अनुपालन नहीं हो रहा है। कहीं सीएम योगी के कारण तो इन अधिकारियों को ट्रांसफर पॉलिसी से छूट नहीं मिल रही है।

ट्रांसफर का डर नहीं इसलिए कर रहे भ्रष्टाचार

सपा विधायक ने पत्र में अधिकारियों पर आरोप लगाते हुए लिखा कि इन अधिकारियों के अंदर न ही सजा का डर है न ही ट्रांसफर का । क्योंकि उन्हें पता है कि सचिवालय प्रशासन विभाग से मिलीभगत के कारण न ही उनका ट्रांसफर होगा और न ही उन पर कोई कार्यवाही होगी। जिसके चलते ये सभी भ्रष्टाचार कर रहे हैं। सपा विधायक ने विधानसभा अध्यक्ष को लिखा कि अगर इन अधिकारियों का तत्काल ट्रांसफर नहीं होता है तो 7000 करोड़ से अधिक की 550 महत्वपूर्ण योजनाएँ भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाएगी ।

विधानसभा अध्यक्ष से जांच की मांग,ट्रांसफर पॉलिसी का अनदेखा करने वाले अधिकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्यवाही हो

बताते चलें कि सपा विधायक पंकज मलिक ने बीते 16 दिसंबर 2024 को विधानसभा अध्यक्ष से जांच की मांग करते हुए पत्र में लिखा कि, इन अधिकारियों की तैनाती की जांच कराकर इनका ट्रांसफर किया जाए और इनके स्थान पर अच्छी छवि के अधिकारियों की तैनाती की जाए । इसके साथ ही साथ ट्रांसफर पॉलिसी का अनदेखा करने वाले अधिकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्यवाही हो ।

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