कांग्रेस (Congress) के भीतर पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे (Mallikarjun Kharge) को लेकर इन दिनों एक नई चर्चा जोर पकड़ रही है। पार्टी के कुछ नेताओं का मानना है कि 83 वर्षीय खरगे अब कांग्रेस नेतृत्व के लिए राजनीतिक बोझ बनते जा रहे हैं और उनके कई फैसलों ने राहुल गांधी (Rahul Gandhi) की नाराजगी बढ़ा दी है। यही वजह है कि संगठन के भीतर नेतृत्व परिवर्तन को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।
नई दिल्ली। कांग्रेस (Congress) के भीतर पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे (Mallikarjun Kharge) को लेकर इन दिनों एक नई चर्चा जोर पकड़ रही है। पार्टी के कुछ नेताओं का मानना है कि 83 वर्षीय खरगे अब कांग्रेस (Congress) नेतृत्व के लिए राजनीतिक बोझ बनते जा रहे हैं और उनके कई फैसलों ने राहुल गांधी (Rahul Gandhi) की नाराजगी बढ़ा दी है। यही वजह है कि संगठन के भीतर नेतृत्व परिवर्तन को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।
इंडियन एक्सप्रेस (Indian Express) में छपे लेख के मुताबिक, पार्टी के कुछ नेताओं का कहना है कि खरगे ‘एक व्यक्ति, एक पद’ के सिद्धांत का पालन नहीं कर रहे हैं। वे कांग्रेस (Congress) अध्यक्ष होने के साथ-साथ राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। आलोचकों का आरोप है कि संगठन और संसदीय राजनीति दोनों पर एक साथ नियंत्रण रखने की वजह से नए नेताओं के लिए जगह नहीं बन पा रही है।
परिवारवाद के आरोपों से घिरे खरगे
इंडियन एक्सप्रेस (Indian Express) के लिए कूमी कपूर (Coomi Kapoor) लिखती हैं कि खरगे पर परिवारवाद को बढ़ावा देने के आरोप भी लग रहे हैं। हाल ही में उनके बेटे प्रियंक खरगे (Priyank Kharge) को कर्नाटक में डीके शिवकुमार (DK Shivakumar) सरकार में गृह मंत्री बनाया गया है। इसके अलावा राज्यसभा चुनावों में भी खरगे के करीबी लोगों को तरजीह दिए जाने की चर्चा है। झारखंड से उनके सहयोगी प्रणव झा को टिकट मिलने पर पार्टी के भीतर कई नेताओं ने नाराजगी जताई है। इससे पहले राजस्थान से भी उनके करीबी नीरज डांगी को राज्यसभा भेजा जा चुका है। पार्टी के कुछ नेताओं का मानना है कि महत्वपूर्ण पदों और अवसरों पर लगातार करीबी लोगों को तरजीह देने से असंतोष बढ़ रहा है।
खरगे से किस बात पर नाराज राहुल गांधी?
राहुल की खरगे को लेकर सबसे ज्यादा नाराजगी तमिलनाडु चुनाव (Tamil Nadu Elections) को लेकर है। कहा जा रहा है कि राहुल गांधी चाहते थे कि कांग्रेस डीएमके (DMK) के साथ पुराने गठबंधन से बाहर निकलकर अभिनेता से नेता बने जोसेफ विजय के साथ नई राजनीतिक साझेदारी पर विचार करे, लेकिन खरगे और पी चिदंबरम ने डीएमके (DMK) गठबंधन बनाए रखने पर जोर दिया। चुनाव परिणाम कांग्रेस के लिए निराशाजनक रहे और पार्टी को डीएमके के साथ गठबंधन के बावजूद महज 5 सीटें ही मिल सकीं, जबकि विजय राज्य की राजनीति के बड़े चेहरे बनकर उभरे। बताया जाता है कि इस फैसले को लेकर राहुल गांधी संतुष्ट नहीं हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए कौन फ्रंटरनर?
इस बीच कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अगर खरगे अध्यक्ष पद छोड़ते हैं तो पार्टी संगठन के महासचिव केसी वेणुगोपाल (General Secretary KC Venugopal) सबसे मजबूत दावेदार हो सकते हैं। वेणुगोपाल लंबे समय से गांधी परिवार के भरोसेमंद सहयोगियों में गिने जाते हैं और संगठनात्मक मामलों में उनकी पकड़ भी मजबूत मानी जाती है। हालांकि कांग्रेस नेतृत्व की ओर से अब तक इस तरह की किसी भी अटकल पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन पार्टी के अंदर उठ रही आवाजें यह संकेत जरूर दे रही हैं कि आने वाले महीनों में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व और संगठनात्मक ढांचे को लेकर बड़ी राजनीतिक हलचल देखने को मिल सकती है। गांधी परिवार और खरगे के रिश्तों में वास्तव में कोई दूरी आई है या नहीं, इसका जवाब आने वाला समय ही देगा, लेकिन इतना तय है कि कांग्रेस के भीतर नेतृत्व को लेकर बहस अब खुलकर सामने आने लगी है।