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AI चिप्स की गर्मी सोखेगा कृत्रिम हीरा, चीन ने शुरू किया बड़े पैमाने पर उत्पादन

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। चीन ने एडवांस AI चिप्स और सुपरकंप्यूटरों में ओवरहीटिंग (Extreme heat) की बढ़ती समस्या से निपटने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। चीनी वैज्ञानिकों और टेक कंपनियों ने लैब-ग्रोन हीरों (Synthetic diamonds) का बड़े पैमाने पर औद्योगिक उत्पादन (Mass Production) शुरू कर दिया है। इसका उपयोग अब आभूषणों के बजाय अगली पीढ़ी के सुपरचिप्स को ठंडा करने के लिए 'हीट स्प्रेडर' के रूप में किया जा रहा है।

By Sushil Sah 
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बीजिंग। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। चीन ने एडवांस AI चिप्स और सुपरकंप्यूटरों में ओवरहीटिंग (Extreme heat) की बढ़ती समस्या से निपटने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। चीनी वैज्ञानिकों और टेक कंपनियों ने लैब-ग्रोन हीरों (Synthetic diamonds) का बड़े पैमाने पर औद्योगिक उत्पादन (Mass Production) शुरू कर दिया है। इसका उपयोग अब आभूषणों के बजाय अगली पीढ़ी के सुपरचिप्स को ठंडा करने के लिए ‘हीट स्प्रेडर’ के रूप में किया जा रहा है।

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आभूषण बाजार से टेक इंडस्ट्री का रुख

वैश्विक स्तर पर भारी सप्लाई के कारण पिछले कुछ समय में लैब-ग्रोन डायमंड्स की कीमतों में भारी गिरावट देखी गई थी। इस मंदी से बाहर निकलने लिए चीन की दिग्गज हीरा उत्पादक कंपनियों—जैसे ‘SF Diamond’ और ‘Henan Liliang Diamond’ ने अपने बिजनेस मॉडल को पूरी तरह बदल दिया है। इन कंपनियों ने अपने आभूषण कारखानों के फंड और संसाधनों को ‘हाई-एंड AI चिप थर्मल मैनेजमेंट प्रोजेक्ट्स’ में विविध कर दिया है। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, AI हार्डवेयर और डेटा सेंटरों की इस अभूतपूर्व मांग के चलते, वर्ष 2026 की पहली छमाही में चीन के लैब-ग्रोन हीरा निर्यात में 65.3 प्रतिशत की रिकॉर्ड तोड़ बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

हीरा ही क्यों बना AI चिप्स का मसीहा?

एक्सपर्ट्स के अनुसार, तांबा और एल्युमिनियम जैसे पारंपरिक कूलिंग मटेरियल अपनी थर्मल सीमाओं पर पहुंच चुके हैं। ‘NVIDIA’ जैसी कंपनियों के अत्याधुनिक ‘AI ग्राफिक्स प्रोसेसर प्रोसेसिंग’ के दौरान इतनी अधिक गर्मी पैदा करते हैं कि उन्हें सामान्य कूलिंग सिस्टम से संभालना कठिन हो रहा है। ऐसे में हीरा इस समस्या का सबसे सटीक और सही समाधान बनकर सामने आया है।

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अभूतपूर्व उष्मा चालकता (Thermal Conductivity)

विशेषज्ञों के अनुसार, दुनिया का सबसे शक्तिशाली प्राकृतिक थर्मल कंडक्टर है। यह तांबे की तुलना में पांच गुना और सिलिकॉन की तुलना में 10 गुना तेजी से गर्मी को सोखकर फैला सकता है। शोध में पता चलता हैं कि डायमंड वेफर आधारित कूलिंग तकनीक चिप के तापमान को 15 से 20 डिग्री सेल्सियस तक कम कर देती है। तापमान गिरने से कंप्यूटिंग क्षमता में सीधे 10 प्रतिशत तक का सुधार देखा गया है। इसके अलावा इस तकनीक के माध्यम से डेटा सेंटरों में चिप्स को ठंडा रखने के लिए होने वाली भारी बिजली की खपत को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।

चीन की तकनीकी बढ़त

8-इंच डायमंड वेफर्स का निर्माण में चीन के सबसे आगे निकलने की मुख्य वजह उसकी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता है। चीनी शोधकर्ताओं ने सिंगल-क्रिस्टल डायमंड वेफर्स के आकार को कुछ मिलीमीटर से बढ़ाकर 8 इंच यानी लगभग 20.3 सेमी तक करने में सफलता हासिल कर ली है। सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री के लिए इतने बड़े आकार के डायमंड वेफर्स का निर्माण करना एक बेहद मुश्किल कार्य माना जाता था, जिसे चीन ने अब कमर्शियल स्केल पर संभव कर दिया है।

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मार्केट विशेषज्ञों का मानना है कि लैब-ग्रोन हीरों का यह औद्योगिक इस्तेमाल सिर्फ AI चिप्स तक सीमित नहीं रहेगा। चीन इस तकनीक का विस्तार इलेक्ट्रिक वाहन (EV), 6G टेलीकॉम और एयरोस्पेस जैसे अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी कर रहा है। साथ ही विशेषज्ञों का कहना है कि चीन के इस कदम से न केवल वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन पर उसकी पकड़ और मजबूत होगी, बल्कि आने वाले समय में एडवांस कंप्यूटिंग की लागत में भी भारी कमी आ सकती है। अमेरिका और यूरोपीय देशों की टेक कंपनियां भी अब इस डायमंड-कूलिंग तकनीक को अपनाने के लिए तेजी से अग्रसर हैं।

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