प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) में हाल ही में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं (irregularities) का खुलासा हुआ है, जिसे कई मीडिया रिपोर्ट्स और कांग्रेस (Congress) , राजद (RJD) और अन्य विपक्षी दल 'बड़ा घोटाला' बता रहे हैं। बता दें कि भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की दिसंबर 2025 में संसद में पेश की गई परफॉर्मेंस ऑडिट रिपोर्ट पर आधारित है।
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) में हाल ही में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं (irregularities) का खुलासा हुआ है, जिसे कई मीडिया रिपोर्ट्स और कांग्रेस (Congress) , राजद (RJD) और अन्य विपक्षी दल ‘बड़ा घोटाला’ बता रहे हैं। बता दें कि भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की दिसंबर 2025 में संसद में पेश की गई परफॉर्मेंस ऑडिट रिपोर्ट पर आधारित है। रिपोर्ट 2015 से 2022 तक की योजना की जांच की है।
कांग्रेस ने प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) में गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी ने इसके लिए कॉम्पट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल ऑफ इंडिया (Comptroller and Auditor General of India) की हालिया रिपोर्ट को आधार बनाया है। इसने कहा है कि सीएजी (CAG) की रिपोर्ट ने इस योजना में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े और घोटाले का खुलासा किया है। यह योजना युवाओं को कौशल सिखाकर नौकरी दिलाने के लिए शुरू की गई थी, लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक़ इसमें देश के करदाताओं के पैसे का ग़लत इस्तेमाल हुआ है।
कांग्रेस नेता और पूर्व आईएएस अधिकारी कन्नन गोपीनाथन (Kannan Gopinathan) ने बीते दिनों एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, कि पीएमकेवीवाई (PMKVY) मोदी सरकार की योजना थी, जिसके बारे में सबने सुना है। 2015 से 2022 तक की सीएजी रिपोर्ट (CAG Report) आई है, जिसमें भयंकर स्कैम का पर्दाफाश हुआ है। पहले यह नेशनल स्किल डेवलपमेंट मिशन था, लेकिन मोदी सरकार (Modi Government) ने इसका नाम बदलकर पीएमकेवीवाई (PMKVY) कर दिया और रिपैकेज किया।’
कांग्रेस ने क्या आरोप लगाए?
गोपीनाथन ने आरोप लगाया कि पिछले 7 साल में 10 हजार करोड़ रुपए ऐसे लोगों को बांटे गए हैं, जिनके न फोन नंबर हैं और न कोई सही ईमेल एड्रेस। उन्होंने कहा कि पीएमकेवीवाई (PMKVY) के तहत ट्रेनिंग पार्टनर्स को एनरॉलमेंट, सर्टिफिकेशन और प्लेसमेंट के समय पैसा दिया जाता रहा है, लेकिन जब केरल की एक कंपनी में ऑडिट किया गया तो पता चला कि वहां लोगों का प्लेसमेंट ही नहीं हुआ है।
‘इतने स्किल्ड कि 31 फरवरी को भी ट्रेनिंग’
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि ‘नीलिमा मूविंग पिक्चर्स नाम की कंपनी ने पीएमकेवीआई के तहत 33 हजार लोगों को ट्रेनिंग दी है, लेकिन ये कंपनी पिछले 5-6 साल से बंद है। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रेनिंग के तहत एक ही तस्वीर को अलग-अलग जगहों का बताकर इस्तेमाल किया गया और ट्रेनिंग देने की बात कही गई। उन्होंने कहा, ‘जयपुर कल्चरल सोसाइटी नाम के ट्रेनिंग पार्टनर ने बताया है कि उन्होंने 31 फरवरी को ट्रेनिंग ऑर्गनाइज किया है।’ कन्नन ने तंज कसा कि ये लोग स्कैम करने में इतने स्किल्ड हो चुके हैं कि अब 31 फरवरी को भी ट्रेनिंग करवा रहे हैं। कन्नन गोपीनाथन ने आगे कहा कि ट्रेनिंग, एनरॉलमेंट, सर्टिफिकेशन और प्लेसमेंट, हर स्तर पर करप्शन हुआ है। यह टैक्स देने वाले नागरिकों और युवाओं के साथ धोखा है।’
कांग्रेस ने की जांच की मांग
यह रिपोर्ट दिसंबर 2025 में संसद में पेश की गई थी। सीएजी ने डेटा की सत्यता, मॉनिटरिंग और फंड के इस्तेमाल में बड़ी कमियां बताई हैं। विपक्ष इसे युवाओं के साथ बड़ा धोखा बता रहा है।
कांग्रेस ने कहा कि पीएमकेवीवाई में ट्रेनिंग से लेकर एनरॉलमेंट, सर्टिफिकेशन और प्लेसमेंट तक हर लेवल पर करप्शन किया गया है इसलिए इस मामले में कड़ी जांच होनी चाहिए। इसने कहा है कि हम चाहते हैं कि सरकार इसके ऊपर जांच बिठाए और सच सामने लेकर आए।
योजना का विवरण
PMKVY 2015 में लॉन्च हुई थी, जिसका उद्देश्य युवाओं को स्किल ट्रेनिंग देकर उन्हें रोजगार योग्य बनाना था।
2015 से 2022 तक तीन चरणों (PMKVY 1.0, 2.0, 3.0) में कुल लगभग 14,450 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया।
इसमें से 10,194 करोड़ रुपये जारी किए गए और 9,261 करोड़ रुपये खर्च हुए।
लक्ष्य: 1.32 करोड़ (13.2 मिलियन) युवाओं को ट्रेनिंग और सर्टिफिकेशन देना।
हासिल: लगभग 1.1 करोड़ युवाओं को सर्टिफिकेट दिए गए (लक्ष्य का करीब 83%)।
CAG रिपोर्ट में मुख्य खुलासे और अनियमितताएं
CAG ने योजना में बड़े पैमाने पर डेटा इंटीग्रिटी की कमी, फर्जी लाभार्थी, और सिस्टमिक खामियां पाईं। कुछ प्रमुख बिंदु:
PMKVY 2.0 और 3.0 में नामांकित 95 लाख युवाओं के रिकॉर्ड में से 90 लाख+ (94.53%) के बैंक अकाउंट डिटेल्स खाली, Null, N.A., या फर्जी (जैसे 11111111111) पाए गए।
कई मामलों में एक ही बैंक अकाउंट हजारों लाभार्थियों से जुड़ा हुआ था।
एक ही फोटो कई लाभार्थियों (कभी-कभी सैकड़ों) के लिए इस्तेमाल की गई।
फर्जी ईमेल आईडी, मोबाइल नंबर, और अस्सेसर डिटेल्स (97% तक फर्जी)।
कुछ ट्रेनिंग सेंटर बंद या अस्तित्व में नहीं थे, लेकिन पोर्टल पर सक्रिय दिखाए गए।
प्रत्येक सर्टिफाइड उम्मीदवार को 500 रुपये का DBT इंसेंटिव मिलना था, लेकिन कई मामलों में फर्जी/अमान्य खातों में पैसा ट्रांसफर दिखाया गया, जिससे करोड़ों का दुरुपयोग संभव हुआ।
प्लेसमेंट (रोजगार) के दावे भी कमजोर रहे; कई ट्रेनिंग डोमेस्टिक वर्क जैसे बेसिक स्किल्स पर केंद्रित थीं, जबकि हाई-टेक जॉब्स का वादा किया गया था।
इन खामियों के कारण विपक्ष ने इसे “हजारों करोड़ का घोटाला” या “Skill India Scam” कहा है। कुछ रिपोर्ट्स में 10,000 करोड़ तक के दुरुपयोग का अनुमान लगाया गया है, जबकि कुल बजट 14,450 करोड़ का था। RJD और कांग्रेस ने हाई-कोर्ट या उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
RJD ने प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना में 14,400 करोड़ का घोटाले का लगाया बड़ा आरोप, हाईकोर्ट जांच की मांग
राजद के प्रदेश प्रवक्ता चित्तरंजन गगन ने नौकरी-रोजगार देने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना में बड़े पैमाने पर घोटाले का आरोप लगाया है। उन्होंने हाई कोर्ट की निगरानी में इसकी उच्च-स्तरीय जांच की मांग की है।
इस योजना में 1.32 करोड़ युवाओं को प्रशिक्षित करने के लिए 14,400 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए। कैग की रिपोर्ट के अनुसार, योजना में नामांकित 95 लाख युवाओं में 90 लाख का कोई विवरण हीं नहीं है। पांच लाख नाम फर्जी पाए गए। 70 प्रतिशत अभ्यर्थी प्रशिक्षण के योग्य ही नहीं थे। जिन कंपनियों में नौकरियां दी गईं, वे फर्जी और कागजी हैं। आरोप है कि नामांकन, प्रशिक्षण, प्रमाणन से प्लेसमेंट तक फर्जीवाड़ा का लंबा खेल हुआ है।
बिहार में भी 6.33 लाख युवाओं को प्रशिक्षित किए जाने का दावा है। अधिसंख्य का प्लेसमेंट भी हो गया। ऐसे ही फर्जी प्रशिक्षण-प्लेसमेंट के आधार पर एनडीए सरकार 50 लाख युवाओं को नौकरी-रोजगार देने का दावा कर रही।