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रविवार को नहाय खाय के साथ शुरू होगा महापर्व छठ, बुधवार को उषा अर्घ्य के साथ होगा पारण

चैती छठ का चार दिवसीय अनुष्ठान चैत्र शुक्ल चतुर्थी तिथि रविवार को नहाय-खाय के साथ आरंभ होगा। रविवार को छठ पर्व करने वाली व्रतियां स्नान कर घरों में गंगाजल लाकर पूजन करने के बाद अरवा चावल, सेंधा नमक, चने की दाल, लौकी की सब्जी, आंवला की चटनी आदि ग्रहण कर चार दिवसीय अनुष्ठान का संकल्प लेंगी।

By Satish Singh 
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नई दिल्ली। चैती छठ का चार दिवसीय अनुष्ठान चैत्र शुक्ल चतुर्थी तिथि रविवार को नहाय-खाय के साथ आरंभ होगा। रविवार को छठ पर्व करने वाली व्रतियां स्नान कर घरों में गंगाजल लाकर पूजन करने के बाद अरवा चावल, सेंधा नमक, चने की दाल, लौकी की सब्जी, आंवला की चटनी आदि ग्रहण कर चार दिवसीय अनुष्ठान का संकल्प लेंगी। वहीं सोमवार को निराहार रहकर शाम में खरना पूजा करेंगी। गुड़ से बनी खीर का प्रसाद ग्रहण करेंगे और इसके साथ ही 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू हो जायेगा

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छठ पर्व करने वाली व्रती 24 मार्च मंगलवार को डूबते सूर्य को अर्घ्य देंगी और बुधवार 25 मार्च को उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के साथ पारण करके चार दिवसीय महापर्व का समापन करेंगी। मान्यता के अनुसार खरना का प्रसाद ग्रहण करने से काया निरोग रहती है और बौद्धिक क्षमता में वृद्धि होती है। रविवार से शुरू होने वाला छठ महापर्व का पहला दिन नहाया खाय के साथ शुरू होगा। वहीं सोमवार को दूसरा दिन होगा, जिसे खरना के नाम से जाना जाता है। खरना 23 मार्च 2026 सोमवार को मनाया जाएगा। इस दिन व्रती पूरे दिन बिना पानी के उपवास रखते हैं और शाम को सूर्य देव की पूजा के बाद गुड़ से तैयार की गई खीर, रोटी और फल का सेवन करते हैं। खरना का प्रसाद ग्रहण करने के बाद व्रतियों का 36 घंटे का निर्जला उपवास आरंभ होता है। चैती छठ पूजा 2026 का महापर्व इस वर्ष 22 मार्च रविवार से नहाय-खाय के साथ शुरू होगा।. इस दिन महिलाएं नदी में स्नान करके सात्विक भोजन ग्रहण करती हैं, जिससे आने वाले व्रत के लिए उन्हें मानसिक और शारीरिक ताकत मिलती है। इसके अगले दिन 23 मार्च सोमवार को खरना मनाया जाएगा। वहीं 24 मार्च मंगलवार व्रती महिलाएं घाट पर जाकर डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य अर्पित करती हैं और छठ मईया की पूजा करती हैं। इसके बाद 25 मार्च बुधवार की सुबह सूर्योदय अर्घ्य दिया जाएगा, जब महिलाएं उगते हुए सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि और संतान की लंबी आयु की कामना करती हैं। इसी दिन 36 घंटे तक चलने वाला कठिन व्रत संपन्न होता है।

 

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