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Ram Mandir SIT investigation : चढ़ावे की चांदी गला दी गयी? राम मंदिर में दान देने वाले के सामने टिन्नू यादव का बड़ा कबूलनामा

Ram Mandir SIT investigation : अयोध्या राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी की घटना से करोड़ों भक्तों की आस्था को ठेस पहुंचा है। इस मामले में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की सिफारिश पर योगी सरकार ने जांच के लिए एसआईटी का गठन किया है और छह दिनों से मैराथन जांच का दौर जारी है। वहीं, दान के आभूषण चोरी के आरोपों में घिरे टिन्नू यादव को लेकर एक चौंकाने वाली बात सामने आयी है।

By Abhimanyu 
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Ram Mandir SIT investigation : अयोध्या राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी की घटना से करोड़ों भक्तों की आस्था को ठेस पहुंचा है। इस मामले में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की सिफारिश पर योगी सरकार ने जांच के लिए एसआईटी का गठन किया है और छह दिनों से मैराथन जांच का दौर जारी है। वहीं, दान के आभूषण चोरी के आरोपों में घिरे टिन्नू यादव को लेकर एक चौंकाने वाली बात सामने आयी है।

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एक न्यूज़ चैनल की रिपोर्ट के अनुसार, राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के करीबी सहयोगी राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव ने दान करने वाले एक व्यक्ति से कहा था कि चांदी गला दी गई है, उसे भूल जाओ। टिन्नू यादव पर राम मंदिर के दानपात्र और चढ़ावे से करोड़ों रुपये के गबन का आरोप है। बताया जा रहा है कि जौनपुर के व्यापारी अजय विश्वकर्मा ने रामलला को चांदी की चरण पादुका और रत्नों से जड़ा हार चढ़ाया था, लेकिन उन्हें कोई रसीद नहीं मिली। सबसे चौंकाने वाली बात तो यह है कि चरण पादुका और रत्नों से जड़ा हार दोनों ग़ायब हैं।

एसआईटी ने चरण पादुका और रत्नों से जड़े हार के बारे में जानकारी मांगी, लेकिन अब तक इसके बारे में कुछ पता नहीं चला है। दूसरी तरफ, एक पूर्व इंजीनियर दीनानाथ वर्मा ने अनिल मिश्रा पर मंदिर निर्माण में कमीश्नखोरी का आरोप लगाया है। वर्मा ने दावा किया कि अनिल मिश्रा को राम मंदिर के वित्तीय मामलों की जिम्मेदारी दी गई और उन्होंने हर काम में 40% कमीशन लेना शुरू कर दिया। इस मामले में एसआईटी ने अनिल मिश्रा करीब तीन घंटे पूछताछ की है, जबकि टिन्नू यादव पर बड़े एक्शन की तैयारी है। लवकुश मिश्रा पहले से एसआईटी की हिरासत में है।

रिपोर्ट्स की मानें तो एसआईटी ने पाया है कि राम मंदिर में स्टेंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर का पालन नहीं हुआ। मंदिर में कार्यरत लोगो को निश्चित जिम्मेदारी आधिकारिक रूप से नहीं थी, वे सिर्फ मौखिक आदेश पर काम करते थे।

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