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जब सस्ते रेट में दवाईंयां हैं उपलब्ध तो यूपी का स्वास्थ्य विभाग मंहगी दरों पर क्यूं कर खरीददारी? जांच में कई चर्चित चेहरों का बेनकाब होना तय

यूपी में गरीबों के बेहतर इलाज के लिए आया बजट स्वास्थ्य विभाग (Health Department) के अफसर कमीशनखोरी में उड़ाने से कोई गुरेज नहीं कर हैं। इसकी ताजा बानगी मेडिकल सप्लाई कार्पोरेशन (UPMSCL) में लगभग दुगुने दामों पर बिना टेंडर/ईओआई के करोड़ों की एजिथ्रोमाइसिन टैबलेट (Azithromycin Tablet) की खरीद कर दे दी है।

By संतोष सिंह 
Updated Date

लखनऊ। यूपी में गरीबों के बेहतर इलाज के लिए आया बजट स्वास्थ्य विभाग (Health Department) के अफसर कमीशनखोरी में उड़ाने से कोई गुरेज नहीं कर हैं। इसकी ताजा बानगी मेडिकल सप्लाई कार्पोरेशन (UPMSCL) में लगभग दुगुने दामों पर बिना टेंडर/ईओआई के करोड़ों की एजिथ्रोमाइसिन टैबलेट (Azithromycin Tablet) की खरीद कर दे दी है। बताते चलें कि यही दवा पीएम जन औषधि योजना (PM Jan Aushadhi Yojana) और केजीएमयू (KGMU) समेत दिल्ली एम्स (Delhi AIIMS) जैसे बड़े संस्थानों में बेहद सस्ते में खरीदी जा रही है।

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कार्पोरेशन ने प्लानिंग के तहत दवा की खरीद के लिए जारी टेंडर को जानबूझकर महीनों तक लटकाया

स्वास्थ्य विभाग (Health Department) के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पहले कार्पोरेशन ने प्लानिंग के तहत दवा की खरीद के लिए जारी टेंडर को जानबूझकर महीनों तक लटकाया। इसके बाद फिर मनमाने तरीके से रिस्क/आल्टरनेटिव परचेज के नाम पर करोड़ों की मंहगी खरीद कर योगी सरकार (Yogi Government) की जीरो टॉलरेंसनीति (Zero Tolerance Policy) को जमकर पलीता लगाया। स्वास्थ्य विभाग (Health Department) के जालसाजों ने खुद को बचाने की तरकीब निकालते हुए कर्नाटक के सरकारी उपक्रम को खरीद का जिम्मा थमाया गया। कार्पोरेशन ने 8 मार्च 2024 को एजिथ्रोमाइसिन टैबलेट (Azithromycin Tablet) समेत कई दवाओं का टेंडर नंबर 208 निकाला था। लेकिन एजिथ्रोमाइसिन की खरीद मुकाम तक नहीं पहुंची। जबकि उक्त टेंडर सितंबर-अक्टूबर में फाइनल हो चुका था। इसी दवा के लिए पुनः टेंडर नंबर 226 पिछले वर्ष 13 सितंबर को आमंत्रित हुआ। जो 30 दिसंबर 2024 को खोला गया। इस टेंडर में टैबलेट की दरें कम आना तय थीं।

भ्रष्टाचार की योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए एजिथ्रोमाइ‌सिन टैबलेट की आकस्मिक खरीद की कहानी स्वास्थ्य विभाग ने तैयार की

नतीजतन भ्रष्टाचार की योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए एजिथ्रोमाइ‌सिन टैबलेट (Azithromycin Tablet)  की आकस्मिक खरीद की कहानी स्वास्थ्य विभाग(Health Department)  ने तैयार की। इसके बाद केंद्र-कर्नाटक सरकार की संयुक्त कम्पनी कर्नाटक एंटीबायोटिक्स एंड फार्मास्यूटिकल्स (KAPL) को एक करोड़ 55 लाख 63 हजार 300 एजिथ्रोमाइसिन टैबलेट (Azithromycin Tablet) की खरीददारी का क्रयादेश (PO) 23 जनवरी 2025 को जारी हो गया। केएपीएल (KAPL) द्वारा यूपी को एजिथ्रोमाइसिन टैबलेट 12.0434 प्रति की दर से 18 करोड़ 74 लाख 35 हजार 47 रूपए में आपूर्ति की जायेगी।

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इससे पहले यूपीएमएससीएल (UPMSCL) अपने ही रेट कॉन्ट्रैक्ट (RC) से टेंडर नंबर 192 के जरिये एक अक्टूबर 2023 से 31 अक्टू‌बर 2024 तक इसी एजिथ्रोमाइसिन टैबलेट (500 एमजी) को 6.7928 रूपए प्रति की दर से खरीद रहा था। खुले बाजार से एक्सप्रेशन ऑफ़ इंटरेस्ट (EOI) मंगाए खरीद रुपए जाते तो इस दवा को सस्ते में खरीद कर यूपी सरकार के करोड़ों बचाये भी जा सकते थे। इसी दवा एजिथ्रोमाइसिन टैबलेट (500 एमजी) को लखनऊ के केजीएमयू में 6.50 रुपए प्रति की दर से खरीदा जा रहा है। वहीं प्रधानमंत्री जन औषधि मेडिकल रूपए योजना (Pradhan Mantri Jan Aushadhi Medical Rupee Yojana) से जुड़े किसी भी स्टोर पर यही टैबलेट 8.60 प्रति की एमआरपी पर आम जनता के लिए उपलब्ध है।

प्रकरण की गहराई से जांच में कार्पोरेशन के शीर्ष अफसरों से लेकर ड्रग सेक्शन के कई चर्चित चेहरों का बेनकाब होना तय

तेलंगाना, राजस्थान, बिहार,तमिलनाडु एमपी समेत बाकी राज्यों के मेडिकल कापेरिशन भी एजिथ्रोमाइसिन टैबलेट (Azithromycin Tablet) को इसी तरह सस्ते में खरीद रहे हैं। दिल्ली एम्स (Delhi AIIMS)  में भी एजिथ्रोमाइसिन टैबलेट (Azithromycin Tablet) को कीमत 7.50 रुपए प्रति निर्धारित है। इसके बावजूद कार्पोरेशन ने एजिथ्रोमाइसिन की खरीद मंहगी दरी पर करके करोड़ों के सरकारी बजट में बंदरबांट कर डाला। इस प्रकरण की गहराई से जांच में कार्पोरेशन के शीर्ष अफसरों से लेकर ड्रग सेक्शन के कई चर्चित चेहरों का बेनकाब होना तय है।

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कई राज्य केएपीएल को पूर्व में कर चुके हैं ब्लैकलिस्ट, इसके बावजूद यूपी सरकार ने इसी कंपनी से खरीदी मंहगी दवाएं

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रक्षा मंत्रालय (Defense Ministry) ने अधोमानक दवाएं मिलने पर पांच फरवरी 2024 को आदेश निकालकर कर्नाटक एंटीबायोटिक्स (Karnataka Antibiotics) को दो साल के लिए डिबार (प्रतिबंधित) किया था। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने भी तीन दवाओं को अधोमानका पाया था। पिछले वर्ष भी केंद्र द्वारा 50 घटिया दवाओं पर जारी अलर्ट में कंपनी की पैरासिटामॉल दवा भी शामिल थी। कई राज्यों ने केएपीएल (KAPL) को पूर्व में ब्लैकलिस्ट किया जा चुका है। इसके बावजूद यूपी सरकार ने कर्नाटक एंटीबायोटिक्स (Karnataka Antibiotics) से मंहगी दवाएं खरीद डाली।

यूपी में क्रय नीति की खुलेआम उड़ाई जा रही है धज्जियां

कार्पोरेशन में दवाओं के वास्ते बनाई गयी क्रय नीति की धज्जियां खुलेआम उड़ाई जा रही है। ये पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी गरीबों के इलाज के बजट में अफसरों ने मनमाने तरीके से बहती फार्मा कंपनियों को फायदा पहुंचाने के के लिए लिए ए रि रिस्क रिस्क आल्टरनेटिव आल्टरनेटिव परवेज के जरिये खरीदी दवाओं में खूब धांधलियां की हैं। पिछले दो वर्षों के दौरान हुई खरीद की जांच में कई ​अनियमितताएं हो सकती हैं।

‘यूपी के डिप्टी सीएम व स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि इस प्रकरण की पूरी जांच कराई जाएगी। इस मामले में कोई भी दोषी पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा।’

‘डीजी हेल्थ डॉ. रतनपाल सिंह ने बताया कि रिस्क/ अल्टरनेटिव पर्चेज की अनुमति स्वास्थ्य विभाग ने दी या नहीं। इसका पता करने के बाद कोई जानकारी दी जा सकती है।’

 

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