झारखंड के रामगढ़ में नवरात्र के पावन अवसर पर आस्था और साधना की एक अनोखी तस्वीर देखने को मिली। यहां देवी मां की आराधना के लिए रूपा देवी ने कठिन साधना का संकल्प लिया। उन्होंने कांटों की सेज पर लेटकर और सीने पर कलश रखकर लगातार नौ दिनों तक तपस्या की।
रामगढ़। झारखंड के रामगढ़ में नवरात्र के पावन अवसर पर आस्था और साधना की एक अनोखी तस्वीर देखने को मिली। यहां देवी मां की आराधना के लिए रूपा देवी ने कठिन साधना का संकल्प लिया। उन्होंने कांटों की सेज पर लेटकर और सीने पर कलश रखकर लगातार नौ दिनों तक तपस्या की।
ऐसा बताया जा रहा है कि नवरात्र के दौरान विशेष धार्मिक अनुष्ठान के तहत रूपा देवी ने यह साधना शुरू की। कांटों से बनी सेज पर लेटकर उन्होंने अपने सीने पर कलश स्थापित किया और पूरे नौ दिनों तक देवी की आराधना में लीन रहीं। श्रद्धालुओं की भीड़ इस दौरान उन्हें देखने और पूजा-अर्चना करने के लिए पहुंचती रही।
इस अद्भूत और अनोखी साधना को लेकर स्थानीय लोगों में काफी उत्सुकता देखने को मिली। श्रद्धालुओं ने इसे आस्था, भक्ति और संकल्प का एक जीता जागता उदाहरण बताया। वहीं, ऐसी कठिन साधना के दौरान सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर भी सावधानी बरतना जरूरी माना जाता है।
देश के अलग-अलग हिस्सों में नवरात्र के दौरान श्रद्धालु अपनी-अपनी परंपराओं और मान्यताओं के अनुसार देवी की उपासना और पूजा करते हैं। रामगढ़ में रूपा देवी की यह साधना भी स्थानीय स्तर पर चर्चा के विषय का महत्वपूर्ण केन्द्र बना हुआ है।