उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के युवाओं के लिए एक बड़ा ऐलान किया है। सीएम योगी ने कहा है कि अगले 6 महीने में 1 लाख युवाओं को सरकारी नियुक्ति पत्र दिए जाएंगे।
Sarkari Naukri: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे करीब आ रहे हैं, वैसे-वैसे सियासी तैयारियां भी तेज होती जा रही हैं। सरकार के फैसलों और बड़े ऐलानों पर अब चुनावी नजरिया भी दिखाई देने लगा है। लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अलग-अलग चरणों में हर सप्ताह युवाओं को नियुक्ति पत्र उपलब्ध कराए जाएंगे। यानी आने वाले छह महीने में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए लगातार नियुक्तियों का सिलसिला देखने को मिल सकता है।
मुख्यमंत्री ने इस दौरान अपनी सरकार के कार्यकाल की उपलब्धियों का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि अब तक 9 लाख 30 हजार से ज्यादा युवाओं को सरकारी नौकरी दी जा चुकी है। सीएम योगी ने कहा कि नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता रखी गई है और किसी एक नियुक्ति पर भी सवाल खड़ा नहीं किया जा सकता। लेकिन इस ऐलान के साथ मुख्यमंत्री ने पिछली सरकार पर निशाना साधना भी नहीं छोड़ा।
योगी आदित्यनाथ ने 2017 से पहले की भर्ती व्यवस्था का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि उस दौर में भर्ती निकलने के बाद युवा इंतजार करते रहते थे और भ्रष्टाचार तथा सिफारिश के कारण मामले अदालतों तक पहुंचते थे। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने का काम किया है। सीएम योगी ने नकल माफिया और भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी करने वालों पर भी सख्ती की बात कही। उनका कहना है कि नकल माफिया की कमर तोड़ने के साथ-साथ उसके पीछे मौजूद लोगों पर भी कार्रवाई की जाएगी। अब सवाल ये है कि चुनाव से कुछ महीने पहले 1 लाख सरकारी नौकरियों का ये ऐलान कितना बड़ा सियासी संदेश है?
दरअसल, उत्तर प्रदेश में युवा वोटर किसी भी चुनाव में बेहद अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में रोजगार और सरकारी नौकरी से जुड़ा कोई भी बड़ा फैसला सीधे युवाओं के बीच सरकार की छवि और चुनावी माहौल को प्रभावित कर सकता है।एक तरफ सरकार अपनी उपलब्धियां गिना रही है, तो दूसरी तरफ विपक्ष रोजगार और भर्तियों के मुद्दे पर सरकार को घेरता रहा है। ऐसे में 2027 के चुनाव से पहले रोजगार की ये नई घोषणा सिर्फ सरकारी नियुक्तियों का आंकड़ा है या युवाओं को साधने की चुनावी रणनीति का हिस्सा भी है? फिलहाल इतना जरूर है कि चुनाव की आहट तेज हो रही है और उसके साथ योजनाओं, नियुक्तियों और बड़े ऐलानों की दस्तक भी सुनाई देने लगी है।