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अल-फलाह यून‍िवर्सिटी को ED मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम के तहत कुर्क करने की तैयारी, ट्रस्ट के लिए बड़ा झटका

Al-Falah University : हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल-फलाह विश्वविद्यालय (Al-Falah University) पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) कार्रवाई और तेज कर सकती है। सूत्रों के मुताबिक, ईडी (ED) मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत यूनिवर्सिटी कैंपस को कुर्क करने की तैयारी कर रही है।

By संतोष सिंह 
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Al-Falah University : हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल-फलाह विश्वविद्यालय (Al-Falah University) पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) कार्रवाई और तेज कर सकती है। सूत्रों के मुताबिक, ईडी (ED) मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत यूनिवर्सिटी कैंपस को कुर्क करने की तैयारी कर रही है। जांच एजेंसी को संदेह है कि विश्वविद्यालय की कई इमारतों के निर्माण में अपराध से अर्जित आय यानी अवैध धन का इस्तेमाल किया गया। ED की जांच में सामने आया है कि फरीदाबाद के धौज इलाके में स्थित अल-फलाह विश्वविद्यालय के भवनों के निर्माण में जिन फंड्स का उपयोग हुआ, वे कथित तौर पर अपराध से अर्जित आय का हिस्सा हो सकते हैं। इसी आधार पर एजेंसी संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई पर विचार कर रही है। यदि यह कार्रवाई होती है, तो यह अल-फलाह विश्वविद्यालय (Al-Falah University) और उससे जुड़े ट्रस्ट के लिए बड़ा झटका माना जाएगा।

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अल-फलाह विश्वविद्यालय (Al-Falah University) पिछले साल राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में लाल किले के पास हुए कार बम विस्फोट के बाद से ही केंद्रीय जांच एजेंसियों के रडार पर है। इस घटना के बाद सुरक्षा और वित्तीय लेन-देन से जुड़े कई पहलुओं की जांच शुरू हुई, जिसमें अल-फलाह ग्रुप के कुछ संदिग्ध लेन-देन भी जांच के दायरे में आए। इसके बाद ईडी ने विश्वविद्यालय और उससे जुड़े ट्रस्ट की गतिविधियों की गहन जांच शुरू की। ईडी इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या विश्वविद्यालय के निर्माण और संचालन के लिए इस्तेमाल की गई धनराशि अवैध स्रोतों से प्राप्त की गई थी और उसे वैध रूप देने के लिए शिक्षण संस्थानों में निवेश किया गया। जांच एजेंसी का मानना है कि यह मामला केवल संपत्ति निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं और धनशोधन यानी मनी लॉन्ड्रिंग का नेटवर्क शामिल हो सकता है।

चेयरमैन पहले ही हो चुका है गिरफ्तार

इस मामले में अल-फलाह समूह के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी (Jawad Ahmed Siddiqui, Chairman of Al-Falah Group) को ED ने पिछले साल नवंबर में गिरफ्तार किया था। सिद्दीकी पर मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। ED का दावा है कि अल-फलाह ट्रस्ट की ओर से ऑपरेट कई शिक्षण संस्थानों ने छात्रों के साथ कथित तौर पर धोखाधड़ी की। एजेंसी के अनुसार, इन संस्थानों के पास शिक्षा प्रदान करने के लिए आवश्यक वैध मान्यता नहीं थी, इसके बावजूद छात्रों से फीस वसूली गई। ED की जांच में यह भी सामने आया है कि छात्रों से एकत्र की गई रकम का इस्तेमाल कथित तौर पर अन्य गतिविधियों और संपत्तियों के निर्माण में किया गया, जो PMLA के तहत अपराध की श्रेणी में आता है। इसी आधार पर अब विश्वविद्यालय परिसर को कुर्क करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सकता है।

फिलहाल ED की ओर से आधिकारिक तौर पर कुर्की की तारीख या अंतिम आदेश की पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि जांच अंतिम चरण में है। यदि कुर्की होती है, तो इसका असर विश्वविद्यालय के संचालन, छात्रों और कर्मचारियों पर भी पड़ सकता है। मामले पर अल फलाह विश्वविद्यालय या ट्रस्ट की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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