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Amarnath Yatra 2026 : बाबा अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से, जानिए हिमलिंग से जुड़ी ये खास बातें

भगवान शिव के सबसे पवित्र तीर्थों में बाबा अमरनाथ धाम है।स्कंदपुराण में अमरनाथ गुफा का अत्यंत गहरा आध्यात्मिक और पौराणिक महत्व बताया गया है, जहां इसे 'अमरेश' या 'अमरेश्वर तीर्थ' के नाम से संबोधित किया गया है।

By अनूप कुमार 
Updated Date

Amarnath Yatra 2026 : भगवान शिव के सबसे पवित्र तीर्थों में बाबा अमरनाथ धाम है।स्कंदपुराण में अमरनाथ गुफा का अत्यंत गहरा आध्यात्मिक और पौराणिक महत्व बताया गया है, जहां इसे ‘अमरेश’ या ‘अमरेश्वर तीर्थ’ के नाम से संबोधित किया गया है। पुराणों के अनुसार, यह वही पावन स्थान है जहां भगवान शिव ने माता पार्वती को अमर कथा सुनाया था। हर साल होने वाली बाबा अमरनाथ यात्रा की वार्षिक यात्रा इस साल 3 जुलाई 2026 से शुरू होने जा रही है। जिसका समापन 28 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा के दिन होगा. कुल 57 दिनों तक चलने वाली इस यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है। आइए जानते हैं अमरनाथ गुफा से जुड़ी कुछ ऐसी खास बातें, जो इस यात्रा को खास बनाती हैं।

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गुप्त स्थान का चयन: पार्वती जी के अनुरोध पर शिव जी उन्हें एक ऐसे निर्जन स्थान पर ले गए जहां कोई अन्य जीव इस रहस्य को न सुन सके। वह स्थान अमरनाथ गुफा थी।

प्राकृतिक हिमलिंग
इस पवित्र गुफा और यहां बनने वाले प्राकृतिक हिमलिंग से कई पौराणिक और रहस्यमयी कहानियां जुड़ी हुई हैं, जो आज भी विज्ञान के लिए एक पहेली हैं।

अनंतनाग जिले में स्थित
अमरनाथ गुफा समुद्र तल से करीब 3,888 मीटर (12,756 फीट) की ऊंचाई पर स्थित है। यह स्थान जम्मू और कश्मीर के है अनंतनाग जिले में स्थित और इसे भगवान शिव के सबसे प्रमुख पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक माना जाता है।

कबूतरों को मिला अमरत्व का आशीर्वाद
कहा जाता है कि उस समय गुफा में मौजूद दो कबूतरों ने भी यह कथा सुन ली थी और उन्हें अमरत्व का आशीर्वाद मिल गया। आज भी कई श्रद्धालु गुफा के आसपास कबूतरों के दर्शन को शुभ मानते हैं।

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पहलगाम (बैलग्राम) : यहाँ शिव जी ने अपने वाहन नंदी (बैल) को छोड़ा था।चंदनवाड़ी: यहाँ उन्होंने अपनी जटाओं से चंद्रमा को अलग किया था।

शेषनाग झील : यहाँ शिव जी ने अपने गले के सर्पों को त्याग दिया था।

हागुनस पर्वत (गणेश टॉप) : यहाँ उन्होंने अपने पुत्र गणेश जी को रुकने का आदेश दिया था।
पंचतरणी: यहाँ शिव जी ने प्रकृति के पाँचों तत्वों (पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि और आकाश) का परित्याग किया था।

स्कंदपुराण के ‘महेश्वरखंड’ में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि अमरेश तीर्थ सभी पुरुषार्थों (धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष) का साधक है।

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