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Bareilly Smart City Scam: बरेली में टीन से बनें 9 टॉयलेट्स के लिए खर्च हुए 50 करोड़, दो साल से हैं बंद; स्मार्टसिटी प्रोजेक्ट में बड़ा घोटाला

Bareilly Smart City Scam: यूपी के बरेली में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में एक बड़ा घोटाला सामने आया हैं। यहां पर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत शहर में 50 करोड़ रुपये की लागत से टीन से 9 स्मार्ट बायो टॉयलेट बनाए गए, लेकिन दो साल बाद भी इनको चालू नहीं किया जा सका। लेकिन, चौंकाने वाली बात यह है कि प्रत्येक टॉयलेट को बनाने की लागत लगभग 6 करोड़ रुपये बतायी गयी है।

By Abhimanyu 
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Bareilly Smart City Scam: यूपी के बरेली में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में एक बड़ा घोटाला सामने आया हैं। यहां पर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत शहर में 50 करोड़ रुपये की लागत से टीन से 9 स्मार्ट बायो टॉयलेट बनाए गए, लेकिन दो साल बाद भी इनको चालू नहीं किया जा सका। लेकिन, चौंकाने वाली बात यह है कि प्रत्येक टॉयलेट को बनाने की लागत लगभग 6 करोड़ रुपये बतायी गयी है।

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मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बरेली नगर निगम को स्मार्ट सिटी योजना के तहत केंद्र सरकार से अब तक 1200 करोड़ रुपये की फंडिंग मिली है, लेकिन संजय कम्युनिटी हॉल में बनाए गए स्मार्ट बायो टॉयलेट्स की कीमत लगभग 6 करोड़ रुपये प्रति यूनिट बताई गई है। यानी ये साधारण टीन के बने प्रत्येक टॉयलेट की लागत 6 करोड़ रुपये है। यह सीधे तौर पर कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। इस मामले में एक और चौंकाने वाली बात यह है कि इन टॉयलेट्स का उद्घाटन 7 दिसंबर 2022 को किया गया था, लेकिन दो साल बीत चुके हैं और आज भी ये चालू नहीं हुए।

बताया जा रहा है कि इन टॉयलेट्स को बनाने का उद्देश्य शहर के बाजारों में सार्वजनिक शौचालयों की सुविधा देना था, लेकिन आज तक ये बेकार पड़े हैं। सवाल यह है कि संजय कम्युनिटी हॉल में पर्याप्त जगह होने के बावजूद वहां एक स्थायी पक्का टॉयलेट क्यों नहीं बनाया गया, जोकि इन स्मार्ट बायो टॉयलेट्स की बतायी गयी कीमत से काफी कम कीमत में तैयार हो सकता था। वहीं, ये टीन के टॉयलेट अब जर्जर हालत में पहुंच चुके हैं।

बता दें कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लोगों को घर बनाने के लिए मात्र 2.5 लाख रुपये मदद दी जाती है। लेकिन, संजय कम्युनिटी हॉल में एक टॉयलेट पर 6 करोड़ रुपये खर्च किए गए। यह साफ दर्शाता है कि जनता के पैसों को ठेकेदारों और अफसरों की मिलीभगत से लूटने का काम किया गया। इस घोटाले के खिलाफ सिविल सोसायटी ने आवाज उठाया है। सिविल सोसाइटी ने हाल ही में एसडीएम दीप चंद को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन भी सौंपा है।

सिविल सोसाइटी का कहना है कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के नाम पर विनिवेश से मिले धन का दुरुपयोग हो रहा है। करीब दो साल पहले इन शौचालयों का निर्माण पूरा हुआ था। सीएम ने मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में इनका लोकार्पण भी किया था। लेकिन आज तक सभी शौचालयों में ताले लटके हुए हैं। जनता इस सुविधा का लाभ नहीं ले पा रही है। अगर जल्द ही इन्हें चालू नहीं किया गया तो ये कबाड़ में तब्दील हो जाएंगे।

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सिविल सोसाइटी की मांग है कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होने तक अस्थायी कर्मचारी रखकर इन शौचालयों को चालू किया जाए। एक महिला सामाजिक कार्यकर्ता ने बताया कि बरेली में सार्वजनिक टॉयलेट की भारी कमी है। किला से कुतुबखाना तक 4 किलोमीटर की दूरी में कोई भी टॉयलेट नहीं है।जिससे महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी होती है।

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