बिहार में बाढ़ की स्थिति बेहद भयावह हो चुकी है। गंगा, सोन, गंडक और पुनपुन समेत राज्य की तमाम प्रमुख नदियों के उफान के चलते 16 जिलों की 28 लाख से अधिक की आबादी बाढ़ की चपेट में आ गई है। निचले इलाकों में पानी भरने से जनजीवन पूरी तरह ठप हो गया है और लोग ऊंचे स्थानों तथा राहत शिविरों में शरण लेने को मजबूर हो गए हैं।
पटना। बिहार में बाढ़ की स्थिति बेहद भयावह हो चुकी है। गंगा, सोन, गंडक और पुनपुन समेत राज्य की तमाम प्रमुख नदियों के उफान के चलते 16 जिलों की 28 लाख से अधिक की आबादी बाढ़ की चपेट में आ गई है। निचले इलाकों में पानी भरने से जनजीवन पूरी तरह ठप हो गया है और लोग ऊंचे स्थानों तथा राहत शिविरों में शरण लेने को मजबूर हो गए हैं।
200 से अधिक सड़कों पर परिचालन बंद
राज्य भर में बाढ़ के विकराल रूप के कारण बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। प्रशासन ने बताया है कि करीब 200 से अधिक ग्रामीण और मुख्य सड़कों पर आवागमन पूरी तरह ठप हो चुका है। पटना के पास दरधा नदी का तटबंध टूटने से एक प्रमुख ग्रामीण सड़क का 200 फीट हिस्सा बह गया, जिससे दर्जनों गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय से टूट चुका है। जहानाबाद और वैशाली में कई पुल-पुलिया पानी में पूरी तरह डूब चुके हैं।
स्कूल बंद, पलायन की स्थिति
बाढ़ के चलते शिक्षा व्यवस्था भी प्रभावित हो गई है। भोजपुर और बेगूसराय समेत कई जिलों में पानी भर जाने के कारण 100 से अधिक स्कूलों को बंद करने का आदेश जारी किया गया है। राजधानी पटना के दियारा और तटीय इलाकों में पानी घुसने के बाद हजारों लोग जेपी गंगापथ और तटबंधों पर त्रिपाल तानकर रह रहे हैं।
राहत और बचाव कार्य
बिगड़ते हालातों को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग ने मोर्चा संभाल लिया है। प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य के लिए 27 SDRF और नौ NDRF की टीमें तैनात की गई हैं, जो फंसे हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रही हैं। इसके अलावा बेघर हुए लोगों के लिए जिला प्रशासन द्वारा युद्ध स्तर पर सामुदायिक रसोई का संचालन किया जा रहा है। साथ ही राजधानी पटना को सुरक्षित रखने के लिए सुरक्षा दीवार के सभी 108 रास्तों को पूरी तरह बंद कर दिया गया है, ताकि गंगा का पानी रिहायशी इलाकों में न घुस सके। साथ ही मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में कुछ और इलाकों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है, जिससे प्रशासन हाई अलर्ट पर है।