मायावती ने सांसद चंद्रशेखर पर भी आरोप लगाते हुए कहा कि वह दलितों से जुड़े मामलों में अधिकारियों से बातचीत के बजाय धरना-प्रदर्शन करवाते हैं। इससे युवाओं पर कानूनी मामले दर्ज हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में युवाओं को सरकारी नौकरी हासिल करने में काफी परेशानी होती है। उन्होंने कहा कि, दलितों को इनके बहकावे में कतई नहीं आना है। इनहीं सबके कारण बसपा ने शुरु से ही ईवीएम द्वारा वोटिंग किए जाने का विरोध किया है।
लखनऊ। बसपा सुप्रीमो मायावती ने आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर और भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि, बसपा को कमजोर करने के लिए भाजपा ने ईवीएम के साथ छेड़छाड़कर चंद्रशेखर को जितवा दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि, वहां पर चंद्रशेखर का कोई भी जनाधार नहीं है, वहां के लोग अक्सर ऐसा कहते हैं।
मायावती ने सांसद चंद्रशेखर पर भी आरोप लगाते हुए कहा कि वह दलितों से जुड़े मामलों में अधिकारियों से बातचीत के बजाय धरना-प्रदर्शन करवाते हैं। इससे युवाओं पर कानूनी मामले दर्ज हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में युवाओं को सरकारी नौकरी हासिल करने में काफी परेशानी होती है। उन्होंने कहा कि, दलितों को इनके बहकावे में कतई नहीं आना है। इनहीं सबके कारण बसपा ने शुरु से ही ईवीएम द्वारा वोटिंग किए जाने का विरोध किया है।
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि, ईवीएम को लेकर आपत्तियों पर ध्यान नहीं दिए जाने के बाद बसपा ने सुप्रीम कोर्ट में चुनाव प्रक्रिया को चुनौती दी थी। ईवीएम व्यवस्था खत्म करने के बजाय अदालत ने ईवीएम के साथ वीवीपैट लगाने का निर्देश दिया। उन्होंने वीवीपैट व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। कहा कि सभी वीवीपैट पर्चियों की गिनती नहीं होने के कारण ईवीएम में दर्ज मतों से उनका पूरा मिलान नहीं हो पाता। इलेक्ट्रॉनिक मशीनों के साथ छेड़छाड़ और उन्हें दूर से हैक किए जाने की आशंका जताते हुए कहा कि इससे मतदाता के लिए अपने वोट के सही तरीके से दर्ज होने को लेकर भरोसा करना मुश्किल है।
मायावती ने कहा कि देश में शुरुआती चुनावों के बाद करीब पांच दशक तक मतदान के लिए बैलेट पेपर का इस्तेमाल हुआ। बाद में चुनाव आयोग ने ईवीएम का इस्तेमाल शुरू कर दिया। जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी, तब भाजपा ने भी ईवीएम का विरोध किया था। उस पर चुनाव में गड़बड़ी के आरोप लगाए थे। उन्होंने सवाल उठाया कि केंद्र में सरकार बनने के बाद भाजपा ने ईवीएम व्यवस्था को खत्म करने के बजाय इस प्रणाली को जारी क्यों रखा?