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छठ पूजा : टिकट के लिए लंबी लाइनें, भरी ट्रेनें, बिना सीट बिहार का सफर और वोट की गूंज, क्या चुनाव में दिखेगा गुस्सा?

बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections) की गूंज के बीच सूबे में छठ महापर्व की तैयारी जोरों पर हैं। 25 से 28 अक्टूबर तक चलने वाले इस महापर्व के लिए देश के कोने-कोने से लाखों प्रवासी मजदूर, युवा और परिवार घर लौट रहे हैं, लेकिन इस खुशी के सफर में दर्द भी कम नहीं।

By संतोष सिंह 
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नई दिल्ली। बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections) की गूंज के बीच सूबे में छठ महापर्व की तैयारी जोरों पर हैं। 25 से 28 अक्टूबर तक चलने वाले इस महापर्व के लिए देश के कोने-कोने से लाखों प्रवासी मजदूर, युवा और परिवार घर लौट रहे हैं, लेकिन इस खुशी के सफर में दर्द भी कम नहीं। ट्रेनें खचाखच भरी हुई हैं,सीटें नहीं, तो लोग टॉयलेट में, दरवाजों पर, चादर के झूले में या खिड़की से चढ़कर सफर कर रहे है। सहारनपुर, अंबाला, दिल्ली, मुंबई जैसे स्टेशनों पर 35-36 घंटे की यात्रा को टॉयलेट में गुजारने वाले यात्रियों की जानपर खेलने की कहानियां मीडिया व सोशल मीडिया पर खूब वायरल हैं।

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यात्रा कर रहे एक प्रवासी ने कहा कि घर जाना है, छठ मनाना है, वोट डालना है, क्या करें? इससे साफ होता है कि यह सिर्फ त्योहार का भीड़ नहीं, बल्कि आगामी विधानसभा चुनाव (6 और 11 नवंबर) की छाया भी है। सवाल यही है कि क्या प्रवासियों का यह गुस्सा वोट की शक्ल में चुनावी मैदान में उतरेगा?

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ट्रेनों का हाल: दावा vs हकीकत

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का दावा है कि छठ के लिए 12,000 से ज्यादा स्पेशल ट्रेनें चलाई गई हैं, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और बयान कर रही है। भीड़ इस कदर बढ़ गई है कि भागलपुर, गया, पटना, पूर्णिया जैसे स्टेशनों पर यात्री संख्या 30 फीसदी तक बढ़ गई है।

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घर पहुंचे के लिए लोग जनरल कोच में घुसने के लिए धक्कामुक्की कर रहे, आरक्षित बोगी में बिना टिकट सफर कर रहे। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में मिथिलेश नामक यात्री चादर का झूला बनाकर 12 घंटे लटका रहा।

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रेलवे का कहना है कि होल्डिंग एरिया बढ़ाए गए है। आरपीएफ तैनात की गई है और रेलवे स्टेशनों पर छठ गीत बज रहे हैं।
लेकिन इस दावे के विपरीत स्टेशनों पर टिकट की किल्लत बरकरार है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी व पूर्व रेलमंत्री व राष्ट्रीय जनता दल के सुप्रीमो लालू यादव ने केंद्र पर आरोप लगाया कि पर्याप्त ट्रेनें नहीं चलाई गईं, जबकि एनडीए ने इस दावे को खारिज किया है।

सोशल मीडिया पर बदइंतजामी की गूंज: X पर वायरल वीडियो में अंबाला से बिहार जाने वाली ट्रेन में खिड़की से चढ़ते यात्री, टॉयलेट में बैठे परिवार। एक यूजर ने लिखा कि 12,000 ट्रेनें कहां हैं? बाथरूम में घुसकर घर जा रहे हैं।

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वोट का एंगल: गुस्सा चुनाव में दिखेगा?

छठ के ठीक बाद चुनाव होने से सियासत गर्मा गई है। 48 लाख से ज्यादा प्रवासी मतदाता NDA के पक्ष में माने जाते हैं, लेकिन छठ खत्म होते ही दिल्ली-मुंबई लौटने की मजबूरी से वोटिंग प्रतिशत गिर सकता है।

BJP का मास्टर प्लान: कार्यकर्ता घर-घर जाकर प्रवासियों को वोटिंग तक रोकने की मुहिम चला रहे। “वोट डालो, फिर जाओ” का नारा।

विपक्ष की चिंता: RJD, कांग्रेस और महागठबंधन का कहना है कि प्रवासी युवा छठ मनाकर लौट जाएंगे, वोट न डाल पाएंगे।

राहुल गांधी को खुला खत लिखा गया कि बिहारियों का गुस्सा मोहब्बत में बदलो, वोट बैंक बनाओ।

प्रशांत किशोर की जन सुराज ट्रेनों में प्रचार कर रही।

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लोगों की आवाज: कई यात्री कह रहे, “ट्रेनों का हाल देखकर वोट से जवाब देंगे। नाम कटने का डर है, लेकिन गुस्सा जिंदा है। एक पोस्ट में लिखा कि बिहारियों को जानवरों जैसा सफर—चुनाव में हिसाब होगा। यह गुस्सा जाति-धर्म से ऊपर उठकर रोजगार, प्रवास और सुविधाओं पर केंद्रित है। महिलाएं-किसान नया वोट बैंक बन सकते हैं। बिहार की मिट्टी में छठ का अर्घ्य और वोट का संकल्प एक साथ बह रहा है। फैसला जनता का।

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