Mumbai : बॉम्बे हाई कोर्ट ने गुरुवार (2 जुलाई) को सोशलिस्ट डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ़ इंडिया (SDPI) के जनरल सेक्रेटरी सईद अहमद अब्दुल वाहिद चौधरी (49) की याचिका पर सुनवाई के दौरान एक बड़ी टिप्पणी की है। हाईकोर्ट के जस्टिस माधव जामदार ने चौधरी की याचिका पर मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि "नागरिकों को भारत सरकार का गुलाम बनाया जा रहा है।" यह टिप्पणी विरोध-प्रदर्शनों को दबाने की सरकार की प्रवृत्ति को लेकर थी।
Mumbai : बॉम्बे हाई कोर्ट ने गुरुवार (2 जुलाई) को सोशलिस्ट डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ़ इंडिया (SDPI) के जनरल सेक्रेटरी सईद अहमद अब्दुल वाहिद चौधरी (49) की याचिका पर सुनवाई के दौरान एक बड़ी टिप्पणी की है। हाईकोर्ट के जस्टिस माधव जामदार ने चौधरी की याचिका पर मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि “नागरिकों को भारत सरकार का गुलाम बनाया जा रहा है।” यह टिप्पणी विरोध-प्रदर्शनों को दबाने की सरकार की प्रवृत्ति को लेकर थी।
दरअसल, SDPI के जनरल सेक्रेटरी सईद अहमद अब्दुल वाहिद चौधरी (49) ने केंद्र सरकार और भाजपा के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन करने पर महाराष्ट्र पुलिस द्वारा उनके ख़िलाफ़ जारी किए गए ज़िले से बाहर भेजने के आदेश (एक्सटर्नमेंट ऑर्डर) को चुनौती दी थी। लाइव लॉ डॉट इन के अनुसार, चौधरी की याचिका पर सुनवाई के दौरान जस्टिस माधव जामदार ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि पूरे महाराष्ट्र में “हॉर्स ट्रेडिंग” (विधायकों की खरीद-फरोख्त) चल रही है। साथ ही, कोर्ट ने सत्ताधारी पार्टी की ओर इशारा करते हुए कहा कि कोई भी राजनीतिक नेता “वॉशिंग मशीन” में शामिल होकर अपने खिलाफ चल रहे आपराधिक मामलों को बंद करवा सकता है।
जस्टिस माधव जामदार ने सईद अहमद अब्दुल वाहिद चौधरी को शहर से बाहर निकालने के आदेश को रद्द करते हुए कहा कि सिर्फ़ सरकार के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन करना ऐसी कार्रवाई का आधार नहीं हो सकता। विरोध-प्रदर्शनों को दबाने की सरकार की प्रवृत्ति की कड़ी आलोचना करते हुए जज ने मौखिक रूप से यह भी कहा कि “नागरिकों को भारत सरकार का गुलाम बनाया जा रहा है।”
जस्टिसजामदार ने ने हल्के-फुल्के अंदाज़ में कहा, “परसों ही एक 10 साल के बच्चे की दुर्घटना में मौत हो गई और राज्य विधानसभा में किस बात पर चर्चा हो रही थी – कि पीठासीन अधिकारी का चुनाव कैसे होता है और वह एक पार्टी से दूसरी पार्टी में कैसे चले गए… यह क्या है? आपको (सईद) भी पाला बदल लेना चाहिए… वैसे भी पूरे महाराष्ट्र में हॉर्स ट्रेडिंग (विधायकों की खरीद-फरोख्त) चल रही है। आपके (सईद) खिलाफ कुछ FIR दर्ज हैं… पाला बदलने के बारे में सोचिए, वहां एक ‘वॉशिंग मशीन’ है।”
लिखित आदेश में जस्टिस जमदार ने स्पष्ट किया कि सरकार के फ़ैसलों का सिर्फ़ विरोध करना किसी नागरिक को शहर से बाहर निकालने का आधार नहीं बन सकता; और अगर ऐसा किया जाता है, तो इससे बोलने और सम्मान के उनके मौलिक अधिकार पर असर पड़ेगा। हाईकोर्ट ने कहा, “याचिकाकर्ता ने अपनी हैसियत से भारत सरकार के कुछ फैसलों के खिलाफ़ मोर्चे और धरने आयोजित किए हैं। यह महाराष्ट्र पुलिस एक्ट के तहत किसी व्यक्ति को राज्य से बाहर निकालने (एक्सटर्नमेंट) का आधार नहीं हो सकता। यह कार्रवाई दुर्भावनापूर्ण है। इसलिए, एक्सटर्नमेंट के आदेश को रद्द करते हुए याचिका का निपटारा किया जाता है।”