लेह के जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक जेल से रिहा हो गए है और क्षेत्र में लौट चुके हैं। उन्होने कहा कि वह लद्दाख से जुड़े मुद्दों पर बातचीत करने के लिए तैयार हैं। वांगचुक ने कहा कि लगभग छह महीने बाद पहाड़ों में लौटकर उन्हें बहुत अच्छा लग रहा है।
नई दिल्ली। लेह के जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक जेल से रिहा हो गए है और क्षेत्र में लौट चुके हैं। उन्होने कहा कि वह लद्दाख से जुड़े मुद्दों पर बातचीत करने के लिए तैयार हैं। वांगचुक ने कहा कि लगभग छह महीने बाद पहाड़ों में लौटकर उन्हें बहुत अच्छा लग रहा है। 170 दिनों के बाद, इन पहाड़ों में आकर और लोगों से मिलकर मुझे उम्मीद है कि जिस मकसद के लिए हम काम कर रहे हैं, उसके लिए एक नया सूरज उगेगा। हम उम्मीद के साथ आगे बढ़ रहे हैं। हमें उम्मीद है कि सभी तरफ से ऐसा ही माहौल बनेगा और मैं पूरे देश के उन लोगों का शुक्रिया अदा करना चाहूंगा जिन्होंने इस संघर्ष में हमारा साथ दिया। लोगों से मिलने का बेसब्री से इंतज़ार है।
वांगचुक को जोधपुर सेंट्रल जेल से तब रिहा किया गया जब सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत उनकी हिरासत रद्द कर दी। वह 26 सितंबर, 2025 से हिरासत में थे। इससे पहले अपनी हिरासत के बारे में बात करते हुए वांगचुक ने कहा कि इस दौरान उन्हें खुद के बारे में सोचने का समय मिला। उन्होंने कहा कि हालांकि न्याय के नज़रिए से कुछ दिक्कतें थीं, लेकिन वह कोई कड़वाहट नहीं रखना चाहते और बातचीत के ज़रिए आगे बढ़ने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि मेरी निजी ज़िंदगी में यह एक सकारात्मक अनुभव था। यह एक ऐसा अनुभव था जिसने मुझे खुद के बारे में सोचने का समय दिया। न्याय के नज़रिए से कई गलतियां हुईं, कई गलत काम हुए और ऐसी गलतियां किसी के साथ नहीं होनी चाहिए। लेकिन जिस तरह से उन्हें वापस लिया गया मैं समझता हूं कि उन गलतियों के बारे में अब जागरूकता आ गई है। वांगचुक ने जेल में बिताए अपने समय को एक बहुत ही भयानक कहानी भी बताया और अपनी पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो को कानूनी मदद लेने में आई मुश्किलों के बारे में भी बात की। वांगचुक को लेह में लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के दो दिन बाद हिरासत में लिया गया था।