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जल जीवन मिशन में भ्रष्टाचार: ED की एंट्री से मचा हड़कंप, यूपी जल निगम ग्रामीण से मांगी विस्तृत जानकारी, पूछा-2019 से अब तक कितनी टंकियां गिरीं

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पानी की टंकियों से जुड़े मामलों को लेकर उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) से विस्तृत जानकारी तलब की है। ED के लखनऊ जोनल कार्यालय ने 27 अगस्त 2026 को जल निगम के प्रबंध निदेशक को पत्र भेजकर संबंधित मामलों की जानकारी 14 सितंबर 2026 तक उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

By टीम पर्दाफाश 
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लखनऊ। जल जीवन मिशन योजना में हुए भ्रष्टाचार को लेकर लगातार सवाल उठते रहते हैं। उत्तर प्रदेश में इस योजना के तहत बनी कई पानी की टंकियां गिर चुकी हैं, जबकि कई जगहों पर घटिया निमार्ण की शिकायतें भी आती रहती हैं। पर्दाफाश न्यूज जल जीवन मिशन में हुए भ्रष्टाचार को लगातार उजागर करता रहता है। भ्रष्टाचार उजागर करने पर अधिकारियों के द्वारा पर्दाफाश पर दबाव भी बनाया जाता है। यही नहीं पर्दाफाश के संपादक के खिलाफ मानहानी का मुकदमा भी कर दिया गया। अब जल जीवन मिशन के इस भ्रष्टाचार मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की एंट्री हो चुकी है। ईडी ने उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) से विस्तृत जानकारी तलब की है। ईडी ने 14 सितंबर तक पूरी जानकारी मांगी है।

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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पानी की टंकियों से जुड़े मामलों को लेकर उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) से विस्तृत जानकारी तलब की है। ED के लखनऊ जोनल कार्यालय ने 27 अगस्त 2026 को जल निगम के प्रबंध निदेशक को पत्र भेजकर संबंधित मामलों की जानकारी 14 सितंबर 2026 तक उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

ED ने यह जानकारी धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (PMLA) की धारा 54 के तहत मांगी है। ED ने वर्ष 2019 से अब तक जल जीवन मिशन के तहत निर्मित ऐसी सभी टंकियों का ब्योरा मांगा गया है, जो निर्माण के दौरान या बाद में ढह गईं, फट गईं, लीक हुईं, टेढ़ी हुईं, धंस गईं, असुरक्षित घोषित हुईं, ध्वस्त की गईं या दोबारा बनाई गईं। साथ ही प्रत्येक मामले में टंकी के क्षतिग्रस्त होने का कारण भी मांगा गया है।

ED ने मांगे इन कामों के प्रमुख दस्तावेज
. मूल प्रशासनिक स्वीकृति और वित्तीय स्वीकृति की प्रमाणित प्रतियां।
. टेंडर नोटिफिकेशन, DPR और स्वीकृत स्ट्रक्चरल डिजाइन/ड्रॉइंग।
. काम पाने वाली ठेकेदार फर्म का नाम, पता और पंजीकरण विवरण।
. अंतिम वर्क ऑर्डर की राशि, अनुबंध अवधि और वास्तविक पूर्णता की तारीख।
. टंकी के निर्माण से पहले के स्ट्रक्चरल सेफ्टी सर्टिफिकेट, मिट्टी परीक्षण और मिक्स डिजाइन रिपोर्ट।
. थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन (TPI) रिपोर्ट और गुणवत्ता ऑडिट रिकॉर्ड।
. सीमेंट, एग्रीगेट और सरिया आदि के मटेरियल टेस्टिंग रिपोर्ट।
. ठेकेदार, सब-कॉन्ट्रैक्टर और TPI एजेंसी को किए गए भुगतान से संबंधित RA बिल और अंतिम बिल तथा बैंक खाते का विवरण।
. JJM-IMIS पोर्टल पर अपलोड की गई प्रविष्टियों और निर्माण/प्रगति/पूर्णता की तस्वीरें।
. भुगतान जारी करने से पहले संरचनात्मक मजबूती की जांच करने वाले अधिकारियों के नाम व पद।
. जिम्मेदार इंजीनियरों, TPI एजेंसियों या ठेकेदारों के खिलाफ की गई प्रशासनिक कार्रवाई। . टंकी ढहने से संबंधित FIR और जांच/पूछताछ रिपोर्ट, यदि कोई हो।
. अनुमानित कुल वित्तीय नुकसान और रिकवरी की कार्रवाई।
. इसके अलावा ED ने पत्र के साथ संलग्न Annexure-A के निर्धारित प्रारूप में भी संबंधित आंकड़े उपलब्ध कराने को कहा है।

14 सितंबर तक जवाब मांगा
ED ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि यह जानकारी PMLA, 2002 की धारा 54 के तहत मांगी गई है और इसे अत्यंत जरूरी (Most Urgent) बताते हुए 14 सितंबर 2026 तक उपलब्ध कराने को कहा गया है। हालांकि, पत्र में किसी व्यक्ति या संस्था को दोषी घोषित नहीं किया गया है। यह दस्तावेज ED द्वारा जानकारी और रिकॉर्ड जुटाने की कार्रवाई को दर्शाता है।

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