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सीएम योगी की कुर्सी पर नजर गड़ाये डिप्टी सीएम ने खोज लिया है बिना खून निकाले रिपोर्ट देने का नायाब तरीका : अ​खिलेश यादव

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह पटरी से उतर गई हैं। डिप्टी सीएम की नज़र अपने विभाग के बजाय सीएम योगी की कुर्सी पर होने की वजह से हर तरफ मनमानी और बदहाली दिखाई दे रही है। अचरज तो यह है कि उनकी सरकार में बिना खून निकाले रिपोर्ट देने का तरीका भी खोज लिया गया है।

By santosh singh 
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लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह पटरी से उतर गई हैं। डिप्टी सीएम की नज़र अपने विभाग के बजाय सीएम योगी की कुर्सी पर होने की वजह से हर तरफ मनमानी और बदहाली दिखाई दे रही है। अचरज तो यह है कि उनकी सरकार में बिना खून निकाले रिपोर्ट देने का तरीका भी खोज लिया गया है। कानपुर में दो सीएमओ एक कुर्सी पर झगड़ पड़े तो पुलिस बुलानी पड़ गई। डीसीएम साहब अपनी नाकामी छुपाने के लिए छापेबाजी करके बैठ जाते है। असर कुछ होता नहीं है।

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अभी पिछले दिनों डिप्टी साहब गोंडा के मेडिकल कॉलेज गए जहां हर तरफ अव्यवस्था थी। अस्पताल में डॉक्टर जींस-टीशर्ट में थे। मरीजों ने बताया कि अस्पताल में भर्ती मरीजों को चादर भी नहीं मिलती है। घर की शाल और कम्बल बिछाकर मरीज लेटे दिखाई पड़े। मंत्री जी ने फटकार तो बहुत लगाई पर उनके 37 मिनट के दौरे के बाद कुछ भी नहीं बदला अस्पताल अपने ढर्रे पर आ गया।

झांसी में महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में जमीन पर बैठे मरीज को ड्रिप चढ़ाए जाने का दृष्य सोशल मीडिया पर भी वायरल हो चुका है। जगदीशपुर अमेठी में इकलौता ट्रामा सेंटर कहने भर को इमर्जेंसी सेवाएं देने के उरई ट्रामा सेंटर में घंटों मरीजों को इलाज नहीं मिलने की शिकायते हैं तो पीलीभीत ओर फतेहपुर मेडिकल कॉलेज में भी इलाज की सुविधा नहीं है। हद तो तब हो गई जब हमीरपुर के जिला अस्पताल में बोतल चढ़ा मरीज को पैदल ही वार्ड में भेज दिया गया। हांफते कांपते पहुंचे मरीज की वार्ड में जाते ही सांसे थम गई। ये तो कुछ नमूने है।

खुद राजधानी लखनऊ में भी स्वास्थ्य सेवाओं की दशा ठीक नहीं कही जा सकती है। वेंटिलेटर होते हुए भी मरीजों की जानें जाती है। बेड होते हुए भी मरीज स्ट्रेचर पर इलाज कराते हैं। गंभीर मरीजों को भी एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल रेफर करने का खेल बंद नहीं हो रहा है। चिकित्सा विशेषज्ञों की कमी है और महंगी मशीने जंग खा रही हैं।

सरकारी अस्पतालों में बदइंतजामी और बदहाली की वजह से मरीज प्राइवेट अस्पतालों में इलाज करवाने को मजबूर हो रहे हैं। गलत इलाज से आए दिन मौतें होने पर हंगामा हो रहा है। मरीजों से पैसों की खुली लूट होने से लोग परेशान हैं। 2027 के विधान चुनाव में भाजपा की विदाई से ही शिक्षा-स्वास्थ्य की व्यवस्था में सुधार आयेगा। जनता 2027 के विधानसभा चुनाव के इंतजार में है।

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