कलयुग के जाग्रत देवता हनुमान जी (Hanuman Ji) कहे जाते हैं। इनकी भक्ति के लिए 'हनुमान चालीसा' का पाठ (Hanuman Chalisa Ka Path) सबसे सरल और प्रभावशाली तरीका है। मान्यता है कि इसका नियमित पाठ करने से हर डर और संकट दूर हो जाता है, लेकिन, अक्सर लोग जल्दबाजी में या अनजाने में कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिससे उन्हें पाठ का पूरा लाभ नहीं मिल पाता।
नई दिल्ली। कलयुग के जाग्रत देवता हनुमान जी (Hanuman Ji) कहे जाते हैं। इनकी भक्ति के लिए ‘हनुमान चालीसा’ का पाठ (Hanuman Chalisa Ka Path) सबसे सरल और प्रभावशाली तरीका है। मान्यता है कि इसका नियमित पाठ करने से हर डर और संकट दूर हो जाता है, लेकिन, अक्सर लोग जल्दबाजी में या अनजाने में कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिससे उन्हें पाठ का पूरा लाभ नहीं मिल पाता।
हनुमान चालीसा पाठ के जरूरी नियम
हनुमान जी की पूजा में ‘शुद्धता’ और ‘अनुशासन’ का बहुत महत्व है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, चालीसा का पाठ ( Chalisa Ka Path)करते समय तन और मन दोनों का शुद्ध होना जरूरी है। अगर आप अशुद्ध अवस्था में या बिना स्नान किए पाठ करते हैं, तो इसे दोषपूर्ण माना जाता है। पाठ के दौरान कभी भी बीच में उठना नहीं चाहिए और न ही किसी से बात करनी चाहिए, क्योंकि इससे एकाग्रता भंग होती है और आपकी प्रार्थना अधूरी रह जाती है।
इन परिस्थितियों में भूलकर भी न करें पाठ
हनुमान जी को ‘बाल ब्रह्मचारी’ माना गया है, इसलिए उनके पाठ से जुड़े कड़े नियम हैं। शास्त्रों और मान्यताओं के मुताबिक, जिस घर में सूतक लगा हो (जैसे परिवार में किसी का जन्म या मृत्यु हुई हो), वहां हनुमान चालीसा का पाठ करने से बचना चाहिए।
इसके अलावा, अगर आपने मांस या मदिरा का सेवन किया है, तो भूलकर भी हनुमान चालीसा का स्पर्श या पाठ न करें। तामसिक भोजन के प्रभाव में किया गया पाठ शुभ के बजाय नकारात्मक फल दे सकता है।
पाठ शुरू करने से पहले एक लाल आसन पर बैठें और सामने हनुमान जी की प्रतिमा या चित्र रखें। ज्योतिष शास्त्र (Astrology) के अनुसार, पाठ शुरू करने से पहले गणेश जी और अपने कुलदेवता का स्मरण जरूर करें। अगर संभव हो सके, तो हनुमान जी के सामने चमेली के तेल (Chameli Ka Tel) का दीपक जलाएं। पाठ पूरा होने के बाद हनुमान जी (Hanuman Ji) को गुड़ और चने का भोग लगाना अत्यंत फलदायी होता है।