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झारखंड HC से हेमंत सोरेन को बड़ी राहत, जमीन घोटाले में मिली जमानत

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Former Chief Minister of Jharkhand Hemant Soren) को जमीन घोटाला (Land Scam) मामले में झारखंड हाईकोर्ट (Jharkhand High Court) से शुक्रवार को जमानत मिल गई है।

By santosh singh 
Updated Date

नई दिल्ली। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Former Chief Minister of Jharkhand Hemant Soren) को जमीन घोटाला (Land Scam) मामले में झारखंड हाईकोर्ट (Jharkhand High Court) ने शुक्रवार को बड़ी राहत देते हुए जमानत दे दी है। हेमंत सोरेन (Hemant Soren) को प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा 31 जनवरी को गिरफ्तार किया गया था। उन पर जमीन से जुड़े घोटाले के मामले में धन शोधन का आरोप है।

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बता दें कि 31 जनवरी को ईडी (ED) ने हेमंत सोरेन (Hemant Soren) को गिरफ्तार किया था। हालांकि इस बीच हेमंत सोरेन (Hemant Soren) जमानत पर बाहर आए थे और फिर जेल चले गए। करीब 5 महीने तक हेमंत सोरेन (Hemant Soren)  जेल में रहे। झारखंड हाई कोर्ट (Jharkhand High Court) ने जमीन घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस (Money Laundering Case) में पूर्व सीएम हेमंत सोरेन (Former Chief Minister of Jharkhand Hemant Soren) की जमानत याचिका मंजूर कर ली है। जस्टिस रंगन मुखोपाध्याय (Justice Rangan Mukhopadhyay) की कोर्ट ने इस याचिका पर तीन दिनों तक बहस और सुनवाई पूरी करने के बाद 13 जून को फैसला सुरक्षित रख लिया था।

31 जनवरी को ईडी ने किया था गिरफ्तार

हेमंत सोरेन (Hemant Soren) को ईडी (ED)  ने जमीन घोटाले में 31 जनवरी की रात को गिरफ्तार किया था। तब से वह रांची के बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल में न्यायिक हिरासत में बंद हैं। जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान हेमंत सोरेन (Hemant Soren) की ओर से दलीलें पेश करते हुए सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा था कि जिस जमीन पर कब्जे के आरोप में ईडी ने हेमंत सोरेन के खिलाफ कार्रवाई की है, वह जमीन छोटानागपुर टेनेंसी एक्ट के तहत “भुईंहरी” नेचर की है और इसे किसी भी स्थिति में किसी व्यक्ति को बेचा या हस्तांतरित नहीं किया जा सकता।

जमीन की लीज राजकुमार पाहन के नाम पर

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इस जमीन की लीज राजकुमार पाहन के नाम पर है। इस जमीन पर हिलेरियस कच्छप नामक एक व्यक्ति खेती करता था और बिजली का कनेक्शन उसी के नाम पर पर है। इससे हेमंत सोरेन (Hemant Soren)  का कोई संबंध नहीं है। सोरेन के अधिवक्ताओं ने कहा कि हेमंत सोरेन पर वर्ष 2009-10 में इस जमीन पर जब कब्जा करने का आरोप लगाया गया, लेकिन इसे लेकर कहीं कंप्लेन दर्ज नहीं है। अप्रैल 2023 में ईडी (ED)  ने इस मामले में कार्यवाही शुरू की और सिर्फ कुछ लोगों के मौखिक बयान के आधार पर बता दिया कि यह जमीन हेमंत सोरेन (Hemant Soren)  की है।

ईडी ने जमानत का किया था विरोध

ईडी (ED)  के पास इस बात के कोई सबूत नहीं हैं कि हेमंत सोरेन (Hemant Soren) ने इस पर कब, कहां और किस तरह कब्जा किया। यह राजनीतिक प्रतिशोध का मामला है। इधर, ईडी (ED)  की ओर से असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि यह इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि बरियातू की 8.86 एकड़ जमीन पर हेमंत सोरेन का अवैध कब्जा है। इस जमीन के कागजात में भले हेमंत सोरेन का नाम दर्ज नहीं है, लेकिन जमीन पर अवैध कब्जा पीएमएलए के तहत अपराध है।

इस जमीन पर बैंक्वेट हॉल बनाने की उनकी योजना थी, जिसका नक्शा उनके करीबी विनोद सिंह ने उनके मोबाइल पर भेजा था। हेमंत सोरेन काफी प्रभावशाली व्यक्ति हैं और उन्होंने राज्य तंत्र का दुरुपयोग करते हुए खुद को बचाने के कई प्रयास किए थे। उन्हें जमानत दी जाती है तो वे फिर से जांच को बाधित करने का प्रयास कर सकते हैं।

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