Hindu Nav Varsh 2083 : आज (19 मार्च) चैत्र शुक्लपक्ष की प्रतिपदा से नव संवत्सर यानी हिंदू नववर्ष 2083 की शुरुआत हो गयी है। इस दिन से ही चैत्र नवरात्रि की भी शुरुआत होती है। देश के पीएम नरेंद्र मोदी ने नव संवत्सर और नवरात्रि की शुभकामनाएं दीं हैं। इसके अलावा, उन्होंने उगादी और गुड़ी पड़वा की भी बधाई दी है।
Hindu Nav Varsh 2083 : आज (19 मार्च) चैत्र शुक्लपक्ष की प्रतिपदा से नव संवत्सर यानी हिंदू नववर्ष 2083 की शुरुआत हो गयी है। इस दिन से ही चैत्र नवरात्रि की भी शुरुआत होती है। देश के पीएम नरेंद्र मोदी ने नव संवत्सर और नवरात्रि की शुभकामनाएं दीं हैं। इसके अलावा, उन्होंने उगादी और गुड़ी पड़वा की भी बधाई दी है।
पीएम नरेंद्र मोदी ने हिंदू नववर्ष की बधाई देते हुए एक्स पोस्ट में लिखा, “देशवासियों को नव संवत्सर की अनंत शुभकामनाएं। मेरी कामना है कि यह नया साल आप सभी के जीवन में साहस, आत्मविश्वास और सेवा की भावना को और सशक्त करे, जो राष्ट्र निर्माण के प्रयासों को भी नई मजबूती दे।”
देशवासियों को नव संवत्सर की अनंत शुभकामनाएं। मेरी कामना है कि यह नया साल आप सभी के जीवन में साहस, आत्मविश्वास और सेवा की भावना को और सशक्त करे, जो राष्ट्र निर्माण के प्रयासों को भी नई मजबूती दे।
— Narendra Modi (@narendramodi) March 19, 2026
चैत्र नवर्ष की शुभारंभ पर पीएम मोदी ने अन्य पोस्ट में लिखा, “देशभर के मेरे परिवारजनों को नवरात्रि की हार्दिक मंगलकामनाएं। शक्ति की आराधना का यह दिव्य अवसर आप सभी के लिए सुख, सौभाग्य, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य लेकर आए। शक्तिस्वरूपा मां दुर्गा की असीम कृपा से सबका कल्याण हो, जिससे विकसित भारत के हमारे संकल्प को भी नई ऊर्जा मिले। जय अंबे जगदंबे मां!”
देशभर के मेरे परिवारजनों को नवरात्रि की हार्दिक मंगलकामनाएं। शक्ति की आराधना का यह दिव्य अवसर आप सभी के लिए सुख, सौभाग्य, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य लेकर आए। शक्तिस्वरूपा मां दुर्गा की असीम कृपा से सबका कल्याण हो, जिससे विकसित भारत के हमारे संकल्प को भी नई ऊर्जा मिले। जय अंबे…
— Narendra Modi (@narendramodi) March 19, 2026
उन्होंने आगे लिखा, “नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप देवी शैलपुत्री की पूजा का विधान है। उनके आशीर्वाद से हर किसी के जीवन में संयम, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो, यही कामना है। वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्। वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥”