राजेश्वर सिंह ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, समाजवादी सरकार में लगभग हर भर्ती-पेपर लीक, कोर्ट केस और रद्दीकरण की भेंट चढ़ जाती थी। जिनकी सरकार में 600 भर्तियां रद्द कराने की मांग पर 700 से अधिक याचिकाएं कोर्ट में दायर हुईं। कोर्ट को CBI जांच का आदेश देना पड़ा, PSC चेयरमैन हटाना पड़ा, आज वही लोग सरकारी नौकरियों और युवाओं के भविष्य की दुहाई दे रहे हैं।
लखनऊ। भाजपा विधायक राजेश्वर सिंह ने समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने सपा सरकार के दौरान भर्तियों की याद दिलाते हुए उन्हे घेरा है। भाजपा विधायक ने कहा कि, आज भर्ती प्रक्रिया धीमी नहीं, सुरक्षित है, क्योंकि अब पेपर माफ़िया नहीं, कानून का राज चलता है। 2025 तक 16,284 पुलिस मुठभेड़ें, 266 दुर्दांत अपराधी ढेर, यह आंकड़े कानून-व्यवस्था की मज़बूती खुद बयान करते हैं।
राजेश्वर सिंह ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, समाजवादी सरकार में लगभग हर भर्ती-पेपर लीक, कोर्ट केस और रद्दीकरण की भेंट चढ़ जाती थी। जिनकी सरकार में 600 भर्तियां रद्द कराने की मांग पर 700 से अधिक याचिकाएं कोर्ट में दायर हुईं। कोर्ट को CBI जांच का आदेश देना पड़ा, PSC चेयरमैन हटाना पड़ा, आज वही लोग सरकारी नौकरियों और युवाओं के भविष्य की दुहाई दे रहे हैं।
समाजवादी सरकार में लगभग हर भर्ती – पेपर लीक, कोर्ट केस और रद्दीकरण की भेंट चढ़ जाती थी!
जिनकी सरकार में 600 भर्तियाँ रद्द कराने की माँग पर 700 से अधिक याचिकाएँ कोर्ट में दायर हुईं। कोर्ट को CBI जांच का आदेश देना पड़ा, PSC चेयरमैन हटाना पड़ा, आज वही लोग सरकारी नौकरियों और युवाओं…
— Rajeshwar Singh (@RajeshwarS73) January 4, 2026
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उन्होंने आगे लिखा, वे भूल गए हैं कि योगी सरकार में अब तक 8.5 लाख से अधिक सरकारी भर्तियां पूरी हो चुकी हैं। अकेले UP Police में 2.19 लाख युवाओं की भर्ती, UPSSSC, UPPSC और अन्य आयोगों से लाखों नियुक्तियां ऑनलाइन, मेरिट-आधारित और पारदर्शी तरीके से संपन्न हुई हैं। वर्ष 2026 में 1.5 लाख और भर्तियां प्रस्तावित हैं, जिससे 10 वर्षों में 10 लाख से अधिक सरकारी नियुक्तियों का आंकड़ा पार होने जा रहा है।
आज भर्ती प्रक्रिया धीमी नहीं, सुरक्षित है, क्योंकि अब पेपर माफ़िया नहीं, कानून का राज चलता है। 2025 तक 16,284 पुलिस मुठभेड़ें, 266 दुर्दांत अपराधी ढेर, यह आंकड़े कानून-व्यवस्था की मज़बूती खुद बयान करते हैं। आज सवाल यह नहीं है कि कितना शोर मचाया जा रहा है, सवाल यह है कि कितनी नौकरियाँ दी गईं, कितनी ईमानदारी से दी गईं और किस दौर में युवा सबसे ज़्यादा ठगा गया। आंकड़े जवाब दे चुके हैं, अब शोर सिर्फ़ असहज सच से बचने की कोशिश है।