सपा के अपने लोग टूटने की कगार पर हैं। निषाद पार्टी को सपा की किसी बैसाखी की जरूरत नहीं है; सच तो यह है कि सपा खुद अब तक कांग्रेस की बैसाखी का जुगाड़ नहीं कर पाई है। एनडीए में निषाद पार्टी का गठबंधन, बराबरी और हिस्सेदारी का गठबंधन है। कसरवल कांड में हमारे निर्दोष भाइयों पर गोलियां चलवाने वाले सपा नेता यह न भूलें कि निषाद समाज अपने शहीदों का बलिदान और उनका जुल्म कभी भुला नहीं है।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सियासी सरगर्मी बढ़ती जा रही है। निषाद समाज पार्टी के प्रमुख और यूपी सरकार के मंत्री संजय निषाद को लेकर बीते कई दिनों से तरह तरह की चर्चाएं चल रही हैं। अब संजय निषाद का बड़ा बयान आया है। उन्होंने कहा कि, सपा के अनपढ़ और लठैत निषाद पार्टी के भविष्य पर अनर्गल टीका-टिप्पणी करने और अफवाह फैलाने की बजाय अपने गिरेबान में झांकें।
संजय निषाद ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, जिनके घर शीशे के बने होते हैं, वे दूसरों के घरों पर पत्थर नहीं फेंकते। बेहतर होगा कि सपा के अनपढ़ और लठैत निषाद पार्टी के भविष्य पर अनर्गल टीका-टिप्पणी करने और अफवाह फैलाने की बजाय अपने गिरेबान में झांकें। निषाद पार्टी को मिलने वाली सीटों पर व्यर्थ समय गंवाने के बजाय पहले वे कांग्रेस के साथ बैठकर अपनी सीटों का बंटवारा कर लें।
जिनके घर शीशे के बने होते हैं, वे दूसरों के घरों पर पत्थर नहीं फेंकते। बेहतर होगा कि सपा के अनपढ़ और लठैत निषाद पार्टी के भविष्य पर अनर्गल टीका-टिप्पणी करने और अफवाह फैलाने की बजाय अपने गिरेबान में झांकें। निषाद पार्टी को मिलने वाली सीटों पर व्यर्थ समय गंवाने के बजाय पहले वे…
— Dr. Sanjay Kumar Nishad (@drsanjayknishad) September 16, 2026
उन्होंने आगे लिखा, सपा के अपने लोग टूटने की कगार पर हैं। निषाद पार्टी को सपा की किसी बैसाखी की जरूरत नहीं है; सच तो यह है कि सपा खुद अब तक कांग्रेस की बैसाखी का जुगाड़ नहीं कर पाई है। एनडीए में निषाद पार्टी का गठबंधन, बराबरी और हिस्सेदारी का गठबंधन है। कसरवल कांड में हमारे निर्दोष भाइयों पर गोलियां चलवाने वाले सपा नेता यह न भूलें कि निषाद समाज अपने शहीदों का बलिदान और उनका जुल्म कभी भुला नहीं है। जिन्होंने हक मांगने पर गोलियां चलवाईं, वे आज समाज के हितैषी बनने का ढोंग न करें।
संजय निषाद ने आगे लिखा, मछुआरों के खून में राजनीति और स्वाभिमान है। यह समुदाय सिर्फ बराबरी की भागीदारी में विश्वास रखता है। मुगलों और अंग्रेजों से लोहा लेने वाले इस वीर समाज ने कभी किसी के लिए केवल दरी बिछाने की राजनीति नहीं की। डॉ. संजय निषाद के राजनीतिक भविष्य की चिंता करने के बजाय सपा पहले अपना वजूद बचाए। सवाल यह नहीं है कि संजय निषाद कहां जाएंगे; सवाल यह है कि खुद शिवपाल यादव जी और रामगोपाल यादव जी कहां जाएंगे? सपा लगातार सिकुड़ रही है और निषाद पार्टी का जनाधार निरंतर बढ़ रहा है।