इजरायल और अमेरिका ने मिलकर कुछ दिनों पहले ईरान पर हमला कर दिया था। इसके बाद से तीनों देशों के बीच भयानक युद्ध चल रहा है। अमेरिका और इजरायल मिलकर ईरान पर हमला कर रहे है, तो भी दोनों देशों को मुंह तोड़ जवाब दे रहा है।
नई दिल्ली। इजरायल और अमेरिका ने मिलकर कुछ दिनों पहले ईरान पर हमला कर दिया था। इसके बाद से तीनों देशों के बीच भयानक युद्ध चल रहा है। अमेरिका और इजरायल मिलकर ईरान पर हमला कर रहे है, तो भी दोनों देशों को मुंह तोड़ जवाब दे रहा है। इस युद्ध के कारण दुनिया भर में ऊर्जा का संकट पैदा हो गया है। ईरान ने कच्चे तेल की सप्लाई रोक दी है। ऊर्जा संकट को देखते हुए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी तेल खरीद को लेकर प्रतिबंधों पर अस्थाई ढील दी है, लेकिन इस पर ईरान को जो बयान है उसने राष्ट्रपति ट्रंप को चौका दिया है।
भारत के मुंबई में ईरान का दूतावास स्थित है। शनिवार को दूतावास से बयान जारी हुआ है, जिसमें कहा गया है कि फिलहाल अंतराष्ट्रीय बाजारों के लिए हमारे पास कच्चा तेल नहीं है। इसके साथ ही न कोई अतिरिक्त भंडार है। ईरान का यह बयान सामने आने के बाद से अस्थिर बाजार में और भी चिंताएं बढ़ गई है। यह संघर्ष के चौथे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बढ़ोतरी आई है। बता दे कि अमेरिकी वित्तमंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि ईरानी तेल खरीदने के लिए 30 दिनों के लिए प्रतिबंधों पर छूट दी गई है। उन्होने कहा कि इस फैसले का मकसद वैश्विक बाजार को तेजी से स्थिर करना है। उन्होंने कहा कि छूट से लगभग 140 मिलियन बैरल तेल वैश्विक बाजार में उपलब्ध होगा। यह छूट 20 मार्च से 19 अप्रैल के बीच मिलेगी।
वहीं युद्ध के बाद से होर्मुज स्ट्रेट क्षेत्र बंद है और वहां के हालात काफी तनावपूर्ण बने हुए हैं। मिडिल ईस्ट के कई देशों ने ईरान की गतिविधियों पर नाराजगी जताते हुए निंदा की है। सभी देशों ने ईरान से हमले रोकने की अपील की है। ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड, जापान, कनाडा, कोरिया गणराज्य, न्यूजीलैंड, डेनमार्क, लातविया, स्लोवेनिया, एस्टोनिया, नॉर्वे, स्वीडन, फिनलैंड, चेकिया, रोमानिया, बहरीन और लिथुआनिया ने एक साथ मिलकर ईरान से यह अपील की हैं