भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) 30 अक्टूबर को अपना अगली पीढ़ी का नेविगेशन सैटेलाइट, NVS-03 लॉन्च करने जा रहा है। यह मिशन भारत के स्वदेशी सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम, 'नाविक' (NavIC) को स्वतंत्र पोजिशनिंग सेवाएं देने में सक्षम बनाने में मदद कर सकता है।
ISRO Navigation Satellite NVS-03 : भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) 30 अक्टूबर को अपना अगली पीढ़ी का नेविगेशन सैटेलाइट, NVS-03 लॉन्च करने जा रहा है। यह मिशन भारत के स्वदेशी सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम, ‘नाविक’ (NavIC) को स्वतंत्र पोजिशनिंग सेवाएं देने में सक्षम बनाने में मदद कर सकता है। इसे GSLV-F18 रॉकेट के जरिए आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च किया जाएगा। इस मिशन का उद्देश्य भारत की स्वदेशी नेविगेशन प्रणाली NavIC की सेवाओं को मजबूत करना है।
ISRO चेयरमैन डॉ. वी. नारायणन (ISRO Chairman Dr. V. Narayanan) ने आज यानी गुरुवार 29 अक्टूबर को तिरुमला स्थित श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में दर्शन के बाद मिशन के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह इस साल ISRO का पांचवां मिशन होगा, जिसमें एक निजी लॉन्च भी शामिल है। NVS-03 के जरिए भारत की पोजिशनिंग, नेविगेशन और टाइमिंग सेवाओं को बेहतर बनाने की दिशा में काम किया जाएगा।
NVS-03 का उद्देश्य मौजूदा NavIC तारामंडल (constellation) को बदलना और उसे और बेहतर बनाना है, क्योंकि पुराने उपग्रह अपने निर्धारित कार्यात्मक जीवनकाल के करीब पहुँच रहे हैं या उसे पार कर चुके हैं।
इसमें बाहर से ली गई घड़ियों के साथ-साथ स्वदेशी परमाणु घड़ी (Indigenously developed atomic clock) भी लगी है, और यह मौजूदा L5 तथा S-बैंड सिग्नलों के साथ एक L1 सिग्नल भी जोड़ता है। L1 सिग्नल की मदद से NavIC को और अधिक यूज़र डिवाइसों के साथ इस्तेमाल किया जा सकेगा।
पहली पीढ़ी के IRNSS-1A उपग्रह की परमाणु घड़ियाँ 2016 में खराब हो गई थीं, और बाद में कुछ अन्य उपग्रहों की रूबिडियम घड़ियों (Rubidium clocks) में भी हार्डवेयर संबंधी समस्याएँ पाई गईं। मई 2023 में लॉन्च किया गया NVS-01 पहला ऐसा उपग्रह था, जिसमें स्वदेशी परमाणु घड़ी लगाई गई थी।
NavIC का उद्देश्य विदेशी उपग्रह नेविगेशन प्रणालियों, जैसे कि अमेरिका के ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (GPS) पर भारत की निर्भरता को कम करना है। इसके उपयोगों में आम नागरिकों के लिए नेविगेशन, परिवहन, समय संबंधी सेवाएँ, बुनियादी ढाँचा और रणनीतिक अभियान शामिल हैं।