केरल (Kerala) के भाषाई गौरव और सांस्कृतिक पहचान को लेकर केंद्र की मोदी सरकार (Modi Government) ने एक बड़ा और ऐतिहासिक निर्णय लिया है। पीएम मोदी (PM Modi) की अध्यक्षता में मंगलवार को केंद्रीय कैबिनेट की हुई बैठक में केरल का आधिकारिक नाम बदलकर 'केरलम' (Keralam) करने के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी गई है।
नई दिल्ली : केरल (Kerala) के भाषाई गौरव और सांस्कृतिक पहचान को लेकर केंद्र की मोदी सरकार (Modi Government) ने एक बड़ा और ऐतिहासिक निर्णय लिया है। पीएम मोदी (PM Modi) की अध्यक्षता में मंगलवार को केंद्रीय कैबिनेट की हुई बैठक में केरल का आधिकारिक नाम बदलकर ‘केरलम’ (Keralam) करने के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी गई है। यह फैसला केरल विधानसभा द्वारा पारित उस सर्वसम्मत प्रस्ताव के बाद लिया गया है, जिसमें राज्य के नाम को मलयालम भाषा के मूल उच्चारण के अनुरूप बदलने की मांग की गई थी।
कैबिनेट की मिली आधिकारिक मंजूरी
आज नई दिल्ली में आयोजित कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठक में गृह मंत्रालय (Home Ministry) द्वारा प्रस्तुत इस नाम परिवर्तन के प्रस्ताव पर विस्तृत चर्चा हुई। कैबिनेट की औपचारिक स्वीकृति मिलने के बाद अब केंद्र सरकार आगामी संसदीय सत्र में संविधान संशोधन विधेयक पेश करेगी। इस निर्णय से केरल की लंबे समय से चली आ रही सांस्कृतिक और भाषाई मांग पूरी हो गई है। हाल ही में केरल भाजपा के अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने भी प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर इस ऐतिहासिक बदलाव का पुरजोर समर्थन किया था।
राज्य विधानसभा का सर्वसम्मत प्रस्ताव
केरल विधानसभा ने जून 2024 में एक विशेष प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से संविधान की पहली अनुसूची में संशोधन का अनुरोध किया था। मुख्यमंत्री पिनारयी विजयन (Chief Minister Pinarayi Vijayan) ने प्रस्ताव पेश करते हुए स्पष्ट किया था कि मलयालम भाषा (Malayalam Language) में राज्य को हमेशा से ‘केरलम’ ही कहा जाता है, लेकिन अंग्रेजी और आधिकारिक सरकारी दस्तावेजों में यह अब भी ‘केरल’ ही दर्ज है। विधानसभा का लक्ष्य था कि संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी आधिकारिक भाषाओं में इसे ‘केरलम’ के रूप में ही पहचाना जाए।
नाम बदलने की संवैधानिक प्रक्रिया
संविधान के अनुच्छेद 3 (Article 3) के तहत संसद के पास किसी भी राज्य का नाम बदलने या उसकी सीमाओं में परिवर्तन करने का अधिकार है।
प्रक्रिया: सबसे पहले संबंधित राज्य की विधानसभा इस आशय का प्रस्ताव पारित करती है।
केंद्र की भूमिका: राज्य के प्रस्ताव पर केंद्रीय गृह मंत्रालय विचार करता है और फिर इसे कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाता है।
कैबिनेट का फैसला: आज मोदी कैबिनेट ने इस प्रस्ताव पर अपनी अंतिम मुहर लगा दी है।
संसद और राष्ट्रपति: अब कैबिनेट की हरी झंडी के बाद, संसद के दोनों सदनों में विधेयक पारित किया जाएगा. राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होने के बाद यह नाम परिवर्तन आधिकारिक रूप से लागू हो जाएगा।
भाषाई गौरव और सांस्कृतिक महत्व
मलयालम भाषी लोगों के लिए ‘केरलम’ शब्द का गहरा ऐतिहासिक महत्व है। 1956 में भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन के समय से ही मलयालम बोलने वाले क्षेत्रों को मिलाकर एक ‘केरलम’ (Keralam) राज्य बनाने का आंदोलन चला था। सरकार और स्थानीय विशेषज्ञों का मानना है कि ‘केरल’ नाम औपनिवेशिक काल की देन है, जबकि ‘केरलम’ (Keralam) नाम राज्य की मूल भाषाई अस्मिता और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है।
हाल ही में बिहार के ‘गया’ शहर का नाम बदलकर ‘गयाजी’ किए जाने के बाद, केरल का नाम परिवर्तन भारत में अपनी क्षेत्रीय और भाषाई विरासत को सम्मान देने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है।