21 जून को प्रस्तावित NEET री-एग्जाम से पहले छात्रों की परेशानियां अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई हैं। सुनवाई के दौरान अभ्यर्थियों की ओर से पेश वकील अदील अहमद ने अदालत को बताया कि..
नई दिल्ली: NEET री-एग्जाम से पहले करीब 1600 अभ्यर्थियों की ओर से दाखिल याचिका का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की तरफ से पेश वकील अदील अहमद ने अदालत को बताया कि सोशल मीडिया पर लगातार फैल रही अफवाहों और दिल्ली हाई कोर्ट में चल रही सुनवाई के कारण बड़ी संख्या में छात्र मानसिक तनाव में हैं। उनका कहना था कि पेपर लीक की खबरों ने अभ्यर्थियों के बीच असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है और इसका असर उनकी तैयारी पर भी पड़ रहा है।
वकील ने अदालत के सामने यह भी बताया कि 21 जून को होने वाले NEET री-एग्जाम से पहले कई छात्रों को एडमिट कार्ड से जुड़ी तकनीकी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कुछ उम्मीदवार अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड ही नहीं कर पा रहे हैं, जबकि कुछ के एडमिट कार्ड में अलग-अलग परीक्षा केंद्र दिखाई दे रहे हैं। उनका कहना था कि परीक्षा से ठीक पहले ऐसी गड़बड़ियां छात्रों की चिंता को और बढ़ा रही हैं।
याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से इन समस्याओं पर तत्काल ध्यान देने की मांग की, ताकि अभ्यर्थियों को समय रहते राहत मिल सके। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने इस याचिका पर अलग से सुनवाई करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि NEET से जुड़े सभी मामले पहले से ही जस्टिस पीएस नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने लंबित हैं और पेपर लीक, री-एग्जाम व एडमिट कार्ड से जुड़े सभी मुद्दे वहीं उठाए जाएंगे।
सीजेआई की टिप्पणी के बाद फिलहाल इस याचिका पर अलग से सुनवाई नहीं होगी। अब 1600 अभ्यर्थियों समेत सभी छात्रों की नजर जस्टिस पीएस नरसिम्हा की बेंच की अगली सुनवाई और NEET री-एग्जाम से जुड़े आगे के फैसलों पर टिकी हुई है।