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संयुक्त राष्ट्र की नई रिपोर्ट में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर जताई चिंता, संघर्ष क्षेत्रों में बढ़ा खतरा

संयुक्त राष्ट्र महासचिव की महिला, शांति और सुरक्षा (Women, Peace and Security) पर 2026 की सालाना रिपोर्ट ने दुनिया के संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में महिलाओं और बच्चियों की स्थिति को लेकर बेहद गंभीर चिंता व्यक्त की है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि युद्ध और सशस्त्र संघर्षों का असर महिलाओं पर केवल हिंसा और विस्थापन के साथ-साथ स्वास्थ्य, सुरक्षा और राजनीतिक भागीदारी के स्तर पर भी पड़ रहा है।

By Sushil Sah 
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नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र महासचिव की महिला, शांति और सुरक्षा (Women, Peace and Security) पर 2026 की सालाना रिपोर्ट ने दुनिया के संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में महिलाओं और बच्चियों की स्थिति को लेकर बेहद गंभीर चिंता व्यक्त की है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि युद्ध और सशस्त्र संघर्षों का असर महिलाओं पर केवल हिंसा और विस्थापन के साथ-साथ स्वास्थ्य, सुरक्षा और राजनीतिक भागीदारी के स्तर पर भी पड़ रहा है।

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इस रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में दुनिया के सक्रिय संघर्षों के 50 किलोमीटर के दायरे में रहने वाली महिलाओं और बच्चियों की संख्या करीब 75.6 करोड़ तक पहुंच गई। यह आंकड़ा ये भी बताता है कि बहुत बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चियां लगातार संघर्ष और असुरक्षा के माहौल में जिन्दगी गुजार रही हैं।

इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र ने संघर्षों में नागरिकों की मौत और महिलाओं के खिलाफ हिंसा को लेकर भी चिंता जताई है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में सशस्त्र संघर्षों में 37 हजार से ज्यादा नागरिको की जान गई, जिनमें लगभग हर चार में से एक महिला या बच्ची थी। वहीं, संयुक्त राष्ट्र ने 2025 में 9,788 मामलों में संघर्ष से जुड़ी यौन हिंसा की पुष्टि की, जो पिछले वर्ष की तुलना में दोगुने से ज्यादा है।

साथ ही इस रिपोर्ट में मातृ स्वास्थ्य को लेकर भी गंभीर स्थिति सामने आई है। संघर्ष प्रभावित देशों में गर्भावस्था और प्रसव के दौरान महिलाओं के लिए जोखिम काफी अधिक पाया गया है। ऐसे देशों में मातृ मृत्यु का जोखिम स्थिर देशों की तुलना में लगभग पांच गुना अधिक बताया गया है। हालांकि, संयुक्त राष्ट्र ने महिलाओं को केवल युद्ध की पीड़ित के रूप में देखने के बजाय शांति निर्माण में उनकी भूमिका बढ़ाने पर जोर दिया है। 2025 में 57 शांति प्रक्रियाओं में महिलाओं की वार्ताकारों के रूप में भागीदारी सिर्फ 5 प्रतिशत रही।

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि टिकाऊ शांति के लिए महिलाओं की निर्णय लेने, शांति वार्ता और नेतृत्व में सार्थक भागीदारी सुनिश्चित करना जरूरी है।

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