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चुनावी बॉन्ड के फैसले का विपक्षी नेताओं ने किया स्वागत, जानिए किसने क्या कहा?

चुनावी बॉन्ड योजना की वैधता के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने आज बड़ा फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद विपक्ष के नेताओं ने खुशी जताई है और अपनी प्रतिक्रिया दी है। राहुल गांधी, कपिल सिब्बल, मल्लिकार्जुन खरगे समेत अन्य नेताओं की प्रतिक्रिया आई है।

By शिव मौर्या 
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नई दिल्ली। चुनावी बॉन्ड योजना की वैधता के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने आज बड़ा फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद विपक्ष के नेताओं ने खुशी जताई है और अपनी प्रतिक्रिया दी है। राहुल गांधी, कपिल सिब्बल, मल्लिकार्जुन खरगे समेत अन्य नेताओं की प्रतिक्रिया आई है।

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राहुल गांधी ने इस मामले पर कहा कि, नरेंद्र मोदी की भ्रष्ट नीतियों का एक और सबूत आपके सामने है। भाजपा ने इलेक्टोरल बॉण्ड को रिश्वत और कमीशन लेने का माध्यम बना दिया था। आज इस बात पर मुहर लग गई है।

वहीं, कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद कहा कि, इससे ​​हमें फंडिंग करने वालों और देश की राजनीति के बीच संबंध का पता चलेगा। कोई भी दस लाख या 15 लाख का चुनावी बांड नहीं देगा। यह करोड़ों में होगा। इसलिए यदि आपने अपनी राजनीतिक पार्टी को 5000 करोड़ से वित्त पोषित किया है तो आप केवल इसकी कल्पना कर सकते हैं अमीर लोग ऐसा कर सकते थे और इस प्रक्रिया में उन्हें कुछ अनुग्रह प्राप्त हुआ होगा… इसलिए मुझे लगता है कि एक तरह से यह लोकतंत्र में समान अवसर प्रदान करता है। और यह भाजपा को भी बेनकाब करता है। प्रधानमंत्री कहते रहते हैं कि कहां है घोटाला? कहां है घोटाला? अब कहां है मोदीजी, आपकी आंखों के सामने आपका घोटाला, ये सरकारी घोटाला।

वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि, चुनावी बॉन्ड योजना की लॉन्चिंग के दिन कांग्रेस पार्टी ने इसे अपारदर्शी और अलोकतांत्रिक बताया था. इसके बाद कांग्रेस पार्टी ने अपने 2019 के घोषणापत्र में मोदी सरकार की संदिग्ध योजना को खत्म करने का वादा किया। हम आज सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं, जिसने मोदी सरकार की इस ’काला धन रूपांतरण’ योजना को “असंवैधानिक“ बताते हुए रद्द कर दिया है।

इसके साथ ही कहा, हमें याद है कि कैसे मोदी सरकार, पीएमओ और एफएम ने बीजेपी का खजाना भरने के लिए हर संस्थान-आरबीआई, चुनाव आयोग, संसद और विपक्ष पर बुलडोजर चला दिया था। इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि इस योजना के तहत 95 प्रतिशत फंडिंग बीजेपी को मिली। हमें उम्मीद है कि मोदी सरकार भविष्य में ऐसे शरारती विचारों का सहारा लेना बंद कर देगी और सुप्रीम कोर्ट की बात सुनेगी, ताकि लोकतंत्र, पारदर्शिता और समान अवसर कायम रहे।

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