भारत ने अमेरिका के सामने घुटने टेक दिए हैं और क्या डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के साथ हुई ट्रेड डील देश के लिए एक बड़ा धोखा साबित हो रही है? बजट सत्र (Budget Session) के दौरान बुधवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने इन्हीं तीखे सवालों के साथ सदन के भीतर और बाहर सियासी हलचल तेज कर दी।
नई दिल्ली: भारत ने अमेरिका के सामने घुटने टेक दिए हैं और क्या डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के साथ हुई ट्रेड डील देश के लिए एक बड़ा धोखा साबित हो रही है? बजट सत्र (Budget Session) के दौरान बुधवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने इन्हीं तीखे सवालों के साथ सदन के भीतर और बाहर सियासी हलचल तेज कर दी। उन्होंने सरकार की विदेश नीति पर जोरदार हमला बोलते हुए कहा कि यह समझौता भारत के हितों के अनुरूप नहीं दिखता। राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने दावा किया कि यदि आज ‘इंडिया अलायंस’ (India Alliance) सत्ता में होता, तो राष्ट्रपति ट्रंप के साथ ऐसी डील की जाती कि पूरी दुनिया देखती रह जाती। अपने बयान में उन्होंने ‘भारतीय डेटा’ (Indian Data) को देश का सबसे बड़ा रणनीतिक हथियार बताया, जो किसी भी वैश्विक सौदे में भारत की ताकत बन सकता है।
6 गुना बढ़ा टैरिफ और सरकार की चुप्पी?
राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने अपनी स्पीच की शुरुआत आंकड़ों के वार से की। उन्होंने सरकार को घेरते हुए कहा कि जिस ट्रेड डील का ढोल पीटा जा रहा है, उसकी हकीकत कुछ और ही है। राहुल के मुताबिक, भारत पर पहले सिर्फ 3 फीसदी अमेरिकी टैरिफ लगता था, लेकिन इस नई डील के बाद यह बढ़कर 18 फीसदी पहुंच चुका है। यानी सीधे तौर पर 6 गुना की भारी बढ़ोतरी! हालांकि, इस डील के तहत अमेरिका ने पारस्परिक शुल्क को 25 फीसदी से घटाकर 18 प्रतिशत किया है और रूसी तेल की खरीद पर लगने वाले अतिरिक्त शुल्क को भी हटा दिया है, लेकिन राहुल गांधी (Rahul Gandhi) इसे भारत की हार मान रहे हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि सरकार ने देश के आर्थिक हितों की रक्षा करने के बजाय अमेरिका के सामने समर्पण कर दिया है।
ट्रंप को ऐसे घेरते राहुल गांधी
राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने एक बहुत ही आधुनिक और रणनीतिक पक्ष रखते हुए कहा कि आज के दौर में ‘डेटा’ ही असली ताकत है। उन्होंने दावा किया कि अगर इंडिया गठबंधन (India Alliance) ट्रंप के साथ बातचीत की मेज पर होता, तो वह भारतीय डेटा (Indian Data) को एक ‘एसेट’ की तरह इस्तेमाल करता। राहुल ने कहा, कि अगर हम राष्ट्रपति ट्रंप से बात कर रहे होते, तो हम उन्हें समझाते कि भारतीय डेटा (Indian Data) वह सबसे महत्वपूर्ण एसेट है जो अमेरिकी डॉलर (US Dollar) को गिरने से बचा सकती है और उसे प्रोटेक्ट कर सकती है। राहुल का मानना है कि अमेरिका को महाशक्ति बने रहने के लिए भारत के डेटा (Indian Data) की जरूरत है, और भारत ने बिना अपनी शर्तें मनवाए यह सब अमेरिका की झोली में डाल दिया।
सदन में बोलते हुए राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने उन तीन शर्तों का भी जिक्र किया, जो उनके मुताबिक एक बेहतर ट्रेड डील की बुनियाद होनी चाहिए थीं। राहुल ने कहा कि पहली शर्त यह होती कि ट्रंप भारत से बराबरी के स्तर पर बात करें, न कि हमें अपने अधीनस्थ समझें। दूसरी शर्त ऊर्जा सुरक्षा को लेकर होती, जिसमें भारत अपनी रक्षा खुद करता। और तीसरी सबसे महत्वपूर्ण शर्त थी- किसानों की रक्षा। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि इस डील ने विदेशी खिलाड़ियों के लिए भारत के गरीब किसानों को कुचलने के दरवाजे खोल दिए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की गलत नीतियों के कारण भारतीय कपड़ा उद्योग (Textile Industry) पहले ही बर्बाद हो चुका है।
क्या गरीब किसानों की बलि चढ़ा रही है सरकार?
राहुल गांधी (Rahul Gandhi) का सबसे बड़ा हमला किसानों और छोटे उद्योगों को लेकर था। उन्होंने कहा कि सरकार ने ट्रेड डील के नाम पर देश के करोड़ों मेहनतकश लोगों के भविष्य को खतरे में डाल दिया है। राहुल के मुताबिक, अगर अमेरिका को अपनी डॉलर की बादशाहत कायम रखनी है, तो उसे भारत की अहमियत समझनी होगी, लेकिन वर्तमान सरकार ने अपनी बारगेनिंग पावर (मोलभाव की शक्ति) खो दी है। राहुल का यह भाषण न केवल ट्रेड डील (Trade Deal) पर एक सवालिया निशान है, बल्कि 2026 के राजनीतिक समीकरणों में डेटा प्रोटेक्शन (Data Protection) और आर्थिक राष्ट्रवाद को एक बड़ा मुद्दा बनाने की कोशिश भी है।