आशियाना के कांशीराम स्मृति सांस्कृतिक उपवन (Kanshi Ram Memorial Cultural Park) में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संत-धर्माचार्य और समर्थक मौजूद रहे। इसके बाद उन्होंने सभा को संबोधित करते हुए प्रशासन और सरकार पर कई आरोप लगाए है। कहा कि उनके धर्मयुद्ध को मीडिया और प्रशासन मिलकर फ्लॉप दिखाने की कोशिश कर रहे हैं।
लखनऊ। ज्योर्तिमठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती (Shankaracharya Swami Avimukteswarananda Saraswati) ने यूपी की राजधानी लखनऊ में शंखनाद कर ‘गौ प्रतिष्ठार्थ धर्म युद्ध’ (Gau Pratisthartha Dharma Yudh) का शंखनाद कर दिया है। आशियाना के कांशीराम स्मृति सांस्कृतिक उपवन (Kanshi Ram Memorial Cultural Park) में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संत-धर्माचार्य और समर्थक मौजूद रहे। इसके बाद उन्होंने सभा को संबोधित करते हुए प्रशासन और सरकार पर कई आरोप लगाए है। कहा कि उनके धर्मयुद्ध को मीडिया और प्रशासन मिलकर फ्लॉप दिखाने की कोशिश कर रहे हैं।
बच्चा पैदा नहीं हुआ और मीडिया दिखा रही है सोनोग्राफी से उसकी फोटो
अविमुक्तेश्वरानंद ने भीड़ को लेकर उठ रहे सवालों पर कहा कि बच्चा पैदा नहीं हुआ और मीडिया सोनोग्राफी से उसकी फोटो दिखा रही है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि शराब की दुकान पर ज्यादा भीड़ होती है, जबकि दूध की शुद्ध दुकान पर कम भीड़ होती है। इसी तरह कम भीड़ का मतलब यह नहीं कि आंदोलन कमजोर है।
भाजपा अब हो गई है भागपा
उन्होंने कहा कि भाजपा अब भागपा हो गई है। अगर आप लोग पक्के गो-भक्त नहीं होते, तो इतनी रुकावट के बावजूद यहां आकर बैठे न होते। आप जितने भी लोग आए हैं, कार्यक्रम खत्म होने के बाद नाम नोट करके जाइएगा। क्योंकि, आप लोग इस कार्यक्रम के फाउंडर मेंबर होंगे। उन्होंने सभा में भाजपा छोड़ चुके लोगों से हाथ उठवाए। कहा कि कितने लोगों ने भाजपा छोड़ दी है, हाथ उठाएं। इसको हम रिकॉर्ड में लेना चाहते हैं।
समर्थकों से कहा कि आप लोग छोटी हथौड़ी की तरह हैं, लेकिन इसका असर बड़ा होगा
उन्होंने महाभारत का उदाहरण देते हुए कर्ण और अर्जुन के बाणों की तुलना की कहानी सुनाई और कहा कि कभी-कभी छोटा हथियार भी बड़ी चोट करता है। उन्होंने समर्थकों से कहा कि आप लोग छोटी हथौड़ी की तरह हैं, लेकिन इसका असर बड़ा होगा। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि उनके कार्यक्रम को रोकने की कोशिश की गई। उनके अनुसार पहले काशी के मठ में उन्हें घेरने की योजना बनी, फिर रास्ते में रोकने और लखनऊ में प्रवेश नहीं करने देने की बात कही गई। इसके बाद कार्यक्रम की अनुमति देने से पहले 16 शर्तें लगा दी गईं, जो बाद में 26 तक पहुंच गईं। उन्होंने कहा कि लोगों ने टिकट रद्द करा दिए, उसके बाद कार्यक्रम से करीब 24 घंटे पहले अनुमति दी गई।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोप लगाया कि नोटिस बैक डेट में दिया गया, जिसमें 10 मार्च को जारी नोटिस पर 9 मार्च की तारीख लिखी गई
उन्होंने यह भी कहा कि टेंट लगाने वालों को सूर्यास्त के बाद अंदर आने की अनुमति दी गई और जब रात में काम शुरू हुआ तो 10 बजे एक और नोटिस भेज दिया गया। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोप लगाया कि नोटिस बैक डेट में दिया गया, जिसमें 10 मार्च को जारी नोटिस पर 9 मार्च की तारीख लिखी गई थी। उन्होंने आगे कहा कि प्रशासन शंकराचार्य और गोभक्तों को फंसाने की तैयारी कर रहा है, लेकिन उन्हें ठोस गौभक्त और सनातन धर्म के प्रति समर्पित लोग ही चाहिए थे, जो उन्हें मिल गए हैं।
यह आंदोलन आगे बड़ा होगा
उन्होंने यह भी कहा कि जैसे गोमुख से निकलने वाली गंगा की धारा छोटी होती है लेकिन आगे जाकर सहस्त्रधारा बन जाती है, वैसे ही यह आंदोलन भी आगे चलकर बड़ा रूप लेगा। अपने संबोधन में उन्होंने सामाजिक और राजनीतिक संघर्ष का उदाहरण देते हुए कांशीराम का जिक्र किया और कहा कि उन्होंने झोला लेकर और साइकिल से घूम-घूमकर लोगों से संपर्क किया था। उसी समर्पण के कारण उनकी शिष्या मायावती ने प्रदेश में शासन किया।
सत्ता परिवर्तन के लिए समर्पण की जरूरत
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि सत्ता परिवर्तन के लिए उसी तरह के समर्पण की जरूरत है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य राजाओं का नहीं बल्कि प्रजा के कल्याण का है। कई सरकारी संत इस कार्यक्रम में नहीं आए, लेकिन उन्हें असरकारी संत चाहिए। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य, कबीरदास और गुरुनानक जैसे संतों का प्रभाव आज भी बना हुआ है और ऐसे संतों का असर पीढ़ियों तक रहता । आज से एक नया इतिहास शुरू हो रहा है. हम चाहते हैं कि आप लोग इसके संस्थापक बनें।