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बिहार वोटर वेरिफिकेशन केस में सुनवाई को सुप्रीम कोर्ट तैयार, कपिल सिब्बल की दलील पर सुनवाई 10 जुलाई को

बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections) से पहले विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) के तहत मतदाता सूची से लाखों नाम हटाए जाने की आशंका है। इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में कई याचिकाएं दायर की गई हैं। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court)  के वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने इस मामले पर तत्काल सुनवाई की मांग की, जिस पर कोर्ट गुरुवार को सुनवाई के लिए तैयार हो गया है।

By संतोष सिंह 
Updated Date

नई दिल्ली। बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections) से पहले विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) के तहत मतदाता सूची से लाखों नाम हटाए जाने की आशंका है। इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में कई याचिकाएं दायर की गई हैं। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court)  के वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल (Kapil Sibal) ने इस मामले पर तत्काल सुनवाई की मांग की, जिस पर कोर्ट गुरुवार को सुनवाई के लिए तैयार हो गया है। कपिल सिब्बल (Kapil Sibal) के साथ वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी, शादाब फरासत और गोपाल शंकरनारायणन ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court)  में इस मुद्दे का उल्लेख करते हुए कहा कि इस प्रक्रिया से लाखों लोगों, खासकर महिलाओं और गरीब तबके के लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने की आशंका है।

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कपिल सिब्बल (Kapil Sibal) ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में दलील दी कि चुनाव आयोग (Election Commission) का यह निर्णय न केवल समय के लिहाज से संवेदनशील है, बल्कि इसकी कानूनी वैधता भी संदेह के घेरे में है। इस पर कोर्ट ने पूछा कि बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections)  कब होने वाले हैं, जिसके जवाब में कहा गया कि चुनाव इसी साल के अंत में प्रस्तावित हैं। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court)  ने मामले की सुनवाई के लिए 10 जुलाई की तारीख तय की है।

RJD, टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा, ADR पहुंचे सुप्रीम कोर्ट

बिहार की मुख्य विपक्षी पार्टी आरजेडी, टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा, सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव और चुनाव सुधारों के लिए काम करने वाले संगठन एडीआर (Association for Democratic Reforms) ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का दरवाजा खटखटाया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग (Election Commission)  का यह फैसला लाखों गरीब, महिला और प्रवासी मतदाताओं को वोटिंग प्रक्रिया से बाहर कर सकता है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह फैसला मनमाना और असंवैधानिक है, जिससे मताधिकार से वंचित होने का खतरा है।

विपक्षी दलों के गठबंधन ने भी इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया था। साथ ही चुनाव आयोग (Election Commission)  से मुलाकात कर इस फैसले को वापस लेने की मांग की थी। हालांकि आयोग ने उनकी मांगों को ठुकरा दिया था और कहा था कि पुनरीक्षण प्रक्रिया चुनावी पारदर्शिता के लिए जरूरी है।

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गुरुवार को होगी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने इन याचिकाओं पर भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को कोई औपचारिक नोटिस जारी नहीं किया है। हालांकि कोर्ट गुरुवार को सुनवाई के लिए तैयार हो गया है। याचिकाकर्ताओं को निर्देश दिया गया है कि वे अपनी याचिकाओं की एडवांस कॉपियां निर्वाचन आयोग और केंद्र सरकार को सौंपें ताकि संबंधित पक्ष सुनवाई के लिए पूरी तैयारी के साथ उपस्थित हो सकें।

जानें चुनाव आयोग ने क्या कहा?

इस बीच वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision)  अभियान को लेकर निर्वाचन आयोग ने 11 दस्तावेजों की लिस्ट जारी की है, जिनमें से कोई एक दस्तावेज बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) को देना है। बिहार प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि वोट करना है तो फॉर्म भरना है। बिहार विशेष गहन पुनरीक्षण 2025 में अब सिर्फ 11 दस्तावेजों में से कोई भी 1 लगाएं। गणना फॉर्म भरकर मतदाता सूची में शामिल हों। क्यूआर कोड स्कैन करें और फॉर्म ऑनलाइन भरें।

बिहार पीआईबी ने ‘एक्स’ पर एक वीडियो भी साझा किया है, जिसमें कहा गया है कि लोगों को सोचने से तो रोक नहीं सकते हैं, लेकिन लोगों की सोच बदलने की कोशिश जरूर कर सकते हैं। तो सोच बदलिए, भ्रम छोड़िए। 11 दस्तावेजों में से कोई एक दस्तावेज अपने बीएलओ को दीजिए। बिहार पीआईबी ने मतदाताओं के लिए हेल्पलाइन नंबर 1950 भी जारी किया है, जिस पर कॉल करके वोटर दस्तावेजों से संबंधित अधिक जानकारी भी प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही क्यूआर स्कैन करके ऑनलाइन आवेदन की सुविधा भी प्रदान की गई है।

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विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision)  के लिए महत्वपूर्ण तिथियां भी बताई गई हैं। हाउस टू हाउस सर्वेक्षण (House to house survey) 25 जून से लेकर 26 जुलाई तक होगा। मतदाता सूची का प्रारुप (ड्राफ्ट) प्रकाशन 1 अगस्त को होगा। दावे और आपत्तियों की अवधि 1 अगस्त से लेकर 1 सितंबर तक निर्धारित की गई है। अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 30 सितंबर को होगा।

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