Gwalior : प्रयागराज माघ मेले में मौनी अमावस्या पर स्नान के लिए जा रहे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की शोभायात्रा को रोकने का विवाद बढ़ता जा रहा है। इस मामले में मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस भेजकर उनके नाम के आगे शंकराचार्य लिखने पर जवाब मांगा था। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए आध्यात्मिक गुरु जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने प्रशासन का बचाव किया है।
Gwalior : प्रयागराज माघ मेले में मौनी अमावस्या पर स्नान के लिए जा रहे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की शोभायात्रा को रोकने का विवाद बढ़ता जा रहा है। इस मामले में मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस भेजकर उनके नाम के आगे शंकराचार्य लिखने पर जवाब मांगा था। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए आध्यात्मिक गुरु जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने प्रशासन का बचाव किया है।
संगम घाट पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद शंकराचार्य की अधिकारियों के साथ झड़प पर आध्यात्मिक गुरु जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, “उनके (स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद) साथ अन्याय नहीं हुआ, बल्कि उन्होंने अन्याय किया है। मैं जगद्गुरु हूं, और वह अभी तक जगद्गुरु भी नहीं हैं। यहां के नियम कहते हैं कि कोई भी जुलूस निकालकर गंगा में नहीं जा सकता। जब पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की, तो उनसे कहा गया कि वे पैदल संगम तक जाएँ; उन्होंने खुद ही गलती की।”
Gwalior, Madhya Pradesh: On Swami Avimukteshwaranand Shankaracharya's scuffle with authorities at the Sangam Ghat, Jagadguru Rambhadracharya says, "The injustice was not done to him; he committed the injustice himself… I am Jagadguru, and he is not even Jagadguru yet. The rules… pic.twitter.com/BTfSXDZh7E
— IANS (@ians_india) January 21, 2026
शंकराचार्य ने नोटिस का दिया जवाब
मेला प्राधिकरण ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस भेजकर 24 घंटे में जवाब मांगा था कि सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद नाम के आगे शंकराचार्य क्यों लगाया? जिसके जवाब में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने वकील अंजनी कुमार मिश्रा ने प्राधिकरण को लीगल नोटिस भेजा, मिश्रा सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील हैं। स्वामी अविमुक्तश्वेरानंद की ओर से भेजे गए नोटिस में सुप्रीम कोर्ट द्वारा ज्योतिष पीठ का शंकराचार्य लिखने पर रोक के दावे को खारिज किया गया है। 8 पेज के इस लीगल नोटिस में प्राधिकरण को अपना पत्र वापस लेने की चेतावनी दी गयी है। साथ ही शंकराचार्य को बदनाम करने का आरोप लगाया है।