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देश के मुख्य न्यायाधीश नहीं, बल्कि हमारे संविधान, न्याय व्यवस्था और कानून के शासन पर है हमला : प्रियंका गांधी

कांग्रेस महासचिव व वायनाड लोकसभा सीट से सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा (Congress General Secretary and MP from Wayanad Lok Sabha seat Priyanka Gandhi Vadra) ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई (Chief Justice of India Justice BR Gavai) पर हमले की कोशिश अत्यंत शर्मनाक, दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है।

By santosh singh 
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नई दिल्ली। कांग्रेस महासचिव व वायनाड लोकसभा सीट से सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा (Congress General Secretary and MP from Wayanad Lok Sabha seat Priyanka Gandhi Vadra) ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई (Chief Justice of India Justice BR Gavai) पर हमले की कोशिश अत्यंत शर्मनाक, दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ देश के मुख्य न्यायाधीश पर नहीं, बल्कि हमारे संविधान, संपूर्ण न्याय व्यवस्था और कानून के शासन पर हमला है।

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प्रियंका गांधी ने कहा कि मुख्य न्यायाधीश ने अपनी मेहनत, लगन और योग्यता के दम पर समाज के सारे बंधनों को तोड़कर सर्वोच्च न्यायिक पद हासिल किया है। उन पर इस तरह का हमला न्यायपालिका और लोकतंत्र दोनों के लिए घातक है। इसकी जितनी निंदा की जाए, कम है।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में सोमवार को एक ‘वकील’ ने मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई (Chief Justice of India Justice BR Gavai) पर हमला करने की कोशिश की। वह मंच के पास गया और अपना जूता निकालकर जज पर फेंकने की कोशिश की, लेकिन अदालत में मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने ऐन मौके पर हस्तक्षेप किया और आरोपी ‘वकील’ को बाहर निकाला। बाहर निकलते हुए वकील को यह कहते सुना गया, कि हम सनातन का अपमान नहीं सहेंगे (Sanatan Ka Apman Nahi Sahenge)। इस दौरान जस्टिस गवई पूरी तरह शांत रहे।

मुख्य न्यायाधीश (CJI) इस घटना से अविचलित रहे। उन्होंने अदालत में मौजूद वकीलों से अपनी दलीलें जारी रखने को कहा। उन्होंने कहा कि इस सब से विचलित न हों। हम विचलित नहीं हैं। ये बातें मुझे प्रभावित नहीं करतीं।

आरोपी वकील से हो रही पूछताछ

आरोपी वकील राकेश किशोर को कोर्ट स्टाफ ने पकड़ लिया और पुलिस को सौंप दिया। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में नई दिल्ली जिले के DCP देवेश माहला के साथ सुप्रीम कोर्ट सिक्योरिटी के DCP जितेंद्र मनी भी मौजूद हैं। आरोपी वकील से पूछताछ की जा रही है।

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सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में सोमवार को एक चौंकाने वाली घटना हुई। यहां सुनवाई के दौरान एक वकील ने भारत के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई पर जूता उछालने की कोशिश की। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस शख्स ने कोर्ट के अंदर नारेबाजी भी की। बाद में कोर्ट में मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने उसे बाहर निकाला। इससे कुछ देर के लिए कोर्ट की कार्यवाही बाधित रही।

लाइव लॉ वेबसाइट (Live Law website) के मुताबिक, अदालत में मौजूद लोगों ने बताया कि पकड़े गए शख्स ने नारे लगाए- सनातन धर्म का अपमान, नहीं सहेगा हिंदुस्तान। कुछ प्रत्यक्षदर्शियों ने वेबसाइट को बताया कि व्यक्ति ने सीजेआई (CJI) पर जूता फेंकने की कोशिश की थी, वहीं कुछ और ने कहा कि चीफ जस्टिस पर कागज का रोल फेंका गया। इस व्यक्ति के वकील की वेशभूषा में होने का भी दावा किया गया है।

दूसरी तरफ कानूनी मामलों से जुड़ी वेबसाइट बार एंड बेंच ने सूत्रों के हवाले से दावा किया कि जब सीजेआई की अध्यक्षता वाली बेंच वकीलों से केस के बारे में सुन रही थी, तभी एक वकील दौड़ता हुआ आगे आया और अपना चीफ जस्टिस पर हमले के लिए पैर से जूता निकालने की कोशिश करने लगा। हालांकि, लगभग तुरंत ही सुरक्षाकर्मियों ने उसे पकड़ लिया और कोर्ट से बाहर कर दिया। मुख्य न्यायाधीश ने इस घटना के बाद कहा कि उन्हें इन घटनाओं से फर्क नहीं पड़ता। इसके बाद उन्होंने कार्यवाही जारी रखने की बात कही। बताया गया है कि सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में जांच बिठा दी है। वकील की तरफ से इस घटना को अंजाम दिए जाने पर भी पूछताछ जारी है।

भगवान पर टिप्पणी को लेकर सोशल मीडिया पर जताई गई थी नाराजगी

गौरतलब है कि खजुराहो के जवारी मंदिर में भगवान विष्णु की मूर्ति स्थापित करने वाली याचिका खारिज करने और सुनवाई के दौरान दिए गए बयानों को लेकर सीजेआई बीआर गवई का सोशल मीडिया पर काफी विरोध हुआ था। तब मुख्य न्यायाधीश ने इन टिप्पणियों का संज्ञान लेते हुए कहा था- ‘किसी ने मुझे बताया कि मैंने जो टिप्पणियां की थीं, उन्हें सोशल मीडिया पर वायरल किया गया है। मैं सभी धर्मों का सम्मान करता हूं।’

सोचिए, अगर अदालत में ये हद पार हो सकती है तो आम जनता की सुरक्षा का क्या?

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इस घटना पर लोगों ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की सबसे बड़ी बेंच पर जूता फेंकने की कोशिश करना केवल CJI BR गवई का अपमान नहीं, बल्कि कानून की पूरी इज्जत को ठेस पहुंचाना है। सोचिए, अगर अदालत में ये हद पार हो सकती है तो आम जनता की सुरक्षा का क्या? ऐसे मामलों में केवल सख्त सज़ा ही नहीं, बल्कि समाज को भी जागना होगा लोकतंत्र की रक्षा सबकी जिम्मेदारी है।

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