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ये हिंदुओं का देश है, हम इसके लिए तैयार नहीं कि हमारी गौ माता को काटकर डॉलर के लिए बेचा जाए : शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद

ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती (Shankaracharya Swami Avimukteshwaranand Saraswati of Jyotirmath) ने गौ माता की रक्षा के ‘धर्मयुद्ध यात्रा’ शुरू करने को लेकर बड़ा बयान दिया है। इस दौरान उन्होंने संतों की भूमिका पर भी बड़ा सवाल किया।

By संतोष सिंह 
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अंबेडकरनगर। ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती (Shankaracharya Swami Avimukteshwaranand Saraswati of Jyotirmath) ने गौ माता की रक्षा के ‘धर्मयुद्ध यात्रा’ शुरू करने को लेकर बड़ा बयान दिया है। इस दौरान उन्होंने संतों की भूमिका पर भी बड़ा सवाल किया। साथ ही उन्होंने कहा कि हमने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Chief Minister Yogi Adityanath) को 40 दिन का समय दिया था, जो कोई गड़बडी हो तो 40 दिन में सुधार लीजिए, लेकिन उन्होंने उस 40 दिनों का उपयोग गौ-माता (Gau Mata) की रक्षा के लिए नहीं किया, इसीलिए ये युद्ध हमको शुरू करना पड़ा है।

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आगे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद (Shankaracharya Avimukteshwaranand) ने कहा कि गौमाता की रक्षा इस देश के सभी नेता को करनी ही पड़ेगी। चाहे फिर वह किसी भी पार्टी का नेता क्यों न हो? ये हिंदुओं का देश है, हम हिंदू इसके लिए तैयार नहीं हैं कि हमारी ही माता को काट-काटकर डॉलर के लिए बेचा जाए।

अगर साधु संत में सरकार के स्वर में स्वर मिलाने लगेंगे तो जनता का क्या होगा? सरकारी संतों से सनातन धर्म के लोगों को उम्मीद नहीं

आगे उन्होंने कहा कि इस समय देश में संत 2 तरह के हो गए हैं। एक सरकारी और दूसरा असरकारी। हम असरकारी संतों में अपने आप को रखना चाहते हैं। सरकारी संतों में नहीं रखना चाहते। सरकारी संतों से भला नहीं होने वाला है। सरकारी संत अन्याय और अत्याचार होता देख रहे हैं, लेकिन उसके बाद भी नहीं बोल रहे हैं। उसके बाद भी उनके मुंह से सत्ता के पक्ष में बात निकलती है। अगर साधु संत में सरकार के स्वर में स्वर मिलाने लगेंगे तो जनता का क्या होगा? सरकारी संतों से सनातन धर्म के लोगों को उम्मीद नहीं है। असहकारी संतों से उम्मीद है।

यूजीसी संशोधन पर उठाए सवाल

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अविमुक्तेश्वरानंद ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) में किए गए संशोधन पर सवाल भी खड़े किए। उनका कहना था कि नए नियमों के तहत कुछ वर्गों की शिकायत की सीधे को सही मान लिया जाएगा और आरोपी को खुद को निर्दोष साबित करना पड़ेगा। उन्होंने इसे न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ बताया और कहा कि इससे शिक्षा व्यवस्था पर भी असर पड़ेगा।

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