सनातन धर्म में भगवान शिव की उपासना का विशेष महत्व बताया गया है। प्रदोष व्रत प्रत्येक माह के त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है।
Vaishakh Budh Pradosh Vrat : सनातन धर्म में भगवान शिव की उपासना का विशेष महत्व बताया गया है। प्रदोष व्रत प्रत्येक माह के त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। इस साल वैशाख मास के कृष्ण पक्ष का प्रदोष व्रत 15 अप्रैल को मनाया जाएगा। प्रदोष के दिन सूर्योदय और सूर्यास्त से ठीक पहले का समय शुभ माना जाता है। मान्यता है इस समय की गई सभी प्रार्थनाएं और पूजा बहुत फलित होती हैं। मान्यता है कि प्रदोष व्रत रखकर विधि विधान से भगवान शिव और माता पार्वती की अराधना से हर मनोकामना पूरी हो जाती है। आइए जानते हैं इस दिन क्या उपाय करें।
रुका हुआ धन भी प्राप्त हो जाता है
बुध प्रदोष व्रत पर प्रदोष काल में भगवान शिव का रुद्राभिषेक करें। भगवान शिव का चंदन और सुंगधित फूलों से श्रंगार करें। महादेव को 11 बेलपत्र और हरी मूंग की दाल चढ़ाएं। ऊं नमः शिवाय मंत्र का जाप करें। इस उपाय को करने से धन से जुड़ी समस्याएं समाप्त होती है। अनेक माध्यम से धन प्राप्ति होती है। रूका हुआ धन भी प्राप्त हो जाता है।
महादेव का अभिषेक गन्ने के रस की धारा से करें
महादेव का अभिषेक गन्ने के रस की धारा से करें। माता पार्वती को सुहाग वस्तुएं चढ़ाएं। पूजा के बाद ऊं पार्वतीपतये नमः मंत्र का जाप करें। इस उपाय को करने से विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।
मंत्रों का जाप
“ॐ श्री महादेवायै नमः”
“ॐ श्री पार्वती देवयै नमः”
पूजा के अंत में देवी पार्वती की आरती गाएं।
भगवान शिव की आराधना
इस दिन की पूजा से शनि के द्वारा उत्पन्न कष्टों का निवारण होता है और व्यक्ति को मानसिक, शारीरिक तथा आर्थिक समृद्धि की प्राप्ति होती है। इसके अतिरिक्त, भगवान शिव की आराधना से सभी प्रकार के संकटों का समाधान होता है।