समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने एक बार फिर भाजपा सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि मानवता की रक्षा है सामूहिक ज़िम्मेदारी, जब भेदभाव के शूल का चुभना रहे जारी। अपमानों का बने निशाना दुखी मां-नारी, युवाओं के सपनों पर तलवार चले दुधारी, जब सत्ता करे अत्याचार वंचितों पर भारी, तब तू उठा त्रिशूल और बन सुदर्शनधारी।
लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने एक बार फिर भाजपा सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि मानवता की रक्षा है सामूहिक ज़िम्मेदारी, जब भेदभाव के शूल का चुभना रहे जारी। अपमानों का बने निशाना दुखी मां-नारी, युवाओं के सपनों पर तलवार चले दुधारी, जब सत्ता करे अत्याचार वंचितों पर भारी, तब तू उठा त्रिशूल और बन सुदर्शनधारी।
मानवता की रक्षा है सामूहिक ज़िम्मेदारी
जब भेदभाव के शूल का चुभना रहे जारी
अपमानों का बने निशाना दुखी माँ-नारी
युवाओं के सपनों पर तलवार चले दुधारी
जब सत्ता करे अत्याचार वंचितों पर भारी
तब तू उठा त्रिशूल और बन सुदर्शनधारी! https://t.co/XwwR9e7jd1— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) October 9, 2026
आज अयोध्या की पावन धरती पर कलियुग के ताप को हरकर इहलोक को संवारने वाली और परलोक को सुधारने वाली ‘भागवतकथा’ का अमृतपान करने के सौभाग्यशाली क्षण।
बचपन में किसी ने बताया था कि ‘जो भव के बंधन से मुक्त कराए वही भागवत।’ और ‘जो व्यथा हरे, वही कथा’। आज का समय क्योंकि बंधनों और व्यथाओं से भरा है – अहंकार के बंधन, सत्ता के बंधन, जाति के बंधन, भेदभाव के बंधन, वैमनस्य के बंधन, ऊँच-नीच के बंधन, छुआछूत के बंधन, शुद्धि-अशुद्धि के बंधन और भी अनेक प्रकार के सामाजिक और मानसिक बंधन, इसीलिए भागवतकथा का महत्व और प्रासंगिकता आज और भी बढ़ गई है।
कथा सिर्फ कहानी नहीं होती जो मनोरंजन करती है, कथा तो ‘मनोवर्द्धन’ करती है। कहानी मन को बहलाती है, कथा मन और मनोबल को बड़ा बनाती है। कहानी के अंत होने पर आनंद का क्षणिक अनुभव होता है, जबकि कथा खत्म होने पर उत्तरदायित्व की अमिट गहरी अनुभूति होती है। कथा के मूल संदेश को जीवन में उतारने से ही कथा सुनने का पुण्य प्राप्त होता है।
भागवतकथा इसीलिए कथा है, कहानी नहीं। वो सिर्फ कृष्ण जी के बारे में नहीं बताती, वो हमें कृष्ण जी जैसा बनने के लिए हमें प्रेरित करती है। भागवतकथा वाचन-श्रवण से बढ़कर, व्यक्तिगत प्रेम और सामाजिक समानता का संविधान है।