वैदिक पंचांग के अनुसार भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को अनंत चतुर्दशी मनाई जाती है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने का विधान है। अनंत चतुर्दशी पर अनंत भगवान की पूजा करके संकटों से रक्षा करने वाला अनंत सूत्र बांधा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत-पूजा करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है। इसके साथ ही, यह दिन 10 दिनों से चले आ रहे भव्य गणेशोत्सव के समापन (गणेश विसर्जन) का भी प्रतीक है। साथ ही अनंत चतुर्दशी पर 14 गांठों वाला अनंत सूत्र बांधने का भी विधान है।
Anant Chaturdashi 2026 : वैदिक पंचांग के अनुसार भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को अनंत चतुर्दशी मनाई जाती है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने का विधान है। अनंत चतुर्दशी पर अनंत भगवान की पूजा करके संकटों से रक्षा करने वाला अनंत सूत्र बांधा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत-पूजा करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है। इसके साथ ही, यह दिन 10 दिनों से चले आ रहे भव्य गणेशोत्सव के समापन (गणेश विसर्जन) का भी प्रतीक है। साथ ही अनंत चतुर्दशी पर 14 गांठों वाला अनंत सूत्र बांधने का भी विधान है।
चतुर्दशी तिथि का प्रारंभ: 24 सितंबर 2026 को रात 11:18 बजे से
चतुर्दशी तिथि का समापन: 25 सितंबर 2026 को रात 11:06 बजे तक
उदयातिथि के अनुसार व्रत: चूंकि सनातन धर्म में त्योहार उदयातिथि से मान्य होते हैं, इसलिए मुख्य व्रत और पूजा 25 सितंबर 2026 को ही की जाएगी।
पूजा के दौरान सूती या रेशमी धागे में 14 गांठें लगाई जाती हैं, जिन्हें 14 लोकों (भूर्भुवः स्वः आदि) का प्रतीक माना जाता है। इसे पुरुष अपने दाएं हाथ और महिलाएं बाएं हाथ में धारण करती हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब पांडव जुए में अपना सब कुछ हारकर वन-वन भटक रहे थे, तब भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को दुख दूर करने के लिए भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी का यह अनंत व्रत रखने की सलाह दी थी। इस व्रत के प्रभाव से पांडवों को अपना खोया हुआ राजपाठ और वैभव वापस मिल गया था।