Case of atrocities against Dalits in Una : साल 2016 का ऊना कांड एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर रख दिया था, जब गुजरात के गिर सोमनाथ जिले के ऊना तहसील स्थित मोटा समाधियाला गांव में दलितों पर अत्याचार किया गया था। जिसके खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन हुए थे। अब इस मामले में बसपा सुप्रीमो मायावती ने गुजरात की भाजपा सरकार से दोषियों को सजा दिलवाने के लिए दलित परिवारों की मदद करने की अपील की है।
Case of atrocities against Dalits in Una : साल 2016 का ऊना कांड एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर रख दिया था, जब गुजरात के गिर सोमनाथ जिले के ऊना तहसील स्थित मोटा समाधियाला गांव में दलितों पर अत्याचार किया गया था। जिसके खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन हुए थे। अब इस मामले में बसपा सुप्रीमो मायावती ने गुजरात की भाजपा सरकार से दोषियों को सजा दिलवाने के लिए दलित परिवारों की मदद करने की अपील की है।
दरअसल, 1 जुलाई 2016 को गुजरात के गिर सोमनाथ जिले के ऊना तहसील स्थित मोटा समाधियाला गांव में कथित गौरक्षकों ने मृत गाय की खाल उतार रहे चार दलित युवकों को पीटकर गाड़ी से बांधा और अर्धनग्न कर घुमाया था, इस मामले में गुजरात की एक कोर्ट ने मार्च में 35 लोगों को बरी कर दिया था। जिन पर गायों को मारने का झूठा आरोप लगाकर चार दलितों को नंगा करने और कोड़े मारने का आरोप लगा था। एक रिपोर्ट के अनुसार ऊना कांड के पीड़ितों में से वशराम सरवैया अपने करीबियों से पैसे की मदद मांग रहा है ताकि वह हाई कोर्ट में अपनी अपील कर सके। जिस पर बसपा सुप्रीमो मायावती की प्रतिक्रिया सामने आयी है।
1. गुजरात राज्य के ज़िला गिर सोमनाथ के ऊना में सन् 2016 में हुये दलितों पर जघन्य अन्याय-अत्याचार काण्ड के लगभग सभी अभियुक्तों को मार्च में स्थानीय कोर्ट द्वारा बरी करने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देकर न्याय पाने के लिये पीड़ित दलित परिवारों को वित्तीय आदि का भारी चुनौतियों…
— Mayawati (@Mayawati) August 7, 2026
मायावती ने एक्स पोस्ट में लिखा, “गुजरात राज्य के ज़िला गिर सोमनाथ के ऊना में सन् 2016 में हुये दलितों पर जघन्य अन्याय-अत्याचार काण्ड के लगभग सभी अभियुक्तों को मार्च में स्थानीय कोर्ट द्वारा बरी करने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देकर न्याय पाने के लिये पीड़ित दलित परिवारों को वित्तीय आदि का भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसी विचलित करने वाली कड़वी सच्चाई से ख़ासकर ’बहुजन समाज’ के लोगों में भारी चिन्ता व्याप्त है।” उन्होंने कहा, “इसको लेकर मेरी चिन्ता का विशेष कारण यह भी है कि इस काण्ड के पीड़ितों से मिलने मैं खु़द भी वहाँ गयी थी और वहाँ सच्चाई का पूरा पता करने के बाद राज्य सरकार से सभी दोषियों के विरुद्ध सख़्त कार्रवाई करने की माँग की थी, किन्तु देश भर में इसके ख़िलाफ रोष व आक्रोश आदि होने के बावजूद 40 में से 35 आरोपी के मार्च महीने में बरी हो जाने की ख़बर कुछ और नहीं बल्कि दलितों के प्रति सरकारी द्वेष, उनके हित व सुरक्षा के प्रति लापरवाही व उदासीनता आदि का ही परिणाम ज़्यादा लगता है।”
यूपी की पूर्व सीएम मायावती ने कहा, “वैसे अभी भी मौक़ा है जब गुजरात सरकार अपनी इस ग़लती में सुधार करते हुये इस मामले की हाईकोर्ट में उचित पैरवी करके सभी दोषियों को सख़्त सज़ा दिलवाये ताकि पीड़ित परिवारों को न्याय मिल सके और दूसरों को सबक। साथ ही, राज्य सरकार पीड़ित परिवार वालों के संतोष के मुताबिक वकील सरकारी ख़र्च पर उसी तरह मुहैया कराये, जिस प्रकार बी.एस.पी. की यूपी में मेरी रही सरकार ने ग़रीबों के लिये फ्री में क़ानूनी सहायता का क़ानूनी प्रावधान किया था।”