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Badlapur Encounter : बॉम्बे हाई कोर्ट ने उठाए सवाल, कहा-पहली नजर में गड़बड़ी दिख रही है, इसे एनकाउंटर नहीं कह सकते

महाराष्ट्र के बदलापुर स्कूल यौन उत्पीड़न (Badlapur School Sexual Harassment) मामले के आरोपी अक्षय शिंदे(Akshay Shinde)  का एनकाउंटर किया गया है। इस एनकाउंटर के खिलाफ अक्षय के पिता ने बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court) में एक याचिका दाखिल की है, जिस पर बुधवार को सुनवाई हो रही है। हाई कोर्ट ने एनकाउंटर पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें गड़बड़ी दिखाई दे रही है।

By संतोष सिंह 
Updated Date

मुंबई। महाराष्ट्र के बदलापुर स्कूल यौन उत्पीड़न (Badlapur School Sexual Harassment) मामले के आरोपी अक्षय शिंदे(Akshay Shinde)  का एनकाउंटर किया गया है। इस एनकाउंटर के खिलाफ अक्षय के पिता ने बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court) में एक याचिका दाखिल की है, जिस पर बुधवार को सुनवाई हो रही है। हाई कोर्ट ने एनकाउंटर पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें गड़बड़ी दिखाई दे रही है।

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अक्षय शिंदे (Akshay Shinde) की ओर से पेश हुए वकील अमित कटरनावारे (Amit Katarnaware)  ने कोर्ट से कहा है कि अक्षय शिंदे (Akshay Shinde)  को तलोजा जेल से कस्टडी में लेते समय और घटना के समय सभी दुकानों की सीसीटीवी तुरंत सुरक्षित रखी जाए। अक्षय शिंदे से जेल में उनके परिवार से मुलाकात हुई थी। उन्होंने कहा कि घटना की तारीख को उसने अपने माता-पिता से बातचीत की और पूछा कि उसे जमानत कब मिलेगी? मेरा मामला यह है कि वह कुछ भी करने की मानसिक स्थिति में नहीं था, जैसा कि पुलिस ने दावा किया है कि उसने पिस्तौल छीन ली और अधिकारियों पर गोली चला दी।

अमित कटरनावारे (Amit Katarnaware) ने कोर्ट को बताया कि अक्षय ने माता-पिता से 500 रुपए मांगे थे, ताकि वह कैंटीन की सुविधा ले सके, जो कुछ उसे खाना होता है। वह भागने की स्थिति में नहीं था और न ही उसके पास पुलिस अधिकारी से पिस्तौल छीनने की शारीरिक क्षमता थी। आगामी चुनावों के मद्देनजर अक्षय की हत्या की गई है।

अक्षय शिंदे (Akshay Shinde) के पिता के वकील ने कहा कि यह स्पष्ट है कि वह फर्जी मुठभेड़ की जांच की मांग कर रहे हैं। सीआईडी ​​या किसी अन्य पुलिस स्टेशन में वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा स्वतंत्र जांच की जानी चाहिए, जैसा कि कानून के तहत किया जाना आवश्यक है। हाई कोर्ट को एसआईटी के गठन के लिए निर्देश देने का अधिकार है। पुलिस ने धारा 307 के तहत आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की, लेकिन एफआईआर दर्ज करने के लिए पिता की शिकायत अभी भी लंबित है।

उन्होंने कहा कि एसआईटी (SIT) पीड़ित को न्याय दिलाने में विफल रही है। इसलिए दोनों की जांच एक साथ होनी चाहिए। महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश वकील ने कोर्ट में कहा कि सीआईडी ने पहले ही जांच शुरू कर दी है। एक मामला 307 के तहत दर्ज है और दूसरा एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट (ADR) दर्ज है।

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