जबलपुर के बरगी बांध हादसे ने एक पूरे परिवार की खुशियां छीन लीं। इस दर्दनाक त्रासदी में मसीह परिवार की तीन पीढ़ियों से जुड़े तीन सदस्य-मधुर मसीह, उनकी बेटी मैरिना और चार वर्षीय नाती त्रिशान-हमेशा के लिए बिछड़ गए। शनिवार को जब तीनों के शव एम्बुलेंस से मायापुरी स्थित खजान बस्ती की तंग गलियों में पहुंचे, तो वहां मौजूद हर आंख नम हो गई
New Delhi: जबलपुर के बरगी बांध हादसे ने एक पूरे परिवार की खुशियां छीन लीं। इस दर्दनाक त्रासदी में मसीह परिवार की तीन पीढ़ियों से जुड़े तीन सदस्य-मधुर मसीह, उनकी बेटी मैरिना और चार वर्षीय नाती त्रिशान-हमेशा के लिए बिछड़ गए। शनिवार को जब तीनों के शव एम्बुलेंस से मायापुरी स्थित खजान बस्ती की तंग गलियों में पहुंचे, तो वहां मौजूद हर आंख नम हो गई।
इस हादसे की सबसे मार्मिक तस्वीर वह थी, जिसने हर किसी का दिल चीर दिया। बताया गया कि जब नाव हादसे के दौरान पानी में डूब रही थी, तब भी मां मैरिना ने अपने चार साल के बेटे त्रिशान को अपनी छाती से कसकर चिपका रखा था। तेज लहरें, मौत का डर और अंतिम संघर्ष-कुछ भी मां की ममता की पकड़ को ढीला नहीं कर सका। मां ने आखिरी सांस तक अपने बेटे को खुद से अलग नहीं होने दिया।
यह दृश्य जिसने भी सुना, उसकी रूह कांप उठी। परिवार ने भी तय किया कि जिस मां ने मौत के आखिरी पल तक अपने बेटे का साथ नहीं छोड़ा, उसे विदाई भी उसी तरह दी जाएगी। इसलिए द्वारका ईसाई कब्रिस्तान में मां और बेटे को एक ही कब्र में दफनाया गया, ताकि अनंत यात्रा में भी बेटा अपनी मां की गोद में सुरक्षित रह सके।
दफन के दौरान पादरी की प्रार्थना और धार्मिक रीति-रिवाजों के बीच जब परिजनों ने कांपते हाथों से ताबूतों पर मिट्टी डाली, तो पूरा कब्रिस्तान सिसकियों से गूंज उठा। वहां मौजूद हर शख्स की आंखों में सिर्फ आंसू थे और दिल में एक ही सवाल-इतना बड़ा दुख आखिर इस परिवार ने क्यों झेला।
हादसे में परिवार के मुखिया जूलियस मसीह, दामाद प्रदीप और मासूम सिया जीवित बच गए, लेकिन अपनी आंखों के सामने अपनों को डूबते देखने का दर्द उन्हें भीतर तक तोड़ चुका है। वे किसी से बात करने की स्थिति में नहीं हैं। पूरे परिवार पर जैसे दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
हर जुबान पर बस यही दुआ थी-ईश्वर ऐसा वज्रपात किसी दुश्मन पर भी न करे। बरगी बांध का यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि एक ऐसी टीस बन गया है, जिसे शहर लंबे समय तक भूल नहीं पाएगा।