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जबलपुर क्रूज त्रासदी में लाइफ जैकेट से क्यों नहीं बच पायी जान? सवालों के घेरे में मध्य-प्रदेश पर्यटन विभाग

Who is responsible for the Jabalpur tragedy? जबलपुर के बरगी बांध में हुए भीषण क्रूज त्रासदी लापता सभी लोगों के शव बरामद कर लिए गए हैं। रविवार को अंतिम लापता शख्स कामराज का शव भी बरामद किया गया। लेकिन, इस घटना ने कई तरह से सवाल खड़े किए हैं। जिनके जवाब शायद मोहन यादव सरकार और पर्यटन विभाग के पास भी नहीं है। दरअसल, डूबकर मरने वालों में वो लोग भी शामिल हैं, जिन्होंने लाइफ जैकेट पहन रखी थी। एक तस्वीर जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। जिसमें एक मासूम बच्चा अपनी मां चिपका हुआ है और दोनों स्थिर पड़े हुए हैं। तस्वीर में दिख रहा है कि उन्होंने लाइफ जैकेट पहन रखी है, लेकिन फिर भी उनकी जिंदगी नहीं बच पाई।

By Abhimanyu 
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Who is responsible for the Jabalpur tragedy? जबलपुर के बरगी बांध में हुए भीषण क्रूज त्रासदी लापता सभी लोगों के शव बरामद कर लिए गए हैं। रविवार को अंतिम लापता शख्स कामराज का शव भी बरामद किया गया। लेकिन, इस घटना ने कई तरह से सवाल खड़े किए हैं। जिनके जवाब शायद मोहन यादव सरकार और पर्यटन विभाग के पास भी नहीं है। दरअसल, डूबकर मरने वालों में वो लोग भी शामिल हैं, जिन्होंने लाइफ जैकेट पहन रखी थी। एक तस्वीर जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। जिसमें एक मासूम बच्चा अपनी मां चिपका हुआ है और दोनों स्थिर पड़े हुए हैं। तस्वीर में दिख रहा है कि उन्होंने लाइफ जैकेट पहन रखी है, लेकिन फिर भी उनकी जिंदगी नहीं बच पाई।

पढ़ें :- Video- क्रूज में पानी भरने लगा, तो स्टाफ ने बांटी लाइफ जैकेट, किसकी लापरवाही से हुआ जबलपुर क्रूज हादसा?

क्या लाइफ जैकेट की गुणवत्ता की हुई थी जांच? 

त्रासदी के बाद कई रिपोर्ट्स में सामने आया है कि जब क्रूज हादसा हुआ, उस समय बोट पर सवार लोगों ने लाइफ जैकेट नहीं पहन रखा था। जब बोट डूबने लगा तो हड़बड़ी में लाइफ जैकेट बंटनी शुरू हुई। दावा किया गया कि लाइफ जैकेट के बावजूद लोगों के डूबने का मुख्य कारण जैकेट का सही तरीके से न पहना होना, एक ही जैकेट में दो लोगों (मां-बच्चे) का होना, और डूबते समय हड़बड़ी में सुरक्षा नियमों की अनदेखी थी। हालांकि, क्रूज स्टाफ की ओर से जो लाइफ जैकेट मानकों कितना पूरा करते थे और उनकी गुणवत्ता क्या थी? ये जांच का विषय है। सवाल यह भी है कि जो क्रूज हादसे का शिकार हुआ, क्या वह सुरक्षा मानकों को पूरा करता था। अगर नहीं तो उसके संचालन पर रोक क्यों नहीं लगाई गयी। आखिरी कब तक नियमों की अनदेखी से मासूम लोगों की ऐसे ही जान जाती रहेगी। फिलहाल, इसे क्रूज संचालकों की लापरवाही का बहाना बनाकर प्रशासन पलड़ा झड़ने में लगा हुआ है और बड़े अधिकारी अपनी कुर्सी बचाने में लगे हुए हैं। उन पर कार्रवाई कब होगी? ये बड़ा सवाल है।

इंदौर गंदा पानी प्रकरण के बाद भी दिलीप कुमार यादव को मिली बड़ी तैनाती

देश के सबसे स्वच्छ शहर का 8 बार खिताब जीत चुके इंदौर में कुछ महीने पहले ही गंदा पानी पीने से दर्जनों लोगों की मौत हो गयी थी और सैकड़ों लोगों को अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था। उस वक्त दिलीप कुमार यादव इंदौर नगर निगम आयुक्त पद पर तैनात थे। इस मामले के तूल पकड़ने के बाद दिलीप कुमार यादव उनके पद से हटा दिया गया था। हालांकि, इंदौर से हटाए गए दिलीप कुमार यादव को मोहन सरकार ने पर्यटन विकास निगम का प्रबंध संचालक बना दिया। जिसको लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार पर निशाना साधा था। अब दिलीप कुमार यादव के पर्यटन विकास निगम का प्रबंध संचालक रहते जबलपुर में ये त्रासदी हुई है। ऐसे में सवाल खड़े होते हैं कि इंदौर की घटना से सबक लेने की बजाय दिलीप कुमार यादव को इतनी बड़ी जिम्मेदारी क्यों सौंपी गयी?

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