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Video- क्रूज में पानी भरने लगा, तो स्टाफ ने बांटी लाइफ जैकेट, किसकी लापरवाही से हुआ जबलपुर क्रूज हादसा?

जबलपुर के बरगी डैम में हुए दर्दनाक क्रूज हादसे ने एक बार फिर पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। हादसे के बाद सामने आए एक नए वीडियो ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि शुरुआत में पर्यटक सामान्य रूप से सफर का आनंद ले रहे थे, लेकिन कुछ ही मिनटों में हालात पूरी तरह बदल गए...

By Harsh Gautam 
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Jabalpur:  जबलपुर के बरगी डैम में हुए दर्दनाक क्रूज हादसे ने एक बार फिर पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। हादसे के बाद सामने आए एक नए वीडियो ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि शुरुआत में पर्यटक सामान्य रूप से सफर का आनंद ले रहे थे, लेकिन कुछ ही मिनटों में हालात पूरी तरह बदल गए।

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अचानक क्रूज के अंदर तेजी से पानी भरने लगा। पहले लोगों को समझ ही नहीं आया कि क्या हो रहा है, लेकिन देखते ही देखते अफरा-तफरी मच गई। बच्चे रोने लगे, महिलाएं घबरा गईं और यात्री अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। क्रूज तेज हिचकोले खा रहा था और लोगों में डर साफ दिखाई दे रहा था।

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सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि जब बोट डूबने लगी, तभी स्टाफ लाइफ जैकेट निकालता नजर आया। कई यात्री बिना लाइफ जैकेट के थे, जबकि कुछ लोग खुद स्टोरेज खोलकर जैकेट ढूंढ़ने लगे। इससे साफ है कि सुरक्षा नियमों का सही तरीके से पालन नहीं किया गया।

नियमों के मुताबिक, यात्रा शुरू होने से पहले हर यात्री को लाइफ जैकेट देना और उसे पहनाना जरूरी होता है। इनलैंड वेसल्स एक्ट 2021 भी यही कहता है, लेकिन यहां लापरवाही साफ दिखाई दी। मीडिया रिपोर्ट्स कि अनुसार शुरूआती जांच में पता चला है कि क्रूज के लिए 29 टिकट जारी किए गए थे, जबकि उस पर 40 से ज्यादा लोग सवार थे। यानी क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाया गया था।

मौसम विभाग ने पहले ही ऑरेंज अलर्ट जारी किया था और 50 किलोमीटर प्रति घंटे की तेज आंधी की चेतावनी भी दी थी। इसके बावजूद क्रूज को पानी में उतार दिया गया। यही लापरवाही अब कई परिवारों के लिए भारी पड़ गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक अब तक इस हादसे में 9 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि 4 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। प्रशासन की ओर से रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है, लेकिन बचाव कार्य में हुई देरी भी सवालों के घेरे में है।

कई रिपोर्ट्स में बताया गया है कि शाम 6:15 बजे हादसे की सूचना मिल गई थी, लेकिन पहली रेस्क्यू टीम 6:40 बजे तक रवाना नहीं हो सकी। तकनीकी खराबी की वजह से उपकरण दूसरी गाड़ी में शिफ्ट करने पड़े। दूसरी टीम करीब 7 बजे रवाना हुई। बचाव के शुरुआती दो घंटे सबसे अहम माने जाते हैं, और यही देरी कई जिंदगियों पर भारी पड़ गई।

अब इस पूरे हादसे ने प्रशासन, पर्यटन विभाग और सुरक्षा इंतजामों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। लोग पूछ रहे हैं कि जब मौसम खराब था, नियम साफ थे और खतरे की चेतावनी पहले से मौजूद थी, तो आखिर इतनी बड़ी लापरवाही कैसे होने दी गई।

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